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कोचिंग सेंटर को पढ़ाया फीस का सबक

9 वर्ष पहले
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माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर जितनी भी फीस मांगें, वे दे देते हैं। कोंचिग इंस्टीट्यूट तो दो-तीन साल की फीस एक साथ ही ले लेते हैं। फिर, वहां पढ़ाई चाहे जैसी हो, झेलना तो बच्चों के साथ मां-बाप को ही होता है। खराब पढ़ाई की वजह से अगर बच्चे कोचिंग छोड़ते हैं तो कोचिंग सेंटर को तो फर्क नहीं पड़ता। नुकसान होता है माता-पिता और उनके बच्चों का। आज की हमारी कहानी के हीरो प्रमोद पंवार उन सभी अभिभावकों के लिए मिसाल हैं, जिनके बच्चे कोचिंग सेंटर से निराश होने के बावजूद वहां जाने को मजबूर हैं। प्रमोद ने अपने हक की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। वह अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसलिए उसे फिटजी कोचिंग सेंटर, दिल्ली में दाखिल कराया। पर, पढ़ाई अच्छी न होने की वजह से उनके बेटे ने कोचिंग सेंटर जाना छोड़ दिया। प्रमोद ने बाकी की फीस वापस मांगी तो कोचिंग सेंटर ने इनकार कर दिया। अपनी खून-पसीने की कमाई को कोचिंग की मनमानी के सामने वह यूं ही नहीं छोड़ सकते थे। आइए देखते हैं, उन्होंने कैसे लड़ी लड़ाई? फिटजी में दो साल की इंजीनियरिंग की कोचिंग की फीस 94,282 रुपए थी। फीस की पहली किस्त के तौर पर प्रमोद ने 77,446 रुपए जमा करवा दिए। 12 मई 2006 से कोचिंग में पढ़ाई शुरूहुई। पर, साढ़े पांच महीने पढ़ाई करने के बाद प्रमोद के बेटे राहुल ने उसी साल 29 अक्टूबर से कोचिंग जाना छोड़ दिया। राहुल के मुताबिक कोचिंग में पढ़ाई अच्छी नहीं हो रही थी। कोचिंग सेंटर वाले बहुत धीमी गति से पढ़ा रहे थे। बच्चों के सवालों का जवाब भी ठीक से नहीं दे पाते थे। प्रमोद ने बेटे के कोचिंग छोड़ने के बाद जमा फीस में से 55,000 रुपए वापस मांगे। पर फिटजी ने फीस लौटाने से मना कर दिया। जब बातचीत से मामला नहीं सुलझा, तो प्रमोद ने कंज्यूमर कोर्ट जाने का फैसला किया। उन्होंने अपने वकील के जरिए उपभोक्ता निवारण कोर्ट में अपील की। उन्होंने 50,000 रुपए फीस के साथ 5000 रुपए मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे की फीस के तौर पर 2000 रुपए मांगे। कोर्ट में कोचिंग सेंटर वालों ने कहा कि समाज में उनकी बहुत प्रतिष्ठा है। वहां टेस्ट में पास होने का बाद ही दाखिला मिलता है। उन्होंने दाखिले के फॉर्म का हवाला दिया, जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि जमा फीस वापस नहीं होगी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, ‘किसी भी स्कूल, कोचिंग सेंटर को यह अधिकार नहीं है कि वह उस सर्विस के पैसे पहले ले, जो उन्होंने दी ही नहीं। इसलिए ‘जमा की गई फीस वापस नहीं की जाएगी’ जैसे नियम पूरी तरह अनुचित हैं।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग सेंटर एक बार में सिर्फ एक साल तक की फीस ही ले सकते हैं। चूंकि बच्चे की सीट एक साल के लिए रिजर्व हो जाती है, इसलिए कोचिंग सेंटर एक साल तक की फीस ले सकते हैं। उससे ज्यादा जमा पैसे उन्हें वापस करने हांेगे। कोर्ट ने कोचिंग सेंटर को निर्देश दिया कि वह एक साल की फीस काटने के बाद बचे हुए 30,000 रुपए, 5,000 रुपए मानसिक प्रताड़ना के और 2,000 रुपए मुकदमे की फीस तौर पर प्रमोद को वापस करे। हम खरीदार, हमारा अधिकार प्रमोद पंवार, दिल्ली

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