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जेल से भागे कैदी रातभर कोनी में रुके थे

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
सेंट्रल जेल की सुरक्षा एक बार फिर तार-तार हो गई जब यहां से गुरुवार देर रात दो कैदी टायलेट की छप्पर निकालकर भाग निकले। 12 दिन पहले ही इन्हें अपहरण व दुष्कर्म के मामले में यहां लाया गया था। दोनों कैदी गौरेला के रहने वाले हैं। वे अपने रिश्तेदार के घर कोनी देवनगर में ८ घंटे तक रुके, लेकिन पुलिस को उनकी भनक तक नहीं लगी। इस मामले को जेल प्रशासन ने गंभीर चूक मानते हुए प्रहरी व गार्ड इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया है। जेलर व चक्कर इंचार्ज को नोटिस दिया गया है।
घटना गुरुवार रात 1.30 से 2.00 बजे के बीच हुई। बंदी कौशल गंधर्व व राजू सिंह गंधर्व दोनों 19 वर्ष 11 जनवरी 2013 को अपहरण व अनाचार के आरोप में चालान के बाद जेल लाए गए थे। जेल प्रशासन ने इन्हें बैरक नंबर 9 में रखा था। यह पहले महिला बैरक था। इसमें 19 से 21 साल के बीच के बंदियों को रखा जाता है। घटना की रात भी दोनों बंदी इसी बैरक में थे। करीब डेढ़ से दो बजे के बीच दोनों इसी बैरक के टायलेट गए थे। इसका छज्जा खपरैल का है। दोनों कैदी खपरैल हटाकर महिला जेल की ओर चले गए। वहां से दोनों दीवार फांदकर फरार हो गए।
मुख्य गेट पर तैनात जवान ने दोनों को भागते हुए देखा और उन्हें कुछ दूर तक दौड़ाया भी, लेकिन वह उन्हें पकडऩे में कामयाब नहीं हो सका। शेष पेज - २१
सेंट्रल जेल से फरार हुए कैदी गौरेला थाना क्षेत्र के ग्राम कारीआम के रहने वाले हैं। यहां से भागने के बाद वह सीधे कोनी गए। यहां देवनगर में अपने एक रिश्तेदार के घर ठहरे। सुबह १० बजे यहां से निकल गए। देवनगर सरकंडा के वार्ड क्रमांक ४८ से जुड़ा हुआ है। इसकी दूरी ५ किलोमीटर से अधिक नहीं है। हालाकि यह इलाका कोनी थाना क्षेत्र में आता है पर आश्चर्य की बात यह है कि जेल से भागने के बाद दोनों बंदी यहां आराम से रुके। नाकेबंदी व तलाशी के बावजूद दोनों चकमा देकर निकल गए। गौरेला थानेदार एससी शुक्ला ने इस बात की पुष्टि की।

बंदियों के खिलाफ जुर्म दर्ज
जेल प्रशासन ने घटना की रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने इस मामले में दोनों के खिलाफ धारा 224 के तहत जुर्म दर्ज कर लिया है। एसपी के निर्देश पर दोनों की पतासाजी के लिए दो अलग अलग टीमें बनाई गई हंै।
रात को पुल के नीचे कूदने वालों पर संदेह
घटना की सूचना कंट्रोल रूम से प्रसारित होते ही शहर की पुलिस अलर्ट हुई। सरकंडा थानेदार कमलेश ठाकुर भी अपने स्टाफ के साथ पतासाजी में निकले। सरकंडा में इंदिरा सेतू के पास उन्हें दो संदिग्ध युवक नजर आए। पुलिस की गाड़ी को देखते हुए दोनों नदी में कूद गए। पुलिस जब नीचे पहुंची तो दोनों गायब हो चुके थे। पुलिस ने रात को शहर के चारों ओर घेराबंदी की। प्रमुख स्थानों पर नाकेबंदी कर वाहनों की जांच की गई पर दोनों का पता नहीं चला। पुलिस को दोनों के शहर में ही होने की आशंका है।
सुरक्षा पर उठा सवालिया निशान
दो कैदियों के भाग जाने के बाद जेल की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। जेल प्रशासन का कहना है कि दोनों कैदी दीवार फांदकर भाग निकले। सवाल उठता है कि उस दीवार में 240वोल्ट का बिजली का तार लगा हुआ है। इसके बाद भी उस दीवार से कैदियों का भाग निकलना कई सवालों को जन्म देता है। इधर कैदियों की देखरेख व सुरक्षा के लिए जेल के बाहर भी 24 घंटे सुरक्षा गार्ड रहते हैं। घटना की रात भी सभी यहां मौजूद थे। इसके बाद भी उनका भाग निकलना जांच का विषय है।
पहले भी हो चुका है भागने का प्रयास
11 अगस्त 2009 को सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में सजा काट रहे जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम महुंआ निवासी 23 वर्षीय विनय सिंह जेल अधीक्षक के दफ्तर की सफाई कर रहा था। इसी समय उसने खिड़की से कूदकर भागने की कोशिश की। वह खिड़की से अपना पैर बाहर निकाल चुका था। तभी जेल प्रहरी श्रीधर साहू और प्रेमलाल साहू की उस पर नजर पड़ गई और वह पकड़ा गया। प्रहरियों के साथ उसकी झूमाझटकी भी हुई।

