"युवा ख़र्चीले हैं, उन्हें दूसरों से कोई मतलब नहीं, बस अपने में रहना चाहते हैं।' ऐसी बातें अक्सर ही घर के बड़े, युवाओं को लेकर कहते हैं। लेकिन एक युवा होने के नाते मैं बड़ों से पूछना चाहूंगा कि क्या आप इनके पीछे के कारण जानते हैं? जवाब शायद न मिले। यह ज़रूरी है कि अगर आप हम युवाओं को समझना चाहते हैं, तो हमारे ऐसे व्यवहार के पीछे के कारण भी जानें। यहां युवाओं के पक्ष को स्पष्ट करतीं ऐसी ही बातें बता रहे हैं, जो उन्हें समझने में आपकी मदद कर सकती हैं...
सफलता ही प्रमाण है
नई टेक्नोलॉजी से जुड़ना, लगातार अपडेट रहना, ब्रांडेड सामान ख़रीदना, ढेर सारा पैसा कमाना आदि बातें युवाओं को लुभाती हैं। जिस व्यक्ति के पास यह सब होता है, युवा उन्हें सफल इंसान मानते हैं। इस तरह महंगा घर, गाड़ी और नाम आदि ही उनके लिए संतुष्टि और प्रतिष्ठा के प्रतीक बन जाते हैं। इसीलिए वे ख़ुद भी इन्हें पाने की कोशिश करते हैं। क्या यह एक हद तक ठीक नहीं है? आख़िर, घर वाले भी तो चाहते हैं कि बच्चे ज़्यादा पैसा कमाएं, बड़ा आदमी बनें।
ख़ुद में दुनिया
युवा ख़ुद के प्रति ज़्यादा सचेत रहते हैं। वे ख़ुद से प्यार करते हैं और स्मार्ट दिखना चाहते हैं, ताकि लोग उनके पाए आएं। वे सफलताओं के ज़रिए अपनी अहमियत का अहसास कराने की कोशिश करते हैं। अपनी ज़िंदगी को पूरी तरह अपनी मानकर चलते हैं। यह सोच आत्मकेंद्रित भले ही लगे, पर क्या व्यक्तित्व निखार के लिए ज़रूरी नहीं है?
स्वतंत्रता ही सबकुछ
युवा भविष्य की छोड़ आज में जीते हैं। वे जीवन में ऐसा कोई निहित उद्देश्य नहीं देखते, जिसे पाने के लिए पूरी ज़िंदगी बिता दी जाए। वे अपने उद्देश्य स्वयं बनाते हैं। चूंकि वे दूर की नहीं सोचते, इसलिए ऐसे छोटे लक्ष्य बनाना पसंद करते हैं, जिसे निकट भविष्य में ही पाया जा सके। उनके लिए जो सबसे अधिक महत्व रखती है, वह है व्यक्तिगत स्वतंत्रता। इस कारण वे न तो किसी पर निर्भर होना चाहते हैं, न किसी से कुछ लेना चाहते हैं।
युवाओं की ऐसी सोच व व्यवहार के पीछे सामाजिक तौर-तरीक़ों के साथ ही जैविक कारण भी हैं। बड़े इसे लेकर ज़्यादा चिंतित न हों। युवा सिर्फ़ ख़ुशहाल और सफल ज़िंदगी जीना चाहते हैं। आप परेशान न हों, क्योंकि उम्र के अनुरूप यह सब सामान्य है। हां, यह ध्यान ज़रूर रखें कि वे ग़लत राह पर न चले जाएं और कोई दुर्व्यसन न पाल लें।