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साहब की बातें आसमानी, यहां घरों में नाले का पानी
भास्कर न्यूज - पटना सिटी
‘आलीशान घरों में रहने वाले नगर निगम के अधिकारियों को यहां आकर रहना चाहिए। तब उन्हें पता चलेगा कि यहां लोग किस हालत में जिंदगी बसर कर रहे हैं।’
मंगल तालाब के पास लोदी कटरा मोहल्ले के चंद्रप्रकाश तारा का चेहरा बोलते-बोलते तन जाता है। उनका गुस्सा नगर निगम से इसलिए है कि करीब छह महीने से मंगल तालाब के चारों ओर बसी करीब 30 हजार की आबादी गंदे नाले की सड़ांध व कीचड़ झेलने पर मजबूर है। 18 जनवरी को प्रशासन से
लेकर निगम के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया है। लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं। नतीजा यह कि घरों में भी नाले का पानी घुसता है।
॥नाला के पानी के जमाव के कारण सड़ांध से परेशान हैं। डीएम, निगम आयुक्त, सिटी एसडीओ, नगर निगम सिटी अंचल के ईओ, इंजीनियरिंग शाखा आदि को 18 जनवरी को फिर से ज्ञापन सौंपा है। कच्चा नाला का प्राक्कलन बनाकर देने व उसका निर्माण कराने का आश्वासन निगमायुक्त ने दिया है। देखते हैं कब तक हो पाता है।\\\"\\\"
मुरारी राय, मच्छरहट्टा
मंगल तालाब के उत्तरी और पश्चिमी भाग में बने नाले की चौड़ाई छह फीट है। फिर भी ओवरफ्लो होता है। यह नाला आगे जाकर खानकाहे एमादिया के पास दो फीट हो गया है। 2012 में ईद के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां आकर देखा कि धार्मिक स्थल के अंदर भी नाले का पानी घुसा है। उन्होंने आनन-फानन में नाले के विस्तार का आदेश दे दिया। आसपास साफ-सफाई का भी निर्देश दिया गया। वहां से नए नाले का निर्माण हुआ। लेकिन नाला दो फीट का ही बन पाया। इससे समस्या खत्म होने के बजाए बढ़ गई। यह नाला आगे तालाब के दक्षिणी गेट से होते हुए सिटी स्कूल में जाकर मिला, तो वहां भी दो फीट चौड़ी ही रह गया।
समस्याग्रस्त तीन प्रमुख गलियां
नाला जाम रहने से मुख्य रूप से वार्ड 65 और 66 के मच्छरहट्टा गली, घघा गली व कठौतिया गली, आसपास का स्लम एरिया के लोगों के घरों में भी पानी घुसता है। अशोक राजपथ और सुदर्शन पथ को जोडऩे और मंगल तालाब आने के लिए यह मुख्य रास्ता है। इस रास्ते पर हमेशा पानी व कीचड़ जमा रहता है।
2012 में मुख्यमंत्री ने नाले के विस्तार के साथ-साथ साफ-सफाई का भी दिया था निर्देश
॥अप्रैल-मई, 13 में नाला की उड़ाही हुई थी। इसके बाद से अबतक सफाई नहीं होने से यह बुरा दिन देखना पड़ रहा है। जनता आंदोलन करेगी, तब निगम के अधिकारी-पदाधिकारी की तंद्रा टूटेगी।\\\"\\\"
गोपाल श्रीवास्तव, मच्छरहट्टा गली
मच्छरहट्टा, घघा गली, कठौतिया गली और आसपास के 30 हजार लोग हर रोज झेलते हैं सड़ांध और कीचड़