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बेखौफ हैं नौकरियों के सौदागर

8 वर्ष पहले
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अनुपम कुमार > पटना ९३३४९४०२५६

पटना की सड़कों पर खुले आम दुकान सजाकर बेरोजगारों को ठगा जा रहा है। सड़क किनारे बिक रहे कई फॉर्म की भाषा शैली इतनी चालाकी से लिखी गई है कि पहली नजर में इन्हें कोई सरकारी नौकरी समझ ले। इनमें जिन संस्थानों का पता दिया है वे भी फर्जी है। डीबी स्टार ने इनमें से तीन फॉर्म लेकर मौके पर संस्थानों की हकीकत जानी तो वहां कुछ नहीं मिला। जबकि फॉर्म में इन संस्थानों ने जो परीक्षा फीस मांगी है उसके लिए बैंक अकाउंट तक दिया है।

इसके सहारे आसानी से ठगी करने वाले तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन कार्रवाई कौन करे यही तय नहीं है। डीबी स्टार ने रोजगार कार्यालय से पूछा तो जवाब मिला हम तो हमारे यहां आई वैकेंसी के बारे में बताते है, अन्य के बारे में पता नहीं। इधर, जब पुलिस से बात की गई तो उसका कहना था कि कोई रिपोर्ट दे तभी हम कुछ कर सकते है।

फर्जी नियुक्ति पत्र और फार्म

वेबसाइट झांसे का पुलिंदा

वेबसाइट पर क्राइम कंट्रोल कमीशन, यानी अपराध नियंत्रण आयोग की विस्तार से जानकारी सामने आती है। इसपर ज्यूडिशियल स्टांप के साथ सोसायटी रजिस्ट्रेशन का पत्र है, जिसके अनुसार इस आयोग का गठन तीन साल पहले किया गया। बेवसाइट पर एंटी करप्शन फलाइंग स्क्वायड, क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो आदि का जिक्र है।

स्थान. आरा गार्डन

ब्राडकास्टिंग न्यूज अफेयर्स खुद को एक स्थापित न्यूज एजेंसी बताती है। उसने अपने हेडक्वार्टर का पता घांसी बाजार हैदराबाद दिया है। डीबी स्टार की जांच में पता चला कि इस फर्जी कंपनी ने बिहार के छोटे शहरों में न्यूज एजेंसी से जुडऩे का विज्ञापन दिया था। इस झांसे में आने वाले आरा गार्डन स्थित कंपनी के दफ्तर पहुंचते हैं। कंपनी जुडऩे के बाद उन्हें छह हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी देने का भरोसा दिलाती है और एक स्पाई कैमरा थमा देती है। सभी से स्टिंग तैयार करने को कहा जाता है। स्टिंग को नेताओं-अफसरों पर केंद्रित रखने का निर्देश होता है। स्टिंग में कोई वीडियो बनता है और कंपनी के पास पहुंचता है तो उसका क्या होता है, यह पूछे जाने पर बड़े-बड़े अखबारों व क्षेत्रीय चैनलों का नाम गिनाने से भी परहेज नहीं किया जाता। कंपनी के नंबरों में एक बंद है जबकि दूसरा हैदराबाद के कमल अग्रवाल का था। कमल ने बताया कि उनका नंबर किसी ने परेशान करने को दिया है।

दो हजार लेकर आईकार्ड सौंप रहा है बीएनए ग्रुप

आयोग के नाम पर सोसाइटी, धंधा स्टिंग के बहाने ठगी

डीबी स्टार > पटना

दो हजार का स्पाई कैमरा लीजिए, दो घंटे की ट्रेनिंग, पाइए आईकार्ड और कमाएं छह हजार रुपए प्रतिमाह। ऐसा ही सपना दिखाकर राजधानी में बीएनए नाम की कंपनी बेरोजगारों को अपना शिकार बना रही है। फर्जीवाड़े के शिकार गौरीचक निवासी सूरज प्रसाद की शिकायत पर डीबी स्टार ने कंपनी की सच्चाई जानने की कोशिश की। पड़ताल में पता चला कि यह कंपनी बेरोजगारों से धोखाधड़ी कर पैसे ऐंठने में लगी हुई है। हैदराबाद के दास कमल अग्रवाल नाम का शख्स इस कंपनी का मुखिया है। पटना में चंदन कुमार का नाम स्टेट हेड के रूप में सामने आया।

