किसने किए 1400 करोड़ बर्बाद?
डीबी स्टार :पटना ९९३४३१७८७८
जनता की गाढ़ी कमाई के 1400 करोड़ रुपए से बना पाटलिपुत्रा स्टेशन उद्घाटन के इंतजार में बर्बाद हो रहा है। इस भव्य स्टेशन पर अब लोग बेरोकटोक मोटरसाइकिलें दौड़ा रहे हैं तो यात्रियों के लिए लगे शेड में शादियां और छोटे-मोटे पारिवारिक कार्यक्रम हो रहे हैं। ढाई महीने पहले जिस फ्लाईओवर की मांग में उद्घाटन टला उसके लिए न तो रेलवे कोई ठोस प्रयास कर रही है और न ही राज्य सरकार। डीआरएम अपने स्तर पर विभाग में चिठ्ठी-पत्री कर रहे हैं तो राज्य सरकार में कोई सुगबुगाहट ही नहीं है।
गंभीर बात यह है कि करोड़ों से बने इस स्टेशन पर बिजली और सुरक्षा के नाम पर अब भी लाखों रुपए बर्बाद हो रहे हैं और इसका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
डर है रेल शुरू हो गई तो नहीं बनेगा पुल लगाना पड़ेगा डेढ़ किमी का चक्कर
स्टेशन का शुभारंभ 31 अक्टूबर को लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को करना था। 30 की रात स्थानीय लोगों के विरोध की खबर मिलने के बाद नीतीश कुमार ने रेल मंत्रालय को उद्घाटन कार्यक्रम में नहीं पहुंचने की बात कही। इससे पहले जलालपुर और रुपसपुर के लोगों ने आवागमन की समस्या से अफसरों को अवगत कराया था। समस्या से प्रभावित लगभग दो लाख की आबादी समपार पथ बनाने की मांग कर रही है।
तैयार स्टेशन का 31 अक्टूबर को हो रहा था उद्घाटन, अब तक पड़ा है बेकार
रेसिंग ट्रैक
पटरियों पर जीवन
शेड में मंडप
कमजोर प्लानिंग
रास्ते की समस्या की जानकारी रेल मंत्रालय और राज्य सरकार को पहले ही थी। लेकिन, किसी ने इसपर ध्यान नहीं दिया।
लोग पहले से ही विरोध में डटे थे इसके बाद भी उद्घाटन कार्यक्रम बना लिया। अंत में बुराई कौन मोल ले सोचकर सभी मैदान से हट गए। इसकी वजह से ट्रेन शिड्यूल में शामिल हो चुकी पाटलिपुत्र स्टशेन की दो ट्रेनें दानापुर से चलाई जा रही हैं।
20 हजार यात्री उठाते फायदा
रेलवे स्टेशन के शुरू होने से करीब 20 हजार यात्रियों को फायदा होता। अभी लोगों को करीब दस किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर लगाकर पटना जंक्शन पहुंचना पड़ता है। इसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। इससे पटना जंक्शन पर भी यात्री दबाव कम होने से व्यवस्थाए ठीक हाने की उम्मीद की जा रही थी।
1400 करोड़ हुए खर्च
पाटलिपुत्रा रेलवे स्टेशन के निर्माण में 1400 करोड़ रुपए का खर्च किए गए। एक अनुमान के मुताबिक रेल परिचालन नहीं होने से रेलवे को रोजाना लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। स्टेशन की सुरक्षा में आरपीएफ के अधिकारियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा रेलवे के भी चार अधिकारी स्टेशन पर तैनात है। स्टेशन पर लगाए गए उपकरण खराब हो रहे हैं। स्टेशन के पास पहुंचने तक करीब डेढ़ किलोमीटर तक रेलवे ट्रैक पर स्थानीय लोगों का कब्जा है। नहाना, धोना, खाना , पीना सब पटरियों पर हो रहा है। स्टेशन के बाथरूम को आवारा कुत्तों ने अपना अड्डा बना लिया है। इन अव्यवस्थाओ को देखकर आम आदमी मन मसोस कर रह जाता है।
रेलवे आगे आए मिलेगी मदद
॥समस्या का समाधान रेलवे को करना है, लेकिन रेलवे के अधिकारी राज्य सरकार से कोई मदद चाहते हैं तो आगे आएं। राज्य सरकार उनकी मदद करेगी। वो समस्या से अवगत हैं। हम भी चाहते हैं कि इसका निदान हो, ताकि यात्रियों को फायदा पहुंचे।
आमिर सुबहानी, गृह सचिव, बिहार
हमारी जमीन खरीद ले
॥यह छोटी समस्या नहीं है। रेलवे के छोटे अधिकारी डेढ़ एकड़ जमीन राज्य सरकार को नहीं दे सकते। राज्य सरकार को चाहिए कि वो रेलवे से यह जमीन खरीद ले। ताकि समस्या दूर हो सके और ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सके।
एलएम झा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, निर्माण
फोटो : नेशात खान
प्लेटफॉर्म सुनसान है इसलिए कई लोगों ने अपने घर का शॉर्ट कट रास्ता भी यहीं से ढूंढ निकाला है।
इन पटरियों पर रेल नहीं आती, घुमंतु लोगों ने पड़ाव डाल दिया। खाना पीना यहीं होता है।
स्टेशन यात्रियों के काम नहीं आ रहा ऐसे में लोगों ने इसका फायदा उठाया और शादी का मंडप सजा लिया।
भव्य पाटलिपुत्रा स्टेशन की नई इमारत उद्घाटन के इंतजार में अपनी चमक खो रही है। यह सूना परिसर पटना जंक्शन के दबाव को काफी हद तक कम सकता है, लेकिन फिलहाल तो इसे ही यात्रियों का इंतजार है।
रेलवे और राज्य आमने-सामने
पाटलिपुत्रा स्टेशन पर हुए विवाद के सिलसिले में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि हम शांतिपूर्ण प्रर्दशन कर रहे लोगों पर लाठी नहीं चलवा सकते। रेलवे को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उधर रेलवे रोज हो रहे नुकसान पर ध्यान देने की बजाए इस बात में लगा है कि राज्य सरकार उसकी जमीन खरीद ले और पुल बनावा दे।
अजब रेलवे स्टेशन की गज़ब कहानी