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17 करोड़ की गड़बड़ी पर मांगी जांच रिपोर्ट

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
स्वास्थ्य विभाग में 17 करोड़ रुपए की गड़बड़ी के मामले में संभागायुक्त ने सीएमओ से जांच रिपोर्ट मांगी है। इनमें से कई मामलों का खुलासा दैनिक भास्कर ने किया था।
स्वास्थ्य विभाग में जीवनदीप समिति, अनटाइड फंड, मेंटनेंस ग्रांट व ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता मिशन योजना में भारी गड़बड़ी हुई है। वर्ष 2006 से मद परिवर्तन, नियम विरुद्ध खरीदी और बिना अधिकार शासकीय रकम खर्च करने के कई मामले सामने आए हैं। जिससे शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। ट्रांसपोर्टिंग, लोडिंग-अनलोडिंग घोटाला व पेट्रोल डीजल के नाम पर करोड़ों रुपए के घोटाले में शासन ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं, लेकिन साल गुजरने के बाद भी कार्रवाई तो दूर बल्कि जांच तक पूरी नहीं हो सकी, न ही इसकी रिपोर्ट आ सकी। उच्चस्तरीय जांच का मामला उच्च स्तर पर ही दबा दिया गया। वित्तीय अनियमितता और घोटालों की इसी फेहरिस्त में 24 जनवरी 2013 को ‘दैनिक भास्कर’ ने अनटाइड फंड से नियम विरुद्ध खरीदी करने व करोड़ों का घोटाला उजागर किया था। साथ ही 26 जनवरी 2013 को आरएमए द्वारा जिलेभर में बिना
अधिकार करोड़ों रुपए की खरीदी का भी पर्दाफाश किया था। शेष पेज - १७


अन्य मामलों की तरह इन मामलों में भी उच्च स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक लीपापोती का प्रयास चलता रहा। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ((सीएमएचओ)) को ज्ञापन देकर जांच की मांग की थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर संघ ने संभागायुक्त से अपील की। संभागायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ को जांच के निर्देश दिए थे। इधर सीएमएचओ दफ्तर में न तो अब तक मामले की जांच हुई, न ही रिपोर्ट सौंपी गई। इस मामले को लेकर संभागयुक्त ने सीएमएचओ को निर्देशित किया है कि एक हफ्ते के भीतर मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करें।
ऐसे हुई गड़बड़ी
हर ब्लाक को प्रति वर्ष 6 लाख रुपए से अधिक मिलते हैं। इस फंड को फर्नीचर, मशीनरी, इक्पिमेंट, स्टेशनरी, दवा पर खर्च कर दिया गया, जबकि इनके लिए अलग से बजट मिलता है। वहीं गाइड लाइन में यह भी निर्देश है कि इस फंड से किसी कर्मचारी का वेतन नहीं दिया जाना है। लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों में ये सब धड़ल्ले से चल रहा है। इसी रकम से स्वास्थ्य केंद्र का बाउंड्रीवाल भी बनवाया गया है। हद ये कि इन रुपयों को बिना अधिकार आरएमए खर्च कर रहे हैं।
कितने अस्पताल, कितने रुपए
अविभाजित जिले के 10 ब्लाकों में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ((सीएचसी)), 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ((पीएचसी)) और 271 उप स्वास्थ्य केंद्र ((एसएचसी)) हैं। इनमें रुटिन तौर पर एनआरएचएम से एक-एक अस्पतालों में 25 हजार रुपए अनटाइड फंड, 50 हजार से 1 लाख रुपए अनुरक्षण एवं अनुदान फंड और 1 लाख रुपए जीवनदीप समिति के मद में मिलते हैं। यानी हर साल करोड़ों रुपए।




वर्ष 2006 से जीवनदीप समिति के बेहतर संचालन के लिए हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 1-1 लाख व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 50-50 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। अन्य मदों से भी केंद्रों को राशि मिल रही है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लाखों रुपए दूसरे मदों में खर्च किए जा रहे हैं। वित्तीय अधिकार न होते हुए भी आरएमए यह राशि खर्च कर रहे हैं। अनटाइड फंड व मेंटनेंस ग्रांट की राशि भी नियम विरुद्ध दूसरे मदों में खर्च की जा रही है। संघ ने आरोप लगाया कि अधिकारी भ्रष्टाचार करने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बना रहे हँै। ग्रामीण स्वच्छता समिति के लिए मितानिन व महिला पंच को मिलने वाले 10000 रुपए भी मनमर्जी तरीके से दूसरे सामानों पर खर्च कर दिए जा रहे हैं। संघ ने कहा कि विगत सालों में शासन से मिले लगभग 17 करोड़ रुपए इसी तरह खर्च कर दिए गए हैं। कई मामलों में सिर्फ कागजों पर ही खर्च दिखाया गया है।

संघ ने कहा 17 करोड़ का घोटाला

जीवनदीप समिति, अनटाइड फंड, मेंटनेंस ग्रांट, स्वच्छता समिति के फंड में गड़बड़ी का मामला



स्वास्थ्य विभाग का मामला



दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबरें।