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वित्तीय प्रबंधन में बिहार देश में दूसरे स्थान परछत्तीसगढ़ देश में सर्वश्रेष्ठ
एजेंसियां - नई दिल्ली
विकसित राज्यों को पीछे छोड़कर बिहार वित्तीय प्रबंधन के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर भी पिछड़े राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ है।
भारतीय रिजर्व बैंक ((आरबीआई)) ने चालू वित्त वर्ष 2013-14 के वित्तीय प्रबंधन के आधार पर यह आंकड़ा जारी किया है। आरबीआई की रिपोर्ट विकास कार्यों पर खर्च, सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च और पूंजीगत खर्च के मानकों पर तैयार की गई है।
दो लाख शिक्षकों के पद खाली
बिहार में शिक्षकों के पद भी बड़ी संख्या में खाली रहने की चिंता बैठक में नजर आएगी। सूबे में दो लाख से ज्यादा स्कूली शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें से एक लाख 66 हजार से ज्यादा पद सर्व शिक्षा अभियान से संबंधित हैं। बिहार में अपर प्राइमरी वर्ष २००६-०७ के मुकाबले प्रगति हुई है।
((प्राइमरी शिक्षकों की उपस्थिति फीसदी में))
राज्य शिक्षक उपस्थिति
२००७ २०१३
बिहार -- ८१.०
मप्र ७०.४ ८४.१
हरियाणा ८६.९ ८६.६
कर्नाटक ८३.९ ८०.४
यूपी ८३ ७८.१
छग ७५.७ ७९.३
राजस्थान ८१.१ ८५.३
राष्ट्रीय औसत ८१.७ ८४.३
अन्य राज्यों से धुंधली तस्वीर
सभी आंकड़े सकल घरेलू उत्पाद ((जीएसडीपी)) के \\\' के रूप में है।
हमारे स्कूलों से गायब रहते हैं ३७\\\' बच्चे और १९\\\' शिक्षक
वित्तीय प्रबंधन में बिहार दूसरे स्थान पर, छत्तीसगढ़ अव्वल
बिहार में वित्त का प्रबंध सुधरा, स्कूल का बिगड़ा
सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च
छत्तीगढ़ पिछले पांच वर्षों से नंबर वन
१४.०\\\'
छत्तीसगढ़
११.३\\\'
बिहार
९.७\\\'
एमपी
९.२\\\'
झारखंड
विकास कार्यों पर खर्च
सभी राज्यों का औसत
20.7\\\'
छत्तीसगढ़
१६.८\\\'
बिहार
१५.७\\\'
एमपी
१४.७\\\'
झारखंड