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सिर्फ छापेमारी से नहीं रुकेगा भ्रष्टाचार
ञ्चअरविंद कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकपाल के लिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन किया था। लेकिन आज तक मजबूत लोकपाल का गठन नहीं किया गया। कुछ प्रदेशों में यह संस्था कमजोर है, वहीं कर्नाटक एवं मध्यप्रदेश में यह अपेक्षाकृत मजबूत है। दोनों प्रदेशों में लोकायुक्त को पुलिस का भी अधिकार मिला हुआ है। यह संस्था खुद छापेमारी कर सकती है। मजबूत लोकायुक्त के लिए जरूरी है कि इसे बहुसदस्यीय बनाया जाए। इसमें वरिष्ठ न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए और पूरा अधिकार दिया जाए। अच्छा होगा यह तीन सदस्यों का हो। अब तक किसी भी प्रांत में तीन सदस्यीय लोकायुक्त नहीं है।
लोकायुक्त के पास अपना पुलिस दस्ता होना चाहिए, जिसमें एसपी रैंक के अधिकारी हों। एसपी के नेतृत्व में टीम को छापेमारी करने के साथ ही इन्वेस्टिगेशन का भी अधिकार मिलना चाहिए। वह कोई शिकायत मिलने पर खुद ही जांच करे। संस्था के किसी भी कर्मी का तबादला बिना लोकपाल की मर्जी के नहीं होना चाहिए। जो पहले से विजिलेंस कोर्ट काम कर रहे हैं, वे करते रहें, पर लोकायुक्त के मामले में प्रोसक्यूशन के लिए विशेष न्यायालय गठित किया जाना चाहिए।
सरकारी वकीलों की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए। सरकारी कर्मियों का तबादला नियमों के तहत हो। इससे कर्मी अनावश्यक दबाव से मुक्त होकर काम कर सकेंगे। कई बार तबादलों के पीछे राज्यहित के बजाए निहित स्वार्थ होते हैं। राज्यहित में तबादलों के लिए जो नियम बनाए जाएं, उसमें कर्मी की विशिष्टता को आधार बनाया जाना चाहिए। हर विभाग के कर्मी का रिपोर्ट कार्ड बनना चाहिए।
मान लीजिए कोई दारोगा है, तो उसने अब तक किस तरह मुकदमों को सुलझाया है, इन्वेस्टिगेशन में रेकॉर्ड कैसा रहा है , पब्लिक के साथ कैसा संबंध रहा है , इन सब बातों को ध्यान में रख कर किसी दारोगा का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो और उसकी दक्षता को ध्यान में रख कर ही उसका तबादला हो। इस तरह कोई दारोगा
श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने उप्र के अवकासप्राप्त डीजीपी प्रकाश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टेट सेक्यूरिटी कमीशन गठित करने का आदेश दिया था। यह कमीशन बड़े पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई करता, पर बिहार में आज तक राज्य सरकार ने इस कमीशन का गठन ही नहीं किया।
ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि कोई साधारण व्यक्ति भी कोई शिकायत करे, तो उस पर कार्रवाई हो। यहां हाल यह है कि कोई शिकायत करने पर वर्षों तक कोई पूछने नहीं आता। गवाहों की भी सुरक्षा होनी चाहिए। आम लोग भ्रष्टाचार से परेशान हैं, इसलिए इसके विरुद्ध छिटपुट कार्रवाई के बदले व्यवस्था को ही भीतर से दुरुस्त करना होगा, ताकि भ्रष्टाचार के पनपने की संभावना कम-से-कम हो जाए। इसमें पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व समाहित करना चाहिए। जो अच्छा करे, उसे रिवार्ड मिले और जो नियमों का उल्लंघन करे, जन शिकायतों की उपेक्षा करे, उसे सजा मिले।
लेखक पटना हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं।
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राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालयों में छापेमारी शुरू की है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करना होगा। व्यवस्था को पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाना होगा।