29 वर्षीय
अर्जुन कपूर 2012 में ‘इश्कजादे’ से पर्दे पर आए। इसके बाद उनकी 5 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं। 9 जनवरी, 2015 को उनकी छठी फिल्म ‘तेवर’ रिलीज होने वाली है, जिसमें वे पिंटू शुक्ला की भूमिका दिखेंगे। हाल ही में इरोज़ के ऑफिस में उनसे यह बात हुई :
फिल्म ‘तेवर’ में किस तरह का तेवर दिखा रहे हैं?
फिल्म में मेरा किरदार पिंटू शुक्ला कबड्डी प्लेयर है। वह आगरा का 21-22 साल का लौंडा है, जो आजकल अपनी जिंदगी में टाइमपास कर रहा है। वह जानता नहीं कि आगे चलकर क्या करेगा, लेकिन अपने दिमाग से स्ट्रीट स्मार्ट है। वह सोचता है, जो कुछ होगा, सब संभाल लूंगा। उसका सबसे बड़ा जो तेवर है, जिस वजह से प्रॉब्लेम में फंसता है, वह यह कि अपने सामने लड़कियों की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं करता। जहां कोई लड़की से बदतमीजी कर रहा है, वह जाकर उसके कान के नीचे बजा देता है। एक बार पता चलता है कि उसने जिसे बजाया है, वह तो मथुरा के बाहुबली और सबसे बड़े गैंगस्टर हैं। ऐसे में िपंटू को भागना ही है। भागते हुए वह कहता है, मैडम आप भी भाग रही थीं, मैं भाग रहा था, चलो दोनों साथ मिलकर भागते हैं। अब पिंटू ठहरा स्पोर्ट्समैन और अकलमंद। जब दिमाग से मारपीट में घुसता है, तब अच्छे-अच्छों की बोलती बंद कर देता है। पहले भी दंगे-फसाद में घुसकर सबकी परेड ले चुका है।
कभी निजी जिंदगी में ऐसी सिचुएशन में फंसे हैं?
हां, एक बार लोखंडवाला में यही सब करके भाग रहा था, तब लोग मेरे पीछे बंदूक लेकर आ गए थे (मजाक में हंसने के बाद नार्मल होकर) नहीं... पर यही तो मजा है एक्टर होने का... जो आप किरदार निभाते हो, वह आप होते नहीं हो और फिल्म में जो घटनाएं घटती हैं, वह एक्सपीरियंस आप रियल लाइफ में नहीं किए होते हैं।
होम प्रोडक्शन फिल्म करने का दबाव भी होता है?
जब शूट कर रहा था, तब तक कोई दबाव महसूस नहीं किया था। उस समय शूटिंग और फिल्म पर पूरा ध्यान था। सिर्फ अपने सीन के ऊपर ही सोचता था। तब ऐसा नहीं सोचता था कि 9 जनवरी को पिक्चकर लगेगी, तब लोग मेरे होम प्रोडक्शन की फिल्म है, ऐसा सोचेंगे। लेकिन अब जब मीडिया पूछती है कि घर के प्रोडक्शन की फिल्म करके कैसा लगा तो अब प्रेशर फील करता हूं। थोड़ी नर्वसनेस महसूस करता हूं।
अच्छा, अमित शर्मा निर्देशित यह पहली पिक्चर है। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
अमित की जरूर पहली पिक्चर होगी। लेकिन इसकी क्लियरिटी देखकर ऐसा लग रहा है कि वे इंडस्ट्री की सारी पिक्चरें बना चुके हैं। वे अब तक लगभग 600 एड् फिल्में कर चुके हैं तो उन्हें निर्देशन का बहुत ज्यादा एक्सपीरियंस है। वे ‘कांस फिल्म फेिस्टवल’ में भी सम्मानित हो चुके हैं। बहुत सुलझे हुए डायरेक्टर हैं। वे बारीकी में जाकर एक्टर्स से अपना काम बखूबी निकालना जानते हैं। मैं जब पहले दिन उनसे मिला, तब मेरे सारे डाउट्स खत्म हो गए। फिल्म को लेकर हमारे सोच-विचार एक जैसे थे। दोनों का एक ही तालमेल होने के कारण काम करने में बहुत मजा आया।
आपकी फिल्म ‘रिवोल्यूशन 2020’ शुरू होने वाली थी। क्यों बंद पड़ गई?
यह टेक्निकल राइट्स की वजह से बंद पड़ गई। यह
चेतन भगत की नॉवेल पर बनने वाली फिल्म थी, जिसे उन्होंने करीब 4 साल पहले लिखा था। इस फिल्म के राइट्स जब ‘यूटीवी’ के पास था, तब उन्होंने मुझे यह फिल्म ऑफर की थी। जब तक मैं तय करता, तब तक इसके राइट्स एक्सपायर हो गए और वापस इसके राइट्स चेतन भगत के पास जा चुका था। अब जब चेतन भगत से मिलिएगा, तब उनसे जरूर पूछिएगा।
सोनाक्षी को लेने का फैसला किस तरह लिया गया?
सोनाक्षी में एक जो हिंदुस्तानियत है, वह सबको अपील करती है। एक एक्ट्रेस के तौर पर भी वे अपने आप को डीवा की तरह पेश नहीं करती हैं, वे बड़े साधारण ढंग से अपने आप को रखती हैं। फिल्म में मथुरा की जिस तरह की लड़की को दिखाने की ज़रूरत है, उस पर सोनाक्षी एकदम फिट बैठती हैं।