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पूरे घर पर हो नज़र...

5 वर्ष पहले
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घर की साज-सज्जा और सफ़ाई तो ज़रूरी है, साथ ही यह भी ज़रूरी है कि अनावश्यक और ख़राब चीज़ों को हटाया जाए।

...ताकि सुंदरता बनी रहे
मसकारा या अन्य सौंदर्य उत्पाद चार-छह माह में बदल देने चाहिए। ब्रश के माध्यम से त्वचा के कणों और सूक्ष्म जीवों के सम्पर्क में आने से ये ख़राब होते हैं। ऐसे ही दूषित लिप ग्लॉस या लिपस्टिक फटे होंठों पर फिराने से संक्रमण की आशंका रहती है। इसी तरह, कॉन्टेक्ट लैंस के केस को भी दो-तीन माह में बदलती रहें। सनस्क्रीन की मियाद पूरी होने का भी ध्यान रखें।

रसोई तो है ही आपकी
बीपीए युक्त प्लास्टिक के कंटेनर/बर्तन की साबुन से बार-बार की धुलाई व गर्म खाना परोसे जाने के चलते ख़तरनाक रसायन छोड़ने लगते हैं, जिससे कई तरह के कैंसर और हृदय रोगों की आशंका बढ़ जाती है। फ्रिज में भी खाना ज़्यादा दिन तक रखे जाने से सेहत के लिए नुक़सानदेह बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इसी तरह, बर्तन धोने का गीला स्पंज जल्द ही कीटाणुओं का घर बन जाता है। प्लास्टिक के चॉपिंग बोर्ड में भी चाक़ू से बनने वाली दरारों में बैक्टीरिया पनपते हैं। इसलिए, "अभी तो काम चल रहा है' की मानसिकता छोड़ें और चीज़ों को बदलती रहें।

स्वच्छता पर भी ध्यान रखें
पुराने टूथब्रश साफ़ करने के बजाय दांतों और मसूड़ों को नुक़सान पहुंचाते हैं। इसी तरह एंटीबैक्टीरियल साबुन भी लगातार उपयोग करने पर बैक्टीरिया ख़त्म तो नहीं करते, उल्टे प्रतिरोधी बनाकर और ख़तरनाक बनाते हैं।

मुश्किल भले पर बदल लीजिए
छोटे-बड़े कपड़े भी रख लिए जाते हैं कि वज़न बढ़ने/घटने पर फिट हो जाएंगे। लेकिन आमतौर पर वज़न जल्दी से बदलता नहीं है। और रोज़ इन कपड़ों काे देख-देखकर मन पर बोझ रहता है। जॉगिंग के जूतों को भी छह माह में बदल लेना चाहिए। भले ही ये फटें न, लेकिन दबे कुशन से हडि्डयों व पेशियों को नुक़सान पहुंच सकता है।
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