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तालाब में जहर डालने वाले को 2 साल सश्रम कारावास

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
अदालत ने तालाब में जहर डालकर मछलियों को मारने और ठेकेदार को नुकसान पहुंचाने वाले युवक को 2 साल सश्रम कारावास और 2500 रुपए जुर्माने की सजा दी है। घटना ढाई साल पहले कोनी थानांतर्गत बिरकोना में हुई थी। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ओपी जायसवाल की अदालत में हुई।
मछुआ समिति के अध्यक्ष प्रार्थी मूलचंद सूर्यवंशी व अन्य लोगों ने मिलकर कोनी बिरकोना स्थित कपूर ताल तालाब को 4 साल के लिए लीज पर लिया था। वे इसमें मछली पालन कर रहे थे। उन्होंने मोंगरी, रोहू, कतला सहित 15 हजार रुपए का मछली बीज तालाब में डाला था। जब इसे निकालने का समय आया, तो इसी गांव के रहने वाले 29 वर्षीय मनोज औधेलिया पिता दुखीराम ने 9 मई 2011 की रात इस तालाब में इंडोशेल व हैक्साकोन कीटनाशक डालकर पानी को जहरीला कर दिया। इससे तालाब की सारी मछलियां मर गईं। आरोपी के इस आपराधिक कृत्य से मछुआ समिति को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मछुआ समिति के मूलचंद ने इस घटना की रिपोर्ट कोनी थाने में की। पुलिस ने आरोपी मनोज औधेलिया के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। इस मामले में अदालत ने आरोपी को धारा 277 के तहत 3 माह सश्रम कारावास व 500 रुपए जुर्माने की सजा दी है। साथ ही धारा 428 के तहत 2 साल सश्रम कारावास व 2000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की रकम नहीं पटाने पर आरोपी को ढाई माह अतिरिक्त सश्रम कारावास का आदेश दिया गया है।




सामाजिक सौहाद्र्र बिगाडऩे का मामला

इस मामले में अपराध साबित होने के बाद बचाव पक्ष ने यह दलील दी कि आरोपी अपने परिवार में एकलौता कमाने वाला है। जेल जाने से परिवार पर असर पड़ेगा। उस पर रियायत करते हुए उसे कम से कम सजा दी जाए। अदालत ने यह तर्क खारिज कर दिया। अदालत ने यह माना कि आरोपी का यह कृत्य सामाजिक सौहाद्र्र बिगाडऩे वाला और गंभीर है।

मछुआ समिति को मिलेगी रकम

अदालत ने अपने निर्णय में पीडि़त पक्ष को राहत देने का भी प्रयास किया है। दंड प्रक्रिया संहिता धारा 357 का प्रयोग करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया है कि जुर्माने से मिली रकम में 2000 रुपए मछुआ समिति को दिया जाए। इस रकम पूरे आर्थिक नुकसान की भरपाई न सही, लेकिन आंशिक तौर पर पीडि़त पक्ष को राहत जरूर मिलेगी।

ग्रामीणों को हो सकता था नुकसान

गांव का यह तालाब आम लोगों की निस्तारी के भी काम आता है। तालाब का पानी जहरीला होने से ग्रामीणों को जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। वे चर्मरोग या अन्य बीमारियों के शिकार हो सकते थे। तालाब का पानी पीने से मवेशियों की जान भी जा सकती थी। हालांकि मछलियों के मरने के बाद समय रहते जहरीले पानी का पता चल गया और लोग सतर्क हो गए।

कोनी के बिरकोना की घटना, 2 क्विंटल से अधिक मछलियों का नुकसान