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सौरभ की टेक्नालॉजी ट्रेन से कराएगी आसमान की सैर

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
आसमान की सैर के लिए किसी प्लेन की जरूरत नहीं, बल्कि यह ट्रेन से भी संभव है। इस टेक्नोलॉजी पर हरियाणा के युवा इंजीनियर और स्पेस एक्सप्लोरर सौरभ कौसल काम कर रहे हैं। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में स्टूडेंट को स्पीच देने आए सौरभ ने यह टेक्नोलॉजी 2050 तक विकसित करने की बात कही है। वे स्पेस में सेटेलाइट के रूप में बढ़ रहे कचरे को साफ करने व उससे एनर्जी पैदा करने वाली टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहे हैं।
यूथ आइकॉन के तौर पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में आए सौरभ ने अपनी नई टेक्नोलॉजी के बारे में चर्चा की। सौरभ का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी 2050 तक विकसित हो पाएगी। इस पूरे अभियान पर 20 बिलियन डालर खर्च आएगा। इस टेक्नोलॉजी में एक लंबा ट्रेक बनाया जाएगा जो आसमान में 45 अंश के कोण पर मुड़ा होगा। ट्रेन गन के माध्यम से हाई स्पीड पर पुश कर अंतरिक्ष की ओर भेजा जाएगा। फिलहाल इस टेक्नोलॉजी पर काम शुरुआती स्टेज पर है। सौरभ ने इलेक्ट्रानिक एंड कम्युनिकेशन में वर्ष 2012 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की है। 18 साल की उम्र में ही स्पेस में निष्क्रिय हो चुके सेटेलाइट कचरे को साफ करने वाली टेक्नोलॉजी पर रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ था। इसे नासा ने महत्वपूर्ण और उपयोगी बताया था। सौरभ ने बताया कि इस समय स्पेस में करीब 30 हजार कचरे के पीस हैं जो 10 सेमी से भी बड़े हैं। इनसे अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों को भी खतरा रहता है।

वे सेटेलाइट कचरे को साफ करने के लिए कई टेक्नोलॉजी का उदाहरण देते हैं। वर्ष 1957 में रुस की स्पुतनिक सेटेलाइट आज भी स्पेस में निष्क्रिय होकर घूम रही है। सौरभ रिसाइकलिंग के लिए रिसर्च पेपर सेंटर फॉर स्पेस एजेंसी को भेजा है। पहली टेक्नोलॉजी में एक जालीनुमा किट होता है जो एक टच स्क्रीन के समान होता है। जब भी कोई चीज उससे टकराती है उनमें लगे सेंसर आन हो जाते हैं और किट में पहले से लगे रोबोट को मैसेज भेज देते हैं। रोबोट उस कचरे को किट से हटा कर अलग कर लेता है। इसी तरह उन्होंने सेटेलाइट कचरे को साफ करने के कई टेक्नोलॉजी का उल्लेख किया।




अंतरिक्ष में भी पैदा हो सकती है एनर्जी

सिर्फ जमीन में ही नहीं बल्कि स्पेस में भी एनर्जी पैदा की जा सकती है। इस बारे में उन्होंने कहा कि स्पेस में कचरे में रूप में उपलब्ध सेटेलाइट और टुकड़े मेटेलिक होते हैं। इनमें आयन होते हैं। आयन से ही एनर्जी पैदा की जाती है। स्पेस में एनर्जी पैदा होने वहां इमरजेंसी में एनर्जी का उपयोग किया जा सकेगा।

अंतरिक्ष में कचरा साफ करने की टेक्नोलॉजी पर भी काम