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100 साल लंबी उम्र के रहस्य

9 वर्ष पहले
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भारतीय सिनेमा से भी पहले, उसकी जबरदस्त अदाकारा जोहरा सहगल ने अपनी बेहतरीन जिंदगी के 100 साल पूरे कर लिए। उनका शानदार जीवन खुली किताब की तरह है, जिसे सेहतमंद और खुशमिजाज जिंदगी की मिसाल माना जाता है। कोलकाता के ‘पॉकेट हक्यरुलिस’ मनोहर आइच और ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के ‘मैराथन मिरैकल’ फौजा सिंह भी अपनी-अपनी ‘सेंचुरी’ पूरी करने में सफल रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भोलाराम दास ने पूरे 100 साल की उम्र में ‘नव-वैष्णववाद’ विषय पर शोध करते हुए डॉक्टरेट की डिग्री पाने के लिए गुवाहाटी विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रेशन कराया। हालांकि डिग्री हासिल किए बगैर कुछ दिन पहले वे चल बसे। लेकिन सारी दुनिया के छात्रों को बड़े मकसद और कड़ी मेहनत के साथ जीने की शिक्षा देकर गए। जयपुर की मुन्नी बेगम ने 120 साल की उम्र में पहले हज और इसके 25 दिन बाद अपनी जिंदगी का यादगार सफर पूरा किया। इन लाजवाब लोगों की बेमिसाल जिंदगी से जुड़ी अपनी-अपनी कहानियां हैं, जो समाज और विज्ञान के सामने लंबी, कर्मठ, जिंदादिल और सेहतमंद जिंदगी के रहस्य उजागर करती हैं। इसके अलावा सेहत के मोर्चे पर दुनिया के साथ-साथ भारत की तस्वीर भी बेहतर हो रही है। 1990 के बाद के दो दशकों में हम भारतीयों का औसत जीवनकाल 7 साल (58 से 65) बढ़ा है। तो लंबी और लाजवाब लाइफ का फॉमरूला क्या है? इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल वी.एम. कटोच के मुताबिक, ‘लंबी और सेहतमंद जिंदगी का कोई मैजिक फॉमरूला नहीं है, लेकिन जेनेटिक मटिरियल, न्यूट्रिशन, लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिवनेस लंबी और सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी है।’ उनका कहना है कि दिमाग की कंडीशनिंग से जिंदगी की बेहतरी तय होती है। अगर आप शारिरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय हैं और डाइट अच्छी लेते हैं तो 100 साल की खुशहाल जिंदगी का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। बीसवीं सदी में भारत सहित विकासशील देशों में लोगों का जीवनकाल सबसे ज्यादा बढ़ा है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि किसी व्यक्ति को कोई बीमारी तीन वजहों से होती है: उनकी जीवनशैली या लाइफस्टाइल (जिसमें डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान न देना), अपने आस-पास का माहौल (जैसे इनफेक्शन फैलाने वाले जहरीले पदार्थो की मौजूदगी) और उनके जीन्स। सेनिटेशन यानी सफाई व्यवस्था में सुधार, एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल और बेहतर मेडिकल केयर ने भारत में पर्यावरण को बेहतर बनाया है। जहां तक लाइफस्टाइल की बात है तो पोषण संबंधी कमियों के कारण होने वाली बीमारियां भी पूरी तरह नहीं, लेकिन कम जरूर हुई हैं। जीन्स संबंधी विरासत को लेकर खुश होने या पछताने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि यह तो