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शहीदों की निशानियों से इतनी बेरुखी क्यों ?
भास्कर न्यूज - पटना सिटी
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...।
पाटलीपुत्र की धरती ((जहां आजादी की लड़ाई के इतिहास के कई महत्वपूर्ण पन्ने पर लिखे गए थे)) पर आजादी के दीवानों के धूल खाते स्मारक और प्रतिमाएं इन पंक्तियों पर सवालिया निशान लगाती हैं।
शहीद स्थल पर गैराज
मेहंदीगंज गुमटी के पास अमर शहीद पीर अली, छेदी गवाला, घसीटा मिस्त्री, रघुनंदन कहार व अन्य शहीदों की स्मृति में स्मारक बने हैं। इन शहीदों को अंग्रेजों ने फंसियारी मथनी पर फांसी दी थी। यहां शहीद स्मारक पर गैराज खुल गया है। स्मारक के पास अवैध कब्जा है।
बापू की प्रतिमा बदरंग
मंगल तालाब मैदान में बापू ने एक सभा आयोजित की थी। मैदान से सटे पार्क में बापू की प्रतिमा धूल व गंदगी से बदरंग हो चुकी है। मंगल तालाब मोड़ पर बनी बापू की प्रतिमा पिंजरे में कैद है। गुरहट्टा मोड़, खाजेकलां मोड़ पर प्रतिमा पर वर्षों से रंग-रोगन नहीं हुआ है।
अम्बेदकर प्रतिमा के पास सब्जी बाजार
गायघाट आंबेडकर मोड़ पर अंबेडकर की प्रतिमा के चारों ओर सब्जी बाजार बना है। प्रतिमा के पास ही अवैध पार्किंग लोग करते हैं। यहां से सब्जी बाजार हटाने की मांग को लेकर पिछले माह सामाजिक संगठन के लोगों ने जागरूकता अभियान चलाया था। इसके बाद भी सब्जी बाजार नहीं हटा। नवयुवक समाज समिति ने इस मसले को लेकर आंदोलन की बात कही है।
सवालिया निशान
शहीदों के दर्जनों स्मारकों पर कहीं जमे हैं अतिक्रमणकारी तो कहीं खड़ी हैं टूटी-फूटी प्रतिमाएं