‘हम भारतीयों के स्वभाव में बस गया है भ्रष्टाचार!’
आज हम सब भ्रष्टाचार का रोना रो रहे हैं। सरकारों नेताओं और नौकरशाहों को दोष देते हैं। पर इसके लिए असल जिम्मेदार हम खुद हैं। हम भारतीय लोग स्वभाव से ही भ्रष्ट हैं। अगर हम खुद न चाहें तो कोई हमें करप्ट नहीं कर सकता। मुझे याद है, फिल्मी करिअर की शुरुआत के दिनों में मैं एक ऐड की शूटिंग के लिए विदेश गया था। वहां होटल के टॉयलेट में मैं अपनी घड़ी भूल आया, जो उस जमाने में करीब 12 हजार की थी। 6 घंटे बाद मुझे याद आया कि घड़ी तो वहां छोड़ आया हूं। इस विश्वास के बावजूद कि घड़ी नहीं मिलने वाली, मैं रिसेप्शन पर पूछताछ करने गया। मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा कि एक चाचा ने घड़ी पाकर रिसेप्शन पर जमा कर दी थी। यह नेशनल कैरेक्टर होता है, जो हम खो चुके हैं।
‘नई पीढ़ी देश को बदलेगी’
पिछले 10-15 सालों में नैतिक पतन चरम पर है। करिअर इतना इंपॉर्टेंट हो गया है कि दूसरी किसी चीज की चिंता ही नहीं। स्टार्स को ही ले लीजिए। इतना कमाते हैं, पर खर्च करने की नीयत नहीं है। हमें किसी चीज की जरूरत होगी तो प्रोडक्शन से बोल देंगे, अपनी जेब में हाथ नहीं डालेंगे। सब जानते हैं कि पता नहीं कौन-सा फ्राइ-डे हमारा वक्त बदल दे। सब अनिश्चितता में जी रहे हैं, इसलिए समय रहते ज्यादा से ज्यादा कमा लेना चाहते हैं। लेकिन आने वाली पीढ़ी इस तस्वीर को बदल देगी।
‘जय हो’ का हीरो केजरीवाल नहीं है’
‘जय हो’ में मेरे किरदार का नाम जय है। लेकिन जैसी कि मीडिया में चर्चा है, यह किरदार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रेरित नहीं है। समानता सिर्फ इतनी है कि एक प्वाइंट पर आकर जय भी सिस्टम के खिलाफ जंग छेड़ता है। जय आम आदमी जैसा, मेरे जैसा है। वह हमेशा यह सोचता है कि लोग क्या कहेंगे, इसलिए चाह के भी कुछ नहीं कर पाता। वह परिस्थितियों से भागता फिरता है। दूसरों के लफड़ों में नहीं पड़ता। कहीं घिर जाता है तो समझौता कर लेता है। लेकिन जब घिरते-घिरते पूरी तरह कोने में घिर जाता है, बच निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता, तब एक्शन में आता है।
‘राजनीति का बजट मेरे पास नहीं है’
मेरी किसी भी राजनीतिक पार्टी से दोस्ती या दुश्मनी नहीं है। कोई भी बुलाता है, मैं चला जाता हूं। लेकिन मैं राजनीति में कभी नहीं जाऊंगा। मैं अच्छे इरादों वाला अच्छा आदमी हो सकता हूं, पर राजनीति के लिए अनफिट हूं। पहली अयोग्यता तो यही है कि मुझे उठाने-गिराने की कला नहीं आती।
‘मैं ‘गुड मॉर्निंग’ पेटेंट कराऊंगा’
ए. आर. रहमान ने ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के अपने गाने ‘जय हो’ को पेटेंट करा रखा है, जिसे मैं या कोई अपनी फिल्म के टाइटल में यूज नहीं कर सकता, ऐसी खबरें मैंने भी अखबारों में पढ़ी हैं। रहमान साहब ने तो कुछ कहा नहीं है। बोलचाल के शब्द कोई पेटेंट नहीं करा सकता है। अगर ऐसा है तो मैं ‘गुड मॉर्निग’ ‘गुड इवनिंग’, ‘हैलो’ को पेटेंट करा लेता हूं। आपको ये शब्द यूज करने के लिए मुझसे इजाजत लेनी होगी। हमें यह टाइटल हमारी एसोसिएशन ने दिया है। दो-तीन और लोग इस टाइटल की होड़ में थे, पर हमने उनसे रिक्वेस्ट कर ली। अगर रहमान साहब को कोई आपत्ति थी तो मुझे फोन करते, हम टाइटल बदल देते। मैं तो इसके पूर्व टाइटल ‘मेंटल’ से भी बहुत खुश था। हर सीधे आदमी को ‘मेंटल’ समझा जाता है और इस लिहाज से जय पूरा मेंटल है। पर डैडी (सलीम ख़ान) ने कहा कि यह टाइटल नहीं चलेगा, लोग तुझे ‘मेंटल खान’ पुकारेंगे। उनकी खुशी के लिए उनके ही सुझाव पर हमने ‘जय हो’ शीर्षक रखा, जो पहले से बेहतर है। हमारे घर में डैडी का फैसला अंतिम फैसला होता है। हमें अभी भी कदम-कदम पर उनकी सलाह की जरूरत पड़ती है। किसी सीन में सही डायलॉग नहीं मिल रहे होते हैं तो हम सीधे डैडी के पास जाते हैं। उनके पास हमारी हर समस्या का निदान मौजूद रहता है।
