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विदेशों में बढ़ा भारतीय युवाओं का दबदबा

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
आरएसएस के अखिल भारतीय सह विश्व प्रमुख रवि कुमार अय्यर का कहना है कि भारतीय युवाओं का विदेशों में दबदबा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय युवा अमेरिका और दूसरे देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धाओं में कहीं अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इससे विदेशी चिंतित हो गए हैं। अमेरिका में भारतीयों की संख्या एक फीसदी है, परंतु वहां की 11 फीसदी यूनिवर्सिटी में भारतीय युवाओं का कब्जा है।
अय्यर ने बुधवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एक वक्त था, जब भारत के लोग 40 देशों में बसते थे, परंतु इन्फर्मेशन टेक्नालॉजी के विकास के बाद भारत के लोग दुनियाभर में फैलते जा रहे हैं। संघ की शाखाएं 40 देशों में संचालित होती है, जहां काफी संख्या में भारतीय रहते हैं। इसमें अमेरिका, कनाडा, मध्य त्रिनिदाद, सुरीनाम, इटली मॉरिशस, केन्या, युगांडा, श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड, जापान, कोरिया, फिजी आदि शामिल हैं। आजादी के पहले तक कॉमनवेल्थ देशों में लेबर फोर्स के रूप में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु के लोग पलायन करते थे। 60 के दशक में भारतीयों ने प्रगतिशील अमेरिका, यूरोप के देशों की ओर रुख किया। गल्फ के देशों में पेट्रोल निकलने पर भी यहां के लोग वहां जाने लगे। 80 के दशक में इन्फर्मेशन टेक्नालॉजी के विकास के साथ ही साफ्टवेयर इंजीनियर विदेश गए। सन् 2000 आने के बाद उन्नत राष्ट्रों में चिंता होने लगी कि कंप्यूटर पर 2000 टाइप करते साथ पुराने डॉटा कैसे सुरक्षित रहेंगे? लिहाजा डॉटा फीडिंग के लिए फिर भारतीय युवाओं ने जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान विदेशियों को लगा कि ये युवा डॉटा फीडिंग ही नहीं बल्कि प्रोग्रामिंग भी कर सकते हैं। अब तो आलम यह है कि यहां के बच्चे भी आई पेड पर अपना नॉलेज बढ़ाने के उपक्रम में व्यस्त नजर आते हैं।