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न भूलें कि बेजुबान पशुओं में भी होते हैं प्राण : मेनका

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - गया
ईश्वर की रचना वन्य जीवों के साथ हम क्रूरता का व्यवहार भी करते हैं तथा संकट की घड़ी में हम ईश्वर से मदद भी मांगते हैं। यह कैसी
प्रार्थना है ?
उक्त बातें देश की प्रतिष्ठित पशु संरक्षक सह पर्यावरणविद् मेनका गांधी ने बोधगया में कही। वे मोनलम ट्रस्ट के द्वारा आयोजित नि:शुल्क पशु चिकित्सा कैम्प में पहुंचीं थीं। उन्होंने कहा, कि हम यह क्यों भूल जाते हैं, कि वन्य जीव में भी हमारे जैसे ही प्राण होते हैं। उन्हें भी हमारी ही तरह कष्ट की अनुभूति होती है। उन्होंने वन्य जीवों की सुरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पशु सुरक्षा का इतिहास बन रहा है। लोग मांसाहार छोड़ शाकाहार की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यह सर्वोत्तम विकल्प है इसे अपनाये। श्रीमती गांधी ने 17वें करमापा दोरजी द्वारा शाकाहार अपनाये जाने की प्रशंसा की। साथ ही बोधगया में पशु चिकित्सा कैम्प को पशु जीवों के प्रति सकारात्मक सोच का परिणाम बताया। इस अवसर पर करमापा उज्ञेन त्रिनले दोरजी, सांसद हरि मांझी, पूर्व मंत्री डा. प्रेम कुमार, विधायक श्यामदेव उपस्थित थे।