छात्र हो या घरेलू महिला, या फिर कोई बुज़ुर्ग- सबको दिमाग़ बढ़ाना है। लेकिन यह बढ़ता कैसे है? जवाब सीधा और सरल है, जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं- दिमाग़ इस्तेमाल करने से बढ़ता है। परंतु मुश्किल यह है कि हम यह नहीं जानते दिमाग़ का इस्तेमाल किस तरह करना है।
अगर हम याद्दाश्त बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा बातें याद रखने की कोशिश करेंगे, तो चक्कर में पड़ जाएंगे। गणित के बड़े-बड़े सवाल हल करने बैठेंगे, तो शायद जल्दी ही ऊब जाएंगे। किसी कठिन विषय पर सिर खपाएंगे, तो मुमकिन है कि कुछ पल्ले ही न पड़े।
इसलिए फ़िलहाल यह सब मत कीजिए। आप बाद में कर सकते हैं, पर अभी कुछ ऐसा कीजिए, जिसमें मज़ा आए और साथ में दिमाग़ भी बढ़ता जाए।
कुछ पकाइए...
यदि आप रसोई में काम करते हैं, तो इस बार कुछ नया बनाइए, ऐसा जो कभी नहीं बनाया। और यदि आपने चौके में कभी नहीं झांका है, तो वहां जाकर कुछ भी बनाइए। रेसिपी बुक या किसी अनुभवी की मदद भी ले सकते हैं।
इसका फ़ायदा- दिमाग़ को एक अनूठा अनुभव मिलेगा, जिससे वह सचेत होगा। सारी इंद्रियां जाग्रत होंगी। व्यंजन की गंध, स्वाद, स्पर्श, वह कैसा दिखता है, ये सारे नए अहसास दिमाग़ के अलग-अलग हिस्सों को सक्रिय करेंगे।
कुछ खाइए...
खाते तो आप रोज़ ही हैं, अब ज़रा अलग ढंग से खाना शुरू कीजिए। जब भी कुछ खाएं (या पिएं), तो पहले कौर-पहले घूंट के बाद तनिक ठहरकर मन ही मन यह पड़ताल कीजिए कि इसमें कौन-कौन सी चीज़ें मिली हैं। मिठास शक्कर की है या गुड़ अथवा शहद की? तीखापन मिर्च का है या लौंग का? यह कौन-सी दाल से बना है- उड़द, मूंग या अरहर? इसकी ख़ास गंध अजवायन के कारण है या तेजपत्ते की वजह से?
इसका फ़ायदा- यह सब करने के लिए दिमाग़ दौड़ेगा, पुराने संचित अनुभवों को खंगालेगा, याद करने की कोशिश करेगा, अनुमान लगाएगा, स्वाद, गंध और जीभ के स्पर्श से जुड़ी इंद्रियों के बेहतर इस्तेमाल का प्रयास करेगा।
शब्दों से खेलिए...
दिमाग़ बढ़ाने के लिए वर्ग-पहेलियां भरने के बारे में आप जानते हैं, अब शब्दों के साथ कुछ नया कीजिए। कोई भी शब्द लीजिए और सोचिए कि उससे सम्बंधित और कौन-कौन से शब्द हो सकते हैं। जैसे- मानव से जुड़े कई शब्द ध्यान में आ सकते हैं- मानवता, मानवीय, अतिमानवीय, अमानवीय, मान, मानवेतर, मानवेंद्र... और भी ढेरों शब्द।
इसका फ़ायदा- मस्तिष्क सक्रिय होगा। भाषा से सम्बंधित हिस्से में खड़खड़ाहट होगी। चित्रात्मक स्मृति में मानव जैसी चीज़ें खोजी जाएंगी। जुड़ाव की योग्यता का प्रयोग होगा।
नक्शा/सूची बनाइए...
काग़ज़ पर नहीं, मन में। किसी नई जगह गए हैं, तो होटल या रिश्तेदार के घर वापस आकर मन ही मन एक बार फिर उन रास्तों पर चलते हुए वहां पहुंचने की कोशिश कीजिए। सोचिए कि रास्ते में कौन-कौन सी दुकानें और लोग मिले थे। इसी तरह, रात में सोते समय मन ही मन सिलसिलेवार सूची बनाइए कि सुबह से आपने क्या-क्या किया, कहां गए, किससे मिले वग़ैरह।
इसका फ़ायदा- सारी इंद्रियों से मिले हमारे सारे अनुभव स्मृति भंडार में इकट्ठा होते हैं। इस दिमाग़ी कसरत से स्मृति के प्रयोग की काबिलियत और जागरूकता बढ़ती है।
कुछ पढ़िए...
आप गृहिणी हैं और वित्त या राजनीति से दूर भागती रही हैं, तो अब उन्हीं से सम्बंधित समाचार पढ़िए। आपकी साहित्य पढ़ने में रुचि है, तो विज्ञान से जुड़ी ख़बरें या लेख पढ़िए। अपना पसंदीदा विषय पढ़ रहे हैं, तो तेज़ी से पढ़ने की कोशिश कीजिए।
इसका फ़ायदा- अपने विषय से अलग हटकर कुछ पढ़ेंगे, तो मस्तिष्क के लिए नया अनुभव होगा और वह चौकस रहकर काम करेगा। तेज़ी से पढ़ेंगे, तो वह चीज़ों को तेज़ी से समझने की कोशिश करेगा। आंख और दिमाग़ के बीच का तालमेल भी बेहतर होगा।