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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- भुल्लर मामला देखभाल में लापरवाही का

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली - उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब के आतंकवादी देवेंदर पाल सिंह भुल्लर का मामला उच्चतम न्यायालय के हाल के मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की दया याचिका पर विचार में अधिक विलंब के फैसले के मद्देनजर देखभाल में लापरवाही का बन गया है। भुल्लर अपनी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश पी.सदाशिवम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भुल्लर की एकक्यूरेटिव याचिका की सुनवाई के दौरान यह संकेत दिया कि उस पर जल्दी सुनवाई होगी। भुल्लर को १९९३ के दिल्ली बम विस्फोट कांड में मौत की सजा सुनाई गई है।


जिसमें नौ सुरक्षाकर्मी मारे गए थे और युवा कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मङ्क्षनदरजीत सिंह बिट्टा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। भुल्लर ने रिमोट कंट्रोल से यह विस्फोट कराया था। उच्चतम न्यायालय ने अब निर्देश दिया है कि किसी भी मौत की सजा प्राप्त व्यक्ति को अकेले कमरे में नहीं रखा जाए और उसके परिवार के सदस्यों को उसकी दया याचिका पर निर्णय की जानकारी दी जाए और उसे फांसी देनेसे पहले उसके परिवार वालों को मिलने दिया जाए।