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डायरेक्टर की चेतावनी के बाद भी अवैध खुदाई

8 वर्ष पहले
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बिलासपुर। पर्यावरण विभाग की मंजूरी के बाद जिले में रेत खुदाई तो शुरू हो गई लेकिन शर्तों का खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है। माइनिंग डायरेक्टर की चेतावनी, कलेक्टर की बैठक और जिला खनिज अधिकारी की हिदायत के बाद भी रेत खुदाई में पहले की तरह मनमानी जारी रही। पंचायत,खनिज विभाग और ट्रक मालिकों की मिलीभगत से नियम तार-तार हो रहे हैं। पर्यावरण के जिस नुकसान को लेकर ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण अनुमति को रेत की खुदाई के अनिवार्य किया था, उस नुकसान पर रोक नहीं लगी है।

रेत की मनमानी खुदाई से पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेत खुदाई के लिए पर्यावरण अनुमति को अनिवार्य बताते हुए बगैर पर्यावरण मंजूरी के रेत खदानों में खुदाई पर रोक लगाई थी। उसका मानना था कि रेत की मनमानी खुदाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरण मंजूरी की अनिवार्यता से रेत की खुदाई पर ब्रेक लग गया और इसके साथ ही पूरे जिले में रेत के लिए मारामारी शुरू हो गई। ढाई-तीन माह तक रेत की कमी से 150 करोड़ की लागत के शासकीय निर्माण कार्यों के अलावा आम आदमी के मकान बनाने का सपना भी अधूरा रह गया।

चोरी-छिपे रेत की खुदाई होती रही और रेत की कालाबाजारी से इसकी कीमत चार गुना तक बढ़ गई। सात से आठ सौ रुपए में मिलने वाला एक ट्रैक्टर रेत डेढ़ से दो हजार रुपए में बिकने लगा। भारी जद्दोजहद, आरोप-प्रत्यारोप, खनिज विभाग और खनिज परिवहन संघ के बीच खींचतान और रेत की मारामारी के बीच अंतत: जिले की सात रेत खदानों को पर्यावरण विभाग ने सशर्त मंजूरी दी। कलेक्टर ने भी ग्राम पंचायतों को पीट पास जारी करते हुए पर्यावरण विभाग की शर्तों को ध्यान में रखकर खुदाई करने की हिदायत दी।

लेकिन खुदाई पर लगी रोक हटते ही एक बार फिर मनमानी शुरू हो गई। माइनिंग डायरेक्टर एनके खाखा ने संभागीय बैठक में भी रेत की अवैध खुदाई को लेकर चेतावनी दी थी बावजूद इसके मनमानी जारी है। पर्यावरण विभाग ने घाट पर मशीन से रेत लोड करने,नदी के दोनों किनारे पर सौ मीटर तक रेत की खुदाई करने और दो मीटर से अधिक गहरी खुदाई पर पूर्णत: रोक लगा दी है। इतना ही नहीं ट्रांसपोर्टिंग के दौरान वाहनों में रेत को ढकने के लिए तिरपाल लगाने के निर्देश भी थे लेकिन इनमें से किसी भी शर्त का पालन होता दिखाई नहीं दिया। रेत की कीमत तय करने के मकसद से बुलाई गई बैठक में कलेक्टर ने अवैध खुदाई नहीं करने की हिदायत दी थी लेकिन उनके आदेश पर भी अमल नहीं हो रहा है। खनिज अमला अवैध खुदाई पर रोक लगाने असफल रहा है। रेत की कीमतें भी अधिक वसूल की जा रही है।

शर्तों का उल्लंघन

-पर्यावरण विभाग की शर्तें सभी को माननी पड़ेगी। घाट से नियमानुसार रेत निकाली जा सकती है। रेत की अवैध खुदाई करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। घाटों पर टीम भेजकर निरीक्षण कराया जाता है। -के के बंजारे जिला खनिज अधिकारी

: रेत निकालने के लिए मजूदरों की सहायता लेनी है लेकिन सेंदरी के दोनों घाट में पोकलेन से रेत की खुदाई होती रही।

: रेत घाट पर मशीन से रेत लोड करने पर मनाही है लेकिन मजदूर की बजाय पोकलेन से रेत लोड की जा रही है।

: नदी के दोनों किनारे पर सौ मीटर तक रेत की खुदाई पर प्रतिबंध है पर सेंदरी घाट में 50 मीटर के दायरे में रेत की खुदाई जारी है।

: दो मीटर से अधिक गहरी खुदाई पर पूर्णत: रोक के बावजूद इससे अधिक गहरी खुदाई की जाती रही।

: ट्रांसपोर्टिंग के दौरान रेत ढुलाई करने वाले वाहनों में तिरपाल लगाना था लेकिन सैकड़ों वाहन बगैर तिरपाल के रेत गिराते दिखाई दिए

: रात में रेत की खुदाई और लोडिंग पर प्रतिबंध के साथ ही दिन में खुदाई के घंटे निर्धारित किए गए हैं लेकिन अभी जब मन पड़ रहा है, खुदाई हो रही है। सुबह से लेकर शाम तक सप्लायर घाटों में सक्रिय रहे।