प्राचीन ग्रंथों में भारत को पृथ्वी की प्रथम और परम संस्कृति कहा गया है। यह दक्षिण-एशियाई देश मनोकायिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता पर प्राचीन ज्ञान का स्रोत है। ‘गुरु’, ‘कर्म’, ‘निर्वाण’ और ‘ओम’ जैसे शब्द हमारी (अमेरिकी) सांस्कृतिक शब्दावली में गहरी पैठ बना चुके हैं। योग व ध्यान सुपरमॉडल्स से लेकर शिखर सीईओ तक के लिए ख़ाली समय का सर्वश्रेष्ठ सदुपयोग हैं। वर्तमान क्षण के प्रति चेतन जागरूकता की अवधारणा भारतीय दर्शन की देन है, जो पश्चिम में भी विस्तार ले रही है।
यह योग की जन्मभूमि है। योग, जो दुनिया को भारत की सम्भवत: सबसे लोकप्रिय देन है। इस संस्कृत शब्द का अर्थ होता है दैवीय मेल। यदि इसके आध्यात्मिक लक्ष्यों को अलग कर दिया जाए, तो भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभाव काफ़ी व्यापक हैं। इनमें तनाव उन्मूलन, गर्दन व पीठ के दर्द से मुक्ति व ख़ुशहाल दाम्पत्य भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य को लेकर भारतीय एक समग्र दृष्टिकोण रखते हैं। आयुर्वेद के दो आधारभूत सिद्धांत हैं : पहला, मन और तन जुड़े हैं और दूसरा, काया को बदलने और उसे चंगा करने में किसी भी अन्य चीज से ज्यादा शक्तिशाली है मन। यह भारतीय ‘जीवन-विज्ञान’ सदियों से प्राकृतिक चीजों के जरिए ढेरों रोगों का उपचार कर रहा है और आधुनिक विज्ञान ने इसके ज्ञान को आजमाना बस शुरू ही किया है।
भारत में मजबूत पारिवारिक मूल्य हैं। वहां समाज की बुनियादी इकाई के रूप में परिवार पर ख़ासा जोर है। परिवार का दायरा बढ़ने के साथ एक प्रबल सहारा और सामाजिक सम्बंधों का संजाल मिलता है। यह दीर्घायु का एक अहम कारण है। भारतीय अक्सर कई पीढ़ियों वाले संयुक्त परिवार में साथ रहते हैं। एशिया सोसाइटी की वेबसाइट कहती है, ‘व्यक्ति कहीं भी जाए, लगभग हर जगह वह एक रिश्तेदार खोज सकता है, जिससे नैतिक और व्यावहारिक सहयोग की उम्मीद की जा सके।’
सुमधुर संगीत भारतीय जीवन के हर प्रसंग में शामिल है। वे संगीत की शक्ति का आनंद लेते हैं। यह वह स्थान है, जिसने जॉर्ज हैरिसन (पश्चिम के जाने-माने संगीतकार) का जीवन बदल दिया। भारत में संगीत आध्यात्मिक खोज का हिस्सा है। कहते हैं, भजन और कीर्तन में तन-मन को चंगा करने की ताक़त होती है।
हिंदुस्तानी खानपान में हल्दी का इस्तेमाल करते हैं। यह रोगों से रक्षा करती है और लम्बे जीवन का वरदान देती है। यह फंगस, जीवाणु और जलनरोधी है तथा कैंसर से लड़ने में सहायक भी है। और हां, यह भोजन में स्वाद व रंग भी भरती है। भारतीय पाककला में ऐसे ढेरों मसालों का इस्तेमाल होता है।
ग्रंथों में शाकाहार को सात्विक आहार कहा गया है, यानी यह पवित्रता, अच्छाई और ज्ञानोदय से जुड़ा हुआ है। योगगुरु बीकेएस आयंगर ने ‘लाइट ऑन योगा’ में लिखा है कि योगाभ्यास करने वाले को शाकाहार अपनाना चाहिए, ताकि आध्यात्मिक विकास के पथ पर आगे बढ़ा जा सके। इसके साथ ही शाकाहारी जीवनशैली दीर्घायु देती है और डाइबिटीज, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप का ख़तरा कम करती है।
भारतीय जानते हैं कि अविस्मरणीय श्रद्धांजलि कैसे दी जाए। ताजमहल, प्रेम की सबसे ख़ूबसूरत यादगार है। मुग़ल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में निर्मित संगमरमरी इमारत।
भारतीयों का जीवन रंगों से समृद्ध है। वसंतोत्सव, होली जैसे त्योहारों में नृत्य, गायन और चटख़ रंगों के जरिए ऋतुओं का स्वागत किया जाता है। यह ‘रंग-भूमि’ है। पूजा-पाठ, खानपान, पहनावा, लोककला, हर जगह रंग छाए हुए हैं। ये ख़ूबसूरत रंग उस संस्कृति और परम्परा के प्रतीक हैं और यात्रियों के माध्यम से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैले हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि रंगों का हमारी मनोदशा पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
भारत के मनीषी आत्मज्ञान को महत्व देते हैं। इसके माध्यम से देवत्व प्राप्त किया जा सकता है और आत्मा व परमात्मा (ब्रह्म) की अभिन्नता के बारे में जानकर मोक्ष पाया जा सकता है। अपने भीतर झांकने वाली इस आध्यात्मिकता की जड़ें भारत में हैं। यह पश्चिम मे भी क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। हम (अमेरिका) योगियों का देश बन रहे हैं। हो सकता है कि बहुत से अमेरिकियों ने कभी योग के आसन पर पैर भी न रखा हो, कभी कोई आसन न किया हो। लेकिन वे ध्यान लगा रहे हैं, अपने भीतर झांक रहे हैं। यह बात उन्हें भारत से जोड़ती है।
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