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पौन घंटे तक चला बिलासा महिला बैंक को मर्ज करने का ड्रामा

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
तत्कालीन सहकारिता मंत्री ननकी राम कंवर के आदेश को हाईकोर्ट द्वारा अवैध ठहराने के बावजूद महिला बिलासा नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक संविलियन का आदेश मानने से इनकार कर रहा है। यही वजह है कि गुरुवार को तीसरी बार लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक प्रबंधन को पौन घंटे तक चले ड्रामे के बाद तीसरी बार खाली हाथ लौटना पड़ा। यहां उन्होंने अध्यक्ष और प्रबंधक से हाईकोर्ट का आदेश मानने की गुजारिश की, लेकिन इसे अनसुना कर दिया। बिलासा बैंक के अफसरों के अडिय़ल रवैये के बाद महिला लक्ष्मी नागरिक बैंक के अधिकारियों को रायपुर लौटना पड़ा।
सदर बाजार में संचालित बिलासा महिला नागरिक सहकारी बैंक की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे रायपुर के लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक में मर्ज करने का आदेश है, लेकिन १२ दिनों के बाद भी महिला नागरिक बैंक प्रबंधन इस आदेश को नहीं मान रहा। आदेश का मकसद इस बैंक की गड़बड़ी को दूर कर यहां आम लोगों का विश्वास दोबारा कायम करना है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा २७ दिसंबर २०१० को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के बाद पंजीयक सहकारी संस्था के १८ जनवरी २०११ के आदेशानुसार बिलासा महिला नागरिक बैंक का पंजीयन निरस्त कर इसका विलय लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक में किया गया था। लक्ष्मी बैंक ने इस बैंक पर ब्रांच के तौर पर ६ माह तक काम करना शुरू किया, लेकिन तत्कालीन सहकारिता मंत्री के निर्णय के अनुसार बिलासा महिला नागरिक सहकारी बैंक के संचालकों ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए बिलासा महिला सहकारी बैंक को बिना रिजर्व बैंक के लाइसेंस के संचालित करने लगे। इस पर लक्ष्मी महिला नागरिक बैंक ने पूर्व सहकारी मंत्री के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दायर की। इसमें छत्तीसगढ़ शासन अरूणा दीक्षित, पंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर, भारतीय रिजर्व बंैक मुंबई और बिलासा महिला सहकारी बैंक को पार्टी बनाया। सभी पक्षों के अधिवक्ता और उनके तर्क को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सहकारी मंत्री के उस आदेश, जिसे उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिया था उसे अवैध बताकर १० जनवरी २०१४ को निरस्त कर दिया और लक्ष्मी महिला बैंक के पक्ष में निर्णय पारित किया कि बिलासा महिला नागरिक बैंक को लक्ष्मी बैंक में मर्ज किया जाए। इसे बिलासा महिला बैंक मानने से मना कर रहा है।




तीसरी बार आए थे लक्ष्मी महिला बैंक के अफसर

गुरुवार को दोपहर तीसरी बार रायपुर के लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक की टीम बिलासा महिला नागरिक सहकारी बैंक पहुंची। इनमें लक्ष्मी महिला बैंक की डायरेक्टर नर्मदा वर्मा, सविता तारके, डायरेक्टर आरके पाटले और सीईओ मंजीत सिंह शामिल थे। चार सदस्यीय टीम जब बैंक पहुंची तब लक्ष्मी बैंक की अध्यक्ष अरूणा दीक्षित आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने कोनी गई थी। बैंक में प्रबंधक मनोज यादव उपस्थित थे। लक्ष्मी बैंक के मैनेजर पाटले ने हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर उनसे बैंक में मैनेजर का चार्ज देने का आग्रह किया। प्रबंधक ने इस आदेश को साफ तौर पर मानने से इनकार कर दिया और उन्होंने लक्ष्मी बैंक के अधिकारियों को अध्यक्ष के आने का इंतजार करने को कहा। इस दौरान लक्ष्मी बैंक की डायरेक्टर श्रीमती वर्मा ने उनसे कहा कि वे काफी दूर से आए हैं और उन्हें वे चार्ज दे दें। पर उन्होंने इस मामले को लेकर अडिय़ल रवैया अपना लिया और यह ड्रामा तकरीबन पौन घंटे तक चलता रहा।

अध्यक्ष ने भी किया इनकार

पौन घंटे बाद आरएएस के कार्यक्रम से लौंटीं अरूणा दीक्षित ने भी हाईकोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर कहा कि बैंक प्रबंधन की ओर से कोर्ट में पिटीशन दायर की गई है और उन्हें उनके फाइनल आदेश का इंतजार है। इधर, लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक के सीईओ मंजीत सिंह का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार का कोर्ट नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है,

जिसका बिलासा महिला नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष जिक्र कर रहे हैं।

तीसरी बार बैरंग लौटे लक्ष्मी महिला बैंक के अधिकारी

बिलासा महिला बैंक प्रबंधन कर रहा इनकार

लगातार गुजारिशों के बावजूद अपनाई सख्ती