निवेश के लिए पसंदीदा देश रहेगा भारत
एजेंसी - नई दिल्ली
सस्ते मजदूर, घरेलू बाजार और शिक्षित कार्यबल की बदौलत वैश्विक स्तर पर भारत के वर्ष 2014 में विदेशी निवेश के लिए सुरक्षित और पसंदीदा गंतव्य बने रहने की उम्मीद है। वैश्विक सलाहकार एजेंसी अन्सर्ट एंड यंग ((ईयू)) के सर्वेक्षण में कहा गया है कि मौजूदा निवेशकों का निवेश अभी भी स्थिर है और नये निवेशक इस वर्ष मई में होनेवाले संसदीय चुनाव के बाद टिकाऊ और बेहतर सरकार के गठन से आॢथक सुधार होने की उम्मीद कर रहे हैं ताकि निवेश को बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रौद्योगिकी, मीडिया और दूरसंचार के क्षेत्र निवेशकों के लिए खासा आकर्षण के केंद्र बने रहेंगे। वर्ष 2007 से 2012 के दौरान इन तीनों क्षेत्रों की विभिन्न परियोजनाओं में 21.6 प्रतिशत निवेश हुआ। इसके साथ ही निवेशकों को अगले दो वर्षों में औद्योगिक, खुदरा, लाइफ साइंसेज और उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्रों में निवेश बढऩे की उम्मीद जताई है। सर्वे के अनुसार बड़े पैमाने पर कुशल कार्यबल की आपूॢत, प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच और सरकारी ओर से की जा रही पहल की भारत के निर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है।
चीन से चुनौती
सर्वेक्षण में 70.8 प्रतिशत ने माना कि एफडीआई के मामले में चीन अब भी भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है लेकिन इनमें से 8.8 प्रतिशत का कहना है कि इंडोनेशिया, फिलिपींस और वियतनाम से भी कड़ी चुनौती भारत को मिल रही है।
वैश्विक सलाहकार एजेंसी अन्सर्ट एंड यंग के सर्वेक्षण का तथ्य
:प्रतिनिधि जुटे हैं सम्मेलन के लिए
:देशों के राष्ट्र प्रमुख भाग ले रहे हैं
॥वे भारत लंबे समय से भारत को लेकर बहुत आशावान हैं।
निकेश अरोड़ा, गूगल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष
॥वे भारत को लेकर बहुत ही आशावान हैं भले ही देश बड़ी चुनौतियों से दो-चार हो रहा हो।
थॉमस फ्र ाइडमैन, प्रमुख अर्थशास्त्री
भारत को लेकर सभी आशन्वित
॥भारत अब भी कारोबार के लिए बहुत अच्छा स्थान है और वे भारत को लेकर बहुत सकारात्मक हैं।
जर्मी बेनेट, सीईओ, नोमूरा
एजेंसियां - दावोस
दावोस में चल रही विश्व आर्थिक मंच ((डब्ल्यूईएफ)) की सालाना बैठक में विनिर्माण क्षेत्र पर हुए एक सत्र में कहा कि भारत सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र की भागीदारी 16 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से बढ़ा कर 25 प्रतिशत तक पहुंचाएगा और 10 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। शर्मा यहां डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में हिस्सा लेने यहां पहुंचे हैं और उनका विश्व भर की बड़ी कंपनियों के शीर्ष कार्यकारियों से मुलाकात का कार्यक्रम है, जिसमें वे भारत की अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के बारे में जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा, भारत को विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है ताकि निर्यात बढ़ाया जा सके और निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रीय विनिर्माण नीति ((एनएमपी)) के तौर पर भारत विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि बढ़ाना और अगले दशक तक देश के सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत के बराबर करना चाहता है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट का असर देश के निर्यात पर हुआ है जो घट कर पिछले साल नवंबर में करीब छह प्रतिशत पर पहुंच गया।
भारत देगा विनिर्माण के क्षेत्र में १० करोड़ नई नौकरियां
डब्ल्यूईएफ की बैठक - वाणिज्य मंत्री ने रखा भारतीय अर्थव्यवस्थ का पक्ष