जेल डीआईजी, आईजी, कलेक्टर, एसपी ने किया निरीक्षण
जेल ब्रेक की घटना के बाद जेल व जिला प्रशासन के अफसरों ने जेल का निरीक्षण किया। पहले कलेक्टर ठाकुर रामसिंह, आईजी राजेश मिश्र, एसपी बीएन मीणा, एडीएम नीलकंठ टेकाम, एडिशनल एसपी ग्रामीण जेआर ठाकुर सहित अन्य अफसरों ने जेल का निरीक्षण किया। दोपहर को रायपुर से डीआईजी केके गुप्ता भी यहां जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने जेल अधीक्षक व अन्य अफसरों से घटना की जानकारी ली।
जेल मंत्री से कांग्रेसियों ने मांगा इस्तीफा
सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदियों के फरार होने की घटना को प्रदेश की रमन सरकार की विफलता बताते हुए कांग्रेस नेताओं ने जेल मंत्री से इस्तीफे की मांग की है। जिला शहर कांग्रेस ने एक पत्र में कहा कि प्रदेश में पांच सेंट्रल जेल सहित जिला जेल व सब जेलों में हजारों विचाराधीन कैदी और अपराधी कैद है। प्रदेश निर्माण के बाद जेल ब्रेक जैसी घटनाएं आम हो गई है। जिला शहर अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने कहा कि जगदलपुर की घटना के बाद ट्रेन हाईजेक और जेल ब्रेक कर दो आरोपियों के भागने का मामला राज्य शासन की विफलता को प्रदर्शित करने के लिए काफी है। जिला ग्रामीण अध्यक्ष अरूण तिवारी ने कहा कि प्रदेश निर्माण के १३ साल बाद भी भाजपा सरकार ने यह कभी सोचा नहीं कि जेल में क्षमता से अधिक कैदियों को अव्यवस्थित और असुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है। पूर्व बीडीए अध्यक्ष अनिल टाह, शेख गफ्फार, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर, मेयर वाणी राव, प्रभारी महामंत्री अनिल सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में आम लोग असुरक्षित हैं।




जैमर, कैमरा काम के नहीं

सेंट्रल जेल में सुरक्षा के लिए जैमर व सीसी कैमरा भी लगाया गया है। जब भी कोई वारदात होती है, इसके खराब होने की जानकारी दी जाती है।

जरूरत पड़ी तो मजिस्ट्रियल जांच:कलेक्टर ठाकुर राम सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी।



अलार्म बजा तब पहुंचे जेलकर्मी

जेल से दो कैदियों के भागने की सूचना जेल अधीक्षक एसके मिश्रा को दी गई। उन्होंने कंट्रोल रूम को सूचना दी। बैरक नंबर 9 के बाहर ड्यूटी पर तैनात प्रहरी सामल सूत्रधार व गार्ड इंचार्ज उदयलाल को निलंबित कर दिया है। जेलर आरए घोसले व चक्कर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है।

शुक्रवार की दोपहर जेल डीआईजी केके गुप्ता ने भी सेंट्रल जेल का निरीक्षण किया। जेल के पीछे खाली पड़ी है जमीन

अक्सर होती है मारपीट

सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण यहां सुविधाओं के लिए कैदियों के बीच आए दिन मारपीट होती है। इसमें कुछ लोगों की जान भी चली गई है। इधर प्रहरियों की संख्या कम होने के कारण बीमार लोगों को सिम्स भेजने में दिक्कत होती है।

300 की जगह ४३

ही दे रहे पहरा

जेल में केवल ४३ प्रहरी की सेवाएं दे रहे हैं। कैदियों की संख्या के हिसाब से यहां 300 प्रहरियों की जरूरत है। जेल में 60-95 वर्ष के 250 से 300 बंदी है। इनमें कुछ लोग चल फिर भी नहीं सकते। शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें संभालने में जेल प्रशासन को काफी पसीना बहाना पड़ रहा है।



छोटे अपराध को अंजाम देकर शौकिया तौर पर जेल आने वाले लोगों की संख्या 50-150 के बीच है, इनका उद्देश्य जेल में रहकर मुफ्त की रोटी तोडऩा है। यहां बीमार होने पर दवा की व्यवस्था हो जाती है। इसलिए वे बाहर नहीं जाना चाहते। जेल प्रशासन पर कैदियों के इलाज का खर्च बढ़ रहा है। वर्तमान में जेल प्रशासन 25 लाख रुपए अपोलो हास्पिटल व 3 लाख रुपए रेडक्रास का देनदार है।



जेल से नहीं जाना चाहते कुछ अपराधी

प्रहरी, गार्ड इंचार्ज निलंबित, जेलर, चक्कर अधिकारी को नोटिस, बरामदे में सोते हैं कैदी



पांच साल की प्रमुख घटनाएं

टायलेट की छत से दो कैदी फरार, अपहरण व दुष्कर्म के आरोपी थे, 12 दिन पहले लाए गए थे सेंट्रल जेल