योग्यता से मिलता है असली सम्मान
आजकल किसी की जेब से पैसा निकालना आसान काम नहीं रह गया है, यदि अपराध न किया जाए तो। इसके दो कारण हैं। पहला यह कि धन के मामले में सभी समझदार हो गए हैं। दूसरा, सामने वाला भी इसी चक्कर में है कि उसका हाथ हो और आपकी जेब। ठीक इसी तरह इन दिनों यही बात सम्मान के बारे में लागू होती है। हम किसी से जबरदस्ती सम्मान नहीं हासिल कर सकते। आपका पद और उसकी मजबूरी हो तो बात अलग है वरना दिल से सम्मान प्राप्त करना आसान नहीं है अब। यदि आप मिले हुए सम्मान के योग्य न हों तो यह सम्मान भी ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। अब तो समाज में चर्चा होने लग गई है कि दिल से सम्मान पाने के योग्य लोगों की जात ही खत्म होती जा रही है। एक समय ऐसा भी था कि दूसरों को सम्मान देने के लिए लोगों ने अपना आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी गौण कर दिया था। दूसरों से व्यवहार करते समय हरेक के भीतर एक काल्पनिक व्यक्तित्व होता है, अच्छा या बुरा। सम्मान देने के मामले में वही छवि काम करती है। पहले लोग समाज के अनुशासन के कारण ही एक-दूसरे को सम्मान देने लगे थे। न अब वैसा समाज रहा और न ही उसका अनुशासन। एक अजीब सी स्वेच्छाचारिता, समाज में स्वतंत्रता के नाम पर फैल गई है। आधुनिकता का एक अर्थ उन्मुक्त होना मान लिया गया है। इसलिए निजी तौर पर हम यह प्रयास करें कि अपने आपको योग्य बनाएं कि हमें सम्मान देना दूसरे की प्रसन्नता का कारण बने।
-पं. विजयशंकर मेहता - द्धह्वद्वड्डह्म्द्गद्धड्डठ्ठह्वद्वड्डठ्ठञ्चद्दद्वड्डद्बद्य.ष्शद्व
2द्गड्ढ:द्धड्डद्वड्डह्म्द्गद्धड्डठ्ठह्वद्वड्डठ्ठ.ष्शद्व
जीने की राह