हरेक से 10 हजार वसूला

फर्जी तरीके से नियुक्ति पत्र बांट रहे ठग गिरोह का शिकार बने डिहरी के नासरीगंज निवासी राम कुमार ने बताया कि उसे इस गिरोह ने 10 हजार की चपत लगाई। राम कुमार ने बताया कि पत्र में दिए मोबाइल पर संपर्क करने के बाद उसे लेने एक व्यक्ति पहुंचा। वहाँ पहले से कुछ अभ्यर्थी मौजूद थे। सभी से प्रशिक्षण के नाम पर 9,750 रुपए वसूल लिए। सभी को फरवरी में बुलाया गया।

पुलिस को दी जानकारी पर कार्रवाई नहीं हुई

23 जनवरी को बिहटा राघोपुर के पते पर एक बजे ज्वाइन करने के लिए पहुंचे प्रमोद को जब पता चला कि यहां ऐसा कोई बहाली केंद्र नहीं है तो वह चौकन्ना हो गया। प्रमोद ने बिहटा पुलिस को भी जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

संतोष कुमार : बिहटा

९९५५५४६५६५

भारतीय कृषि एवं सिंचाई विभाग की फर्जी बहाली बिहटा में

बेरोजगारों की बड़ी तादाद देखकर शातिर ठगों का गिरोह पटना में सक्रिय है। कोई सरकारी नौकरी के नाम पर धोखा दे रहा तो कोई प्राइवेट। डीबी स्टार टीम ने बिहटा में धोखेबाजों तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन सिर्फ मोबाइल नंबर ही हाथ लगा। पटना में स्टिंग कराने वाली एक एजेंसी की पड़ताल में यह सामने आया कि उसने आयोग के नाम पर सोसायटी का गठन कर रखा है। इसी तरह एक प्राइवेट कंपनी ने इंटर पास को शिक्षा सलाहकार बनाने की फर्जी घोषणा कर पैसे ठगे।

भारतीय कृषि एवं सिंचाई विभाग...ऐसा कोई विभाग नहीं लेकिन इसी विभाग के नाम पर बिहारझारखंड और उार प्रदेश के बहुत सारे बेरोजगारों को एक गिरोह ने शिकार बनाया। फर्जी फॉर्म मार्केट में उतारा गया और जिसने भी भरा, उसे सीधे नियुक्ति पत्र भेजकर ट्रेनिंग के नाम पर 10 हजार रुपए तक वसूल लिए गए। वसूलने वाले शख्स की एकमात्र पहचान उसका मोबाइल नंबर 7543035185 है।

बेरोजगारों ने फॉर्म भरा और मुजफ्फरपुर के पुलाड नामक जगह पर उसे सचिव आईआईडी के नाम से भेज दिया। सामने आए आवेदकों से मिली जानकारी से यह साबित होता है कि फॉर्म बिहार, झारखंड के

साथ यूपी में भी बिका था। जौनपुर जिले के धर्मपुर गाँव निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि वहां मिले फॉर्म में 3895 पदों के लिए बहाली की बात अंकित थी। बिना परीक्षा के ही सीधे नियुक्ति पत्र आया और इसमें आईआईडी मुख्यालय कोलकाता दिखाते हुए बिहटा के राघोपुर में ज्वाइनिंग से पहले की ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया।



यह पुलिस का केस है

॥ फर्जी फार्म निकालकर लोगों से पैसे ऐंठना अपराध है जो पुलिस केस है। हम सिर्फ प्रमंडल स्तर वाले फार्म की जानकारी दे सकते हैं। प्रियंका कुमारी, नियोजन अधिकारी, पटना



एकमे नाम की परीक्षा में सेंटर कॉर्डिनेटर से लेकर शिक्षा सलाहकार तक की नियुक्ति की जानी है और योग्यता है इंटर पास। संस्थान के पते पर जाकर देखा तो वहां एक बोर्ड तक टंगा नहीं मिला।

फुटपाथ पर खुलेआम बिक रहीं नकली नौकरियां