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घड़ी पढ़ाई की

7 वर्ष पहले
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स्कूल के इम्तेहान को अब ज्यादा व़क्त नहीं बचा है। परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों को पढ़ने के लिए टोकना ही काफ़ी नहीं होगा। घर के एक कोने को उनकी लाइब्रेरी में तब्दील करें, जहां रोज 1-2 घंटे सबको साथ बैठकर पढ़ना होगा। और सख़्त लाइब्रेरियन की भूमिका में होंगे आप। क्या-कैसे करना है, ग़ौर कीजिए..
मनोविशेषज्ञों के अनुसार पढ़ाई के दौरान बच्चे के आसपास ध्यान भटकाने वाली चीजों या गैजेट्स क़तई नहीं होने चाहिए। वे एकाग्रचित्त होकर पढेंगे, तभी विषय को आसानी से समझ पाएंगे और पढ़ी गई चीजों याद रहेंगी।
क्या करें- सबसे पहले बच्चों और अपनी, दोनों की सुविधानुसार नियमित पढ़ाई का एक समय निर्धारित करें। इस दौरान आवाजाही या शोर बिल्कुल नहीं होना चाहिए। पढ़ाई करते समय बच्चों को मोबाइल फोन पास रखने की मनाही हो! यदि पढ़ाई के सिलसिले में सहपाठी से कुछ पूछने की जरूरत हो, तो उसे कॉल करने की इजाजत दे दें, पर अपनी निगरानी में ही।
पढ़ाई के दौरान अक्सर बच्चों के दोस्त उन्हें बुलाने आ जाते हैं। आप उन्हें बाहर जाने की अनुमति न भी दें, तो भी उनका ध्यान बाहर ही लगा रहेगा। फिर तो एकाग्रता से पढ़ाई हो ही चुकी!
क्या करें- बच्चों को पहले ही हिदायत दे दें कि निर्धारित समय में सबको पढ़ाई करनी ही है। इस समय किसी का भी दोस्त खेलने के लिए बुलाने नहीं आएगा और न ही दोस्तों के फोन आने चाहिए। किसी भी तरह की ढील न दें। जरूरत हो, तो बीच में 10-15 मिनट के लिए विराम दे सकते हैं। इस बीच बच्चे कमरे में ही घूम सकते हैं या आराम कर सकते हैं। या फिर आप उन्हें कुछ हेल्दी स्नैक्स या ड्रिंक्स भी दे सकते हैं।
अकेले-अकेले पढ़ने के बजाय घर के सभी बच्चों को साथ बैठकर पढ़ने का नियम बनाएं। एक-दूसरे को तल्लीनता और शांति से पढ़ता देख, बच्चे मन लगाकर पढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।
क्या करें- सभी बच्चों को एक साथ पढ़ने को कहें। घर के छोटे बच्चों को शांति से पेंटिंग या ड्रॉइंग करने को कह सकते हैं। ख़ुद भी बच्चों के साथ बैठें। इससे जरूरत पड़ने पर वे तुरंत आपकी मदद ले सकते हैं और आप भी बच्चों पर नजर रख पाएंगे। ख़ाली बैठने से अच्छा होगा कि आप बिल्स या अन्य काग़जात छांटने, किताब पढ़ने जैसे काम करें। बच्चों की पढ़ाई के दौरान आप भी फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल न करें।
दो बच्चों के पढ़ने का अंदाज अलग-अलग हो सकता है। जैसे, कुछ बच्चे बोल-बोलकर पढ़ते हैं, कुछ घूम-घूमकर याद करते हैं, कुछ चुपचाप और बिल्कुल शांत माहौल में ही याद कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में एक के कारण दूसरे बच्चे का परेशान होना लाजमी है।
क्या करें- बच्चों को उनके अंदाज में पढ़ने की स्वतंत्रता देनी ही होगी। यदि अलग-अलग तरीक़ों से पढ़ने वाले दो बच्चे साथ बैठे हैं, तो उन्हें अलग-अलग विषय के अध्ययन के लिए कह सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जब एक बच्च बोल-बोलकर याद कर रहा है, तो दूसरा गणित के सवाल हल कर सकता है।