पूरे स्वास्थ्य समीकरण का महज एक हिस्सा है। उम्र लंबी, सेहत पर सवाल स्टडीज के मुताबिक उम्र के अगले पड़ावों पर पहुंचने के हमारे तौर-तरीके बदल रहे हैं। शारिरिक और मानसिक रूप से 70 साल के आज के लोगों की सेहत 1970 के दशक के 65 साल के लोगों जैसी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 में जन्म के समय आम भारतीयों का अनुमानित जीवनकाल (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) 58 साल था। 20 साल में हालात बेहतर हुए और 2009 में यह 65 साल हो गया। लंबी उम्र के हर ऊंचे पड़ाव के साथ जीने के आसार और ज्यादा बढ़े हैं। लेकिन दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुपम सचदेव का कहना है, ‘भारत में अब संक्रमण (इन्फेक्शन), अपंगता, कैंसर और कुछ सामान्य बीमारियों का इलाज मुश्किल नहीं है। इस वजह से हमने लंबी उम्र हासिल कर ली है और कर भी रहे हैं, लेकिन हमारी सेहत सवालों के घेरे में है।’ सीआइए वर्ल्ड फैक्ट बुक के मुताबिक वर्ष 2011 में जन्म के बाद अनुमानित जीवनकाल की 221 देशों की लॉन्जेविटी रैंकिंग में भारत 67.14 वर्ष के साथ 160वें स्थान पर है। यानी दूसरे देशों के मुकाबले हम फिसड्डी हैं। डॉ. सचदेव कहते हैं, ‘यदि हमारी सरकार सेनिटेशन, वैक्सिनेशन और न्यूट्रिशन जैसे मोर्चो पर ईमानदारी से काम करे तो अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।’ हमारी आने वाली जिंदगी कैसी होगी? यहां सवाल यह उठता है कि जीवनकाल बढ़ने के बाद हम तंदरुस्त होंगे या हमारा शरीर बीमारियों का घर होगा? स्मोकिंग, शराब, गलत खान-पान और शारिरिक निष्क्रियता जैसी पश्चिमी बीमारियों ने भारतीयों के बड़े तबके के शरीर को भी खोखला करना शुरू कर दिया है। बीती सदी खत्म होते-होते अमेरिका में एक तिहाई मौतें इन्हीं कारणों से हुई थीं। दरअसल, आज आप जो भी काम करते हैं, वह मायने रखता है। लाइफस्टाइल से जुड़ी आपकी छोटी-छोटी पसंद का आपकी जिंदगी की गुणवत्ता और दीर्घायु होने पर गंभीर असर पड़ता है। डॉ. कटोच का कहना है, ‘कई बार शराब और सिगरेट का सेवन करने वाले लंबी जिंदगी जी लेते हैं लेकिन इसका उनके शरीर पर बुरा असर जरूर होता है। वे अपनी इस लंबी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं।’ डॉ. सचदेव के मुताबिक, ‘हमारा हर दिन बेहतर लाइफ मैनेजमेंट पर निर्भर है। यह हम ही तय करते हैं कि अपनी जिंदगी कैसे जीना है। 100 साल पहले सेनिटेशन, वैक्सिनेशन जैसी चीजें नहीं थी लेकिन अनुशासित व्यवहार लोगों को अच्छी जिंदगी देता था।’ 100 साल की जिंदगी के रहस्य सुलझाने के लिए दुनियाभर में कई वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। आश्चर्य नहीं कि इसमें जीन्स की भूमिका को स्वीकार किया गया है। स्वीडन में 80 साल के जुड़वा भाइयों पर हुई स्टडी में पता चला है कि लंबी उम्र का संबंध जीन्स की तुलना में इस बात से ज्यादा है कि व्यक्ति का दिमाग कैसे काम करता है। लंबी उम्र में अनुवांशिक कारकों का हिस्सा 25 से 35 फीसदी है। इसके अलावा लंबी और सुखद जिंदगी में डाइट, एक्सरसाइज और बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित जांच जरूरी है। फोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली में रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. विवेक नांगिया का कहना है, ‘नियमित एक्सरसाइज, स्ट्रेस कम करना, मेडिटेशन और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना लंबी और सेहतमंद जिंदगी का फॉमरूला है।’ डॉ. नांगिया मानते हैं कि महत्वाकांक्षा, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावाद के कारण लोग बेहद तनाव में रहते हैं और अपनी जिंदगी को जोखिम में डालते हैं। यदि वे अपने स्ट्रेस को कंट्रोल करें तो बेहतर जिंदगी जी सकते हैं। कुछ लोगों की जिंदगी लंबी होती है लेकिन सेहतमंद नहीं और कुछ लोग सेहतमंद होने के बावजूद लंबी जिंदगी नहीं जी पाते। डॉ. कटोच बताते हैं, ‘उम्र बढ़ना (एजिंग) जटिल प्रक्रिया है। सकारात्मक रुख से जिंदगी में सुकून हासिल किया जा सकता है। यह शारिरिक और मानसिक पीड़ा से उपजी वेदना और अवसाद को कम करने में मददगार है। जैसे गीता के उपदेश को मानने वाले कहते हैं, ‘जो होना है वह तो होगा ही। मैं अपना काम करता रहूंगा।’ कम उम्र में अचानक दुनिया को अलविदा कहने वाले ज्यादातर मामलों में लोग स्ट्रेस की वजह से जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। हेल्दी लाइफ के लिए क्या जरूरी है? डायटीशियन डॉ. इशी खोसला कहती हैं,‘जीन्स के बाद हमारी हेल्दी लाइफस्टाइल में डाइट और न्यूट्रिशन बुनियादी जरूरतें हैं।’ परंपरागत भारतीय जीवन में एक गोल्डन प्रि¨सपल है: जैसा आपका आहार है, वैसा आपका आचार होगा, इस आचरण के मुताबिक आपके विचार होंगे, जैसे विचार होंगे वैसा आपका व्यवहार होगा और जैसा व्यवहार होगा वैसा ही आप आहार पसंद करेंगे। स्टडीज बताती हैं कि लंबी और हेल्दी लाइफ के लिए जिंदगी के साथ पूरा जुड़ाव जरूरी है। जो लोग जिज्ञासु, खुले दिल वाले और लोगों के साथ रिश्ते कायम करने के उत्सुक रहते हैं, वे अपनी जिंदगी मौज के साथ जीते हैं। जिंदगी के हर मोड़ पर मिलने वाली चुनौतियों और विकलांगता के बावजूद ये लोग जितना ज्यादा हो सके, फूलते-फलते हैं, भरपूर आनंद के साथ जिंदगी को लंबे समय तक जीते हैं। बदहवास, उदास या तुनकमिजाज लोग भी अच्छी सेहत के कारण लंबी उम्र पा सकते हैं। लेकिन इनकी जिंदगी में कोई रस नहीं होता। लंबी और सेहतमंद जिंदगी के लिए कोई मैजिक पिल यानी जादुई दवा नहीं है। लेकिन यदि आप अपनी जिंदगी में इज्जत और तारीफ बटोरने में कामयाब होते हैं और उम्र के अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं, दिल्लगी, जोश, लचीले स्वभाव, व्यक्तित्व के आकर्षण को गले लगाते हैं तो बड़े मजे में लंबी उम्र के अंतिम पड़ाव तक पहुंच पाते हैं। दरअसल, औसत जीवनकाल को लेकर ढेर सारे आंकड़े जुटाने और वैज्ञानिकों की ओर से अनुमान जाहिर किए जाने के बावजूद शतायु होने के रहस्य से परदा अभी पूरी तरह हटा नहीं है। लंबी उम्र को लेकर कई सवाल हैं। लेकिन इनके जवाब मिलने तक हम इंतजार नहीं कर सकते। सही समय पर जिंदगी को लेकर सही फैसले हमें जोहरा सहगल, मनोहर आइच, फौजा सिंह या अपने किसी हीरो जैसी शानदार जिंदगी दे सकते हैं। इनपुट: हार्वर्ड मेडिकल स्कूल

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