‘यह गाना मेरा ही आइडिया है’
यह गीत ‘बाकी सब फर्स्ट क्लास है’ एक सच्ची घटना की देन है। मेरे एक दोस्त के भाई की मौत हो गई। उसका पूरा परिवार उजड़ गया। वह बोला - ‘भाई नहीं रहा, मां-बाप सदमे में हैं, मैं परेशान हूं, बाकी सब फर्स्ट क्लास है।’ मेरे दिमाग में ‘बाकी सब फर्स्ट क्लास है’ शायद अटक गए। मुझे देश के बारे में भी ऐसा ही लगा कि गरीबी है, भूख से लोग मर रहे हैं, भ्रष्टाचार-महंगाई मारे डाल रही है, रेप और कत्ल हो रहे हैं, बाकी सब फर्स्ट क्लास है। मैंने म्यूजिक डायरेक्टर साजिद-वाजिद से कहा कि इस तरह का व्यंग्यात्मक गाना जरूर रखो। यह गाना कुछ ज्यादा ही पसंद किया जा रहा है।
‘कैटरीना की सिफारिश कर फंस गया था मैं’
मेरा मानना है कि फीमेल एक्टर को अच्छी डांसर होना ही चाहिए। डांस हमारी फिल्मों का आवश्यक तत्व है। मेरी मां हेलेन बड़ी-बड़ी हीरोइनों पर भारी पड़ती थीं, क्योंकि वे बेजोड़ डांसर हैं। उनका डांस फिल्मों को हिट करा देता था। डेजी शाह को भी मैंने इस फिल्म में उनके डांस से प्रभावित होकर लिया। वे गणेश आचार्य की असिस्टेंट हुआ करती थीं। मैं किसी भी लड़के-लड़की में कुछ खास देखता हूं तो दिल से दुआ करता हूं कि इसे आगे आना चाहिए। संभव हो तो सहयोग भी करता हूं, लेकिन कैटरीना की सिफारिश कर मैं फंस गया था। मेरे कहने पर डेविड धवन ने ‘मैंने प्यार क्यों किया’ में उसे कास्ट कर लिया, पर कैटरीना ने बताया कि उसे इंडियन डांस तो आता ही नहीं है। मैंने माथा पीट लिया। खैर, सेट पर पहुंचे तो उसने थोड़ा-बहुत मटक कर दिखाया। डेविड बोले कि वे काम करा लेंगे, तब मेरी जान में जान आई। अब ‘धूम-3’ का टाइटल सॉन्ग देखता हूं तो सोचता हूं कि क्या यह वही कैटरीना है। क्या ‘फाडू’ डांस किया है उसने!
‘एली बहुत जल्दी मेरे साथ दिखेंगी’
मैं ‘बिग बॉस-7’ के दो हाउस मेट्स से वाकई बहुत प्रभावित हूं। ये मेरी फिल्म ‘जय हो’ के जय की तरह बेहद सीधे-सच्चे हैं, इसलिए पीछे रह गए- एली अबराम और संग्राम सिंह। वरना आपने देखा ही है कि ऐसे-ऐसे लोग भी थे, जो हर देवी-देवता के फोटो लगाकर बड़े धार्मिक और नेक दिखने की कोशिश करते थे और महाचालाक थे। बहरहाल, एली मुझे अच्छी लगती है तो लगती है। अगर कोई प्रोड्यूसर-डायरेक्टर हम दोनों को लेकर फिल्म बनाना चाहेगा तो मैं तैयार हूं। उम्मीद है कि किसी फिल्म में एली को बहुत जल्दी मेरे साथ देखेंगे।
‘स्टार चिल्ड्रेन लॉन्च करना सोची समझी स्कीम नहीं है’
इस साल मैं बतौर प्रोड्यूसर आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली और सुनील शेट्टी की बेटी आथिया शेट्टी को लॉन्च कर रहा हूं। स्टार चिल्ड्रेन लॉन्च करना सोची-समझी स्कीम नहीं है, सेटअप अच्छा बन जाता है तो इसमें हर्ज क्या है! मैं तो गोविंदा की बेटी नर्मदा आहुजा को भी लॉन्च करना चाहता था, लेकिन गोविंदा को फिल्म की कहानी पसंद नहीं आई और मना कर दिया।
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