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डीन ऑफिस ने दबाया आदेश, नहीं मिली प्रोत्साहन राशि

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
सिम्स में संस्थागत प्रसव कराने के बाद सैकड़ों महिलाएं प्रोत्साहन राशि के लिए महीनों से भटक रहीं हैं। कारण ये कि डीन ऑफिस ने सीएमओ का आदेश 3 महीनों से दबाकर रखा है। सीएमओ ने बिना ईएमटीएस नंबर के भुगतान करने के लिए कहा था, लेकिन यह आदेश एमएस तक पहुंचा ही नहीं।
शासन द्वारा संस्थागत और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए योजना चलाई जा रही है। इसके पीछे करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रसूताओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें दवा-इलाज व भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। घर तक लाने-लेजाने की मुफ्त सुविधा दी जा रही है। साथ ही हर प्रसूता व मितानिन को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पिछले साल शासन ने नियमों में आंशिक संशोधन करते हुए प्रोत्साहन राशि का भुगतान एकाउंट पेयी चेक से करने व ईएमटीएस ((ई-महतारी पंजीयन रजिस्टर नंबर)) अनिवार्य कर दिया था। हालांकि जिले में अभी तक इसका साफ्टवेयर उपलब्ध नहीं हो सका है। इससे सिम्स में डिलिवरी कराने वाली महिलाएं ईएमटीएस नंबर के चलते भुगतान से वंचित हैं। इस मुद्दे से अवगत कराते हुए सिम्स अस्पताल प्रबंधन ने सीएमओ को पत्र लिखा था। भुगतान के विषय में उनसे मार्गदर्शन मांगा गया था। इसके जवाब में सीएमओ ने 27 नवंबर 2013 को एमएस के नाम पत्र लिखा। सीएमओ ने जननी सुरक्षा योजना के तहत हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान की प्रक्रिया को सरल करते हुए यह दिशा निर्देश दिया कि भुगतान के लिए ईएमटीएस पंजीयन नंबर अनिवार्य न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना ईएमटीएस नंबर के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए। सीएमओ ने इससे पहले 31 अक्टूबर को भी इसी आशय का पत्र लिखा था। यह पत्र सिम्स के डीन के ई-मेल पर भेजा गया था, लेकिन सीएमओ का यह निर्देश डीन के दफ्तर में ही दबकर रह गया। 3 से 4 महीने में यह पत्र सिम्स के एमएस तक नहीं पहुंच सका। यही कारण है कि सिम्स में डिलिवरी के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए महिलाएं कई महीनों से भटक रही हैं।




शासन की योजनाओं पर गंभीर नहीं सिम्स प्रबंधन

सैकड़ों प्रसूताओं की प्रोत्साहन राशि पेंडिंग होने के बारे में 3 जनवरी को सिम्स की ऑटोनॉमस बैठक के दौरान अनौपचारिक चर्चा हुई। इसके बावजूद सिम्स प्रबंधन ने इस पर जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। सीएमओ का पत्र आज भी डीन के दफ्तर में पड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिम्स प्रबंधन शासन की योजनाओं, निर्देशों व महिला हितग्राहियों को लेकर कितना गंभीर है।

10 महीनों से भुगतान लंबित

शासन ने अपै्रल 2013 में भुगतान प्रक्रिया के नियमों में संशोधन किया था। अप्रैल से दिसंबर 2013 तक सिम्स में 2280 महिलाओं की डिलिवरी हुई। इनमें 1100 शहरी व 1180 ग्रामीण महिलाएं हैं। 10 माह के भीतर अब तक केवल 280 ग्रामीण हितग्राहियों को ही भुगतान हो सका है। तकरीबन 2000 प्रसूताएं आज भी प्रोत्साहन राशि के इंतजार में हैं। इनमें कई महिलाएं व उनके परिजन रोजाना सिम्स के चक्कर काट रहे हैं।



ञ्च महीनों से भटक रहीं प्रसूताएं व परिजन, हलाकान होकर कई लोगों ने छोड़ दी उम्मीद

सीएमओ ने नवंबर में जारी किया था आदेश, कहा था- बिना ईएमटीएस नंबर के करें भुगतान, तीन महीने में डीन से एमएस तक नहीं पहुंचा आदेश