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वॉशरूम में खाली पैर जाने से होता है कृमि
भास्कर न्यूज - पटना
बच्चों को कुपोषण और एनिमिया से बचाने के लिए कृमि की दवा दी जाती है। लक्षण मिलने पर उनको दवा पिलाई जाती है। वैसे स्टूल जांच से पक्की जानकारी मिल जाती है कि बच्चे को कौन सा कृमि परेशान कर रहा है। कृमि यदि आंत ((राउंड वर्म)) में अधिक जमा हो जाए तो उसे आपरेशन करके निकालना पड़ता है। इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के उपनिदेशक और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीरेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि सभी प्रकार के कृमि से बचाने के लिए बच्चों को ‘एलबेंडाजोल’ नामक दवा दी जाती है। वैसे इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। थोड़ा चक्कर आने की शिकायत बच्चे कर सकते हैं, पर ऐसा अमूमन कुछ में ही हो सकता है। पीएमसीएच के वायरोलॉजिस्ट डॉ. विजय कुमार के मुताबिक वॉशरूम में खाली पैर नहीं जाना चाहिए।
इनसे अधिक परेशानी
राउंड वर्म, हुक वर्म, पिन वर्म और न्यूरोसिस्टिक सरकोसीस
क्या होती है परेशानी
बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, चिड़चिड़ापन, पेट दर्द, भूख का नहीं लगना, सुस्त हो जाना, गतिविधियां कम हो जाना. आंत में रुकावट, ब्रेन में चले जाने पर बेहोशी, कंपन, हाथ-पैर थरथराना आदि।
क्या है बचाव
कृमि का संक्रमण गंदगी से होता है। हाथ धोकर खाने की आदत लगाएं। बच्चे खेलकर आते हैं, खाना शुरू कर देते हैं। ऐसा नहीं करने दें। गांव में रहने वाले बच्चे अममून खाली पैर घूमते रहते हैं। सब्जी बढिय़ा से धोकर बनाना चाहिए। फल खाएं तो उसे बढिय़ा से धोकर दें।