सत्रह साल पहले की बात है। गुजरात के अरविंद भाई पटेल बुखार से तप रहे थे। बुखार कम नहीं हुआ तो माथे पर गीली पट्टी रखी और सो गए। उठे तो बुखार कम था। इससे उन्हें ऐसा वाटर कूलर बनाने का आइडिया मिला, जो बिना बिजली केपानी ठंडा कर सके। लगभग 15 साल की मेहनत के बाद उन्होंने अपने इस सपने को सच कर दिखाया। राष्ट्रपति ने उन्हें इस कोशिश के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा।अरविंद कहते हैं, ‘150 लीटर क्षमता का यह नेचुरल वाटर कूलर पानी को प्रचंड गर्मी में भी 26 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर सकता है। एक घंटे में इसमें लगभग 55 लीटर पानी ठंडा हो जाता है, इसलिए यह स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और ऑफिस के लिए बहुत उपयोगी है।
खासकर उन इलाकों में, जहां बिजली नहीं आती।’ 58 वर्षीय अरविंद भाई 600 नेचुरल वाटर कूलर सिर्फ गुजरात में बेच चुके हैं। इसकी कीमत उन्होंने 51 हजार रुपए रखी है। उनका दावा है कि इसमें ठंडा होने के बाद पानी का स्वाद नहीं बदलता और प्यूरीफायर लगा होने की वजह से पानी बिल्कुल साफ निकलता है। वाटर कूलर से पानी निकालने के लिए 6 नल लगाए गए हैं। यानी एक साथ 6 लोग पानी निकाल सकते हैं। इसमें एक ओवरहेड टैंक लगाया जाता है। उसका पानी प्यूरीफाई होकर अंदर जाता है।
इसके बाद पानी पाइप से जुड़े ‘टी’ में जाता है और बूंद-बूद कर चार जगह कॉपर की कॉइल पर गिरता है। दूसरे रास्ते से पानी टंकी में भी जाता है। कॉइल को अरविंद ने विकोस फाइबर रिबन से लपेटा है, जबकि टंकी के ऊपर विकोस
फाइबर क्लॉथ लपेटा हुआ है। बूंद-बूंद पानी फाइबर रिबन और क्लॉथ पर गिरता है। क्लॉथ और रिबन लगातार गीले रहने की वजह से पानी ठंडा होता है। वाटर कूलर के ऊपर एक सोलर पैनल भी लगाया गया है। इसे अंदर लगे एक पंखे से जोड़ा गया है। सोलर एनर्जी से चलने वाला पंखा जो हवा फेंकता है, उससे पानी का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस और कम रहता है। अरविंद का कहना है कि मौसम में नमी जितनी ज्यादा रहती है, पानी उतना ज्यादा ठंडा रहता है। इस वाटर कूलर को बनाने में अरविंद ने लगभग 2 लाख खर्च किए।
पहले उन्होंने 5, 10 और 20 लीटर क्षमता वाले वाटर कूलर बनाए थे। बाद में बदलाव करके 100 और 150 लीटर क्षमता वाले कूलर बनाए और सोलर पैनल से जोड़कर इसमें एक डीसी फैन भी लगाया। इस कुदरती कूलर के लिए अरविंद को पेटेंट मिल चुका है।
इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने एक कोल्ड स्टोरेज भी बनाया है। अरविंद इससे पहले ऑटो एयर किक पंप, ऑटो कंप्रेशन स्प्रेयर समेत कई आविष्कार कर चुके हैं। 11वीं में पढ़ाई छोड़ने वाले अरविंद को गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर की मानद उपाधि से नवाजा है।
बिन बिजली के चलने वाला कूलर तैयार करने वाले अरविंद इन दिनों चाय बागानों में चाय की पत्त्तियां तोड़कर इकट्ठा करने वाली महिलाओं की जिंदगी आसान बनाने से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण आविष्कार पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जान है, तब तक ऐसे ही आविष्कार कर लोगों की जिंदगी आसान बनाता रहूंगा।