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डाउनलोड करेंपरीक्षा की तैयारी के दौरान पढ़ाई का वह तरीका अपनाना चाहिए, जो न केवल आपके समय और मेहनत की बचत करे, बल्कि पढ़ाई के उद्देश्य विशेष के लिए पूरी तरह कारगर भी हो। आधुनिक रिसर्च में आजमाई गई पढ़ने की विशेष तकनीके अपनाकर परीक्षा की तैयारी को सफलता के मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है।
1 - स्कीमिंग यानी सरसरी नजर
किसी सामग्री की मोटे तौर पर जानकारी लेने या उसका सारांश जानने के लिए, पढ़ाई की स्कीमिंग तकनीक सबसे कारगर है, जिससे पूरी किताब पढ़ने में लगने वाले समय के 10-15 प्रतिशत भाग में ही टेस्टका 50 प्रतिशत तक जाना जा सकता है। इस तकनीक में पहले किताब की विषय सूची को पढ़ा जाता है। इसके बाद भूमिका, इंडेक्स और पाठों के कुछ शीर्षक पढ़े जाने चाहिए। फिर उस पाठ का पहला और आखिरी पैराग्राफ और बाद में हर पैराग्राफ की पहली और आखिरी लाइन। इसके अलावा यदि कोई डायग्राम, आंकड़ा या विशेष तथ्य दिया हुआ है, तो उसे भी पढ़ना चाहिए। ऐसा करने से उस किताब या विषय की मूल विषय-वस्तु की तस्वीर दिमाग में अंकित हो जाती है, जो परीक्षा के निबंधात्मक सवालों के अलावा समझ पर आधारित सवालों के लिए जरूरी है।
2 - स्कैनिंग यानी परीक्षण
जस तरह किसी किताब का सामान्य आइडिया जानने के लिए स्कीमिंग तकनीक अपनाई जाती है, उसी तरह किसी किताब से कोई संक्षिप्त सूचना खोजने के लिए स्कैनिंग तकनीक काम में ली जाती है। इसके अलावा यह हमें उस सोर्स को खोजने में भी मदद करती है, जो हमारे किसी उद्देश्य विशेष के लिए उपयोगी है। इस तकनीक में पेज विशेष पर कोई शब्द, वाक्यांश या आंकड़ा खोजने के लिए आंखों को तेजी से घुमाना होता है। स्कैनिंग करते समय सबसे पहले लेखक के संगठकों के प्रयोग देखें, जैसे- नंबर, अक्षर, स्टेप्स या शब्द। उन शब्दों को देखें जो बोल्ड, तिरछे या अलग-अलग फोन्ट साइज, स्टाइल या रंग में हैं। कभी-कभी लेखक मुख्य विचारों को पेज के हाशिए पर भी दे सकता है। इसके बाद चाही गई सामग्री से संबंधित पाठ या सेक्शन के शीर्षक, उप-शीर्षक या स्थानों को ढूंढ़कर पढ़ा जा सकता है।
3 - सिलसिलेवार पढ़ाई
यह तकनीक स्कीमिंग और स्कैनिंग तकनीक का मेल है। विज्ञान, साहित्य और विधि जैसे विषयों के लिए यह तकनीक सबसे कारगर मानी जाती है, जिन्हें समझने के लिए विस्तारपूर्वक पढ़ाई की जरूरत होती है। इस तकनीक में किताब या किताब की फोटोकॉपी में स्कीमिंग और स्कैनिंग तकनीकी से पढ़ाई के दौरान ही मुख्य तथ्यों, विचारों या अवधारणाओं को अंडरलाइन और हाइलाइट कर लिया जाता है। साथ-साथ खाली जगह पर कमेंट या प्रश्न भी लिख लिए जाते हैं। पूरी पढ़ाई के बाद इन्हें पढ़ा जाता है, जिससे एक पूरी किताब पढ़ने में लगने वाले समय में किताब का चार बार रिवीजन हो जाता है, क्योंकि स्कीमिंग और स्कैनिंग से पढ़ाई के साथ टिप्पणियों को लिखने में तीसरा और पढ़ने से चौथा रिवीजन हो जाता है। इस तरह समय की बचत के साथ...यादा सीखा जा सकता है।
4 - रिवीजन रीडिंग
जल्दी-जल्दी पढ़ने से संबंधित यह तकनीक उस सामग्री के लिए काम में ली जाती है, जिससे आप पहले से ही परिचित हैं, लेकिन अपनी समझ या जानकारी को पुख्ता करना चाहते हैं। इसमें छोटे-छोटे सिस्टम कार्ड पर किसी सामग्री को शॉर्ट में लिखना भी हो सकता है। रिवीजन के समय गहरी एकाग्रता और सतर्कता जरूरी है।
हर एक शब्द पढने से बचें...
पढ़ने से पहले टेक्स्ट का सर्वेक्षण कीजिए, जिससे पढ़ी जाने वाली किताब, लेख या सेक्शन को मोटे तौर पर जान सकें...
- हेडिंग को पढि़ए
- विषय-वस्तु सूची की सूचनाओं की व्यवस्था की जांच कीजिए
- हेडिंग और सब हेडिंग को पढि़ए
- ग्राफ, डायग्राम या टेबल को देखिए
- किसी प्रश्न या चैप्टर के अंत में दी गई समरी को पढि़ए
- चैप्टर के इंट्रोडक्शन और कन्क्लूजन को पढि़ए
- हरेक पैराग्राफ का पहला वाक्य पढि़ए
- अब आप उद्देश्य से संबंधित सेक्शन को पढ़ने के लिए तैयार हो गए हैं।
पढ़ते समय टेक्स्ट में होने वाले विचारों की प्रगति के प्रति सतर्क रहना चाहिए...
- हरेक शब्द पढ़ने के लालच से बचें
- खाली जगहों पर लिखते जाएं, वाक्यांशों को हाइलाइट करें सारांश लिखें, छोटे और बड़े पॉइंट्स पर विशेष ध्यान दें
- खुद से सवाल करें, जैसे- क्या दिया गया तर्क सही है? या इस तर्क से किसी तरह की तरफदारी की गई है? या लेखक के निष्कर्ष।
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