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एनआईटी पटना का मनीष दुनिया के टॉप 10 इंजीनियर्स मेंअमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स ने जारी की सिविल इंजीनियर्स की सूची, दस चेहरों में भारत से मनीष इकलौते
डीबी स्टार। पटना
पटना एनआईटी का मनीष आनंद सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दुनिया के 10 नए चेहरों में शामिल हो गया है। छठे सेमेस्टर का छात्र मनीष अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स की ओर से जारी की गई एक लिस्ट में पहला भारतीय है। संस्था की ओर से यह लिस्ट पटना एनआईटी कॉलेज एडिशन कैटेगरी में जारी की गई है। इसमें शामिल होने के लिए सोसायटी की ओर से दुनिया भर से छात्रों के आवेदन मांगे गए थे। भारत समेत दुनिया भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों ने हिस्सा लिया था। मनीष की इस उपलब्धि की सूचना एनआईटी पटना की वेबसाइट पर भी है। वेबसाइट पर लिखा है कि अमेरिकी संस्था का यह कार्यक्रम दुनिया भर में युवा सिविल इंजीनियरों को बढ़ावा देने के लिए होता है। एनआइटी पटना के निदेशक प्रो. अशोक डे और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव सिन्हा ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
इस तरह होता है चयन
कॉलेज एडिशन में चयन के कई पैरामीटर होते हैं, जिसमें अकादमिक उपलब्धियां, एक्सट्रा करिकुलम एक्टीविटी, स्वयं सेवक के तौर पर समाज में सिविल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल और ट्रेनिंग एंड इंटर्नशिप शामिल है। इन उपलब्धियों की सूचना संस्था को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए भेजी जाती है। इसके बाद संस्था अपने सभी पारामीटर के आधार पर चयन करती है।
पिता के देहांत के बाद स्कॉलरशिप से की पढ़ाई
छठे सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे मनीष आनंद ने इंजीनियरिंग पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं। 2010 में पिता का देहांत हो गया। परिवार में एक बड़ा भाई जो खुद अभी एनआइटी के सिविल इंजीनियरिंग में ही फाइनल ईयर का छात्र है और अकेली मां। आय का कोई दूसरा साधन नहीं, परिवार आर्थिक संकटों के दौर से गुजरने लगा, लेकिन होनहार भाइयों ने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए कमर कस ली थी, मनीष को उसकी प्रतिभा के कारण अमेरिकी संस्था नार्थ साउथ फाउंडेशन की ओर से सालाना 12 हजार रुपए छात्रवृति मिलती है। वहीं इस वर्ष उसे महावीर प्रसाद सिंह फाउंडेशन दिल्ली की ओर से भी 36 हजार रुपए छात्रवृति मिली है। मनीष कहता है कि भाई एक साल सीनियर रहा, इसका फायदा मिला उसकी किताबे पढ़ता गया और नई किताबे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।
शोध में बनाना चाहता है करियर
मनीष आनंद अब आगे सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ही शोध कर वैज्ञानिक बनना चाहता है। उनका मानना है कि शोध कर देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। मनीष ने पिछले ही वर्ष पटना के सालाना टेक्निकल समारोह कोरोना-13 में रियल एस्टेट इवेंट में अधिक सुरक्षित और कम लागत वाला भवन का मॉडल बनाकर प्रथम पुरस्कार जीता है।
एनआईटी का मनीष दुनिया के टॉप 10 इंजीनियर्स में
इस तरह होता है चयन
कॉलेज एडिशन में चयन के कई पैरामीटर होते हैं, जिसमें अकादमिक उपलब्धियां, एक्सट्रा करिकुलम एक्टीविटी, स्वयं सेवक के तौर पर समाज में सिविल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल और ट्रेनिंग एंड इंटर्नशिप शामिल है। इन उपलब्धियों की सूचना संस्था को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए भेजी जाती है। इसके बाद संस्था अपने सभी पारामीटर के आधार पर चयन करती है।
डीबी स्टार :पटना
पटना एनआईटी का मनीष आनंद सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दुनिया के 10 नए चेहरों में शामिल हो गया है। छठे सेमेस्टर का छात्र मनीष अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स की ओर से जारी की गई एक लिस्ट में पहला भारतीय है। संस्था की ओर से यह लिस्ट पटना एनआईटी कॉलेज एडिशन कैटेगरी में जारी की गई है। इसमें शामिल होने के लिए सोसायटी की ओर से दुनिया भर से छात्रों के आवेदन मांगे गए थे।
भारत समेत दुनिया भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों ने हिस्सा लिया था। मनीष की इस उपलब्धि की सूचना एनआईटी पटना की वेबसाइट पर भी है। वेबसाइट पर लिखा है कि अमेरिकी संस्था का यह कार्यक्रम दुनिया भर में युवा सिविल इंजीनियरों को बढ़ावा देने के लिए होता है। एनआइटी पटना के निदेशक प्रो. अशोक डे और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव सिन्हा ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
पिता के देहांत के बाद स्कॉलरशिप से पढ़ाई
छठे सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे मनीष आनंद ने इंजीनियरिंग पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं। 2010 में पिता का देहांत हो गया। परिवार में एक बड़ा भाई जो खुद अभी एनआइटी के सिविल इंजीनियरिंग में ही फाइनल ईयर का छात्र है और अकेली मां। आय का कोई दूसरा साधन नहीं, परिवार आर्थिक संकटों के दौर से गुजरने लगा, लेकिन होनहार भाइयों ने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए कमर कस ली थी, मनीष को उसकी प्रतिभा के कारण अमेरिकी संस्था नार्थ साउथ फाउंडेशन की ओर से सालाना 12 हजार रुपए छात्रवृति मिलती है। वहीं इस वर्ष उसे महावीर प्रसाद सिंह फाउंडेशन दिल्ली की ओर से भी 36 हजार रुपए छात्रवृति मिली है। मनीष कहता है कि भाई एक साल सीनियर रहा, इसका फायदा मिला उसकी किताबे पढ़ता गया और नई किताबे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।
शोध में बनाना चाहता है करियर
मनीष आनंद अब आगे सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ही शोध कर वैज्ञानिक बनना चाहता है। उनका मानना है कि शोध कर देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। मनीष ने पिछले ही वर्ष पटना के सालाना टेक्निकल समारोह कोरोना-13 में रियल एस्टेट इवेंट में अधिक सुरक्षित और कम लागत वाला भवन का मॉडल बनाकर प्रथम पुरस्कार जीता है।
अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स ने जारी की सिविल इंजीनियर्स की सूची