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पथरीबल मुठभेड़ की जांच बंद, उमर निराश

8 वर्ष पहले
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एजेंसी - जम्मू
सेना ने जम्मू-कश्मीर के पथरीबल में हुए एनकाउंटर का मामला बंद कर दिया है। उसकी ओर से कहा गया है कि सेना के जवानों के खिलाफ इस मामले में कोई सबूत नहीं मिले हैं। इस संबंध में श्रीनगर की ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में सेना की ओर से क्लोजर रिपोर्ट सौंपी गई है।
साल 2000 में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान पथरीबल एनकाउंटर हुआ था। इसमें पांच नागरिक मारे गए थे। सेना का दावा है कि ये सभी विदेशी आतंकी थे। और 21 मार्च 2000 को चित्तीसिंहपुरा में सिख समुदाय पर हुए आतंकी हमले में शामिल थे। इस आतंकी हमले में 35 सिखों की मौत हुई थी।
राज्य सरकार और कई स्थानीय संगठनों का मानना था कि पथरीबल में मारे गए लोग सामान्य नागरिक थे। इस विवाद के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। उसने 2006 में रिपोर्ट दी। इसमें एजेंसी ने सेना के पांच अफसरों को फर्जी एनकाउंटर का दोषी माना था। ये अफसर हैं-ब्रिगेडियर अजय सक्सेना, ले. कर्नल ब्रहेंद्र प्रताप सिंह, मेजर सौरभ शर्मा, मेजर अमित सक्सेना और सूबेदार इदरीस खान।



अब्दुल्ला नाराज पीएम से बात करेंगे

पथरीबल एनकाउंटर मामला बंद किए जाने के सेना के फैसले से जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नाराज हैं। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है। सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में सेना के पांच अफसरों को फर्जी एनकाउंटर का दोषी माना। जबकि सेना को इन अफसरों के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं मिले। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सामने उठाएंगे।

2000 में हुआ था एनकाउंटर, पांच लोग मारे गए थे, सीबीआई ने पांच को दोषी माना था