हाईकोर्ट ने मांगी ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट
भास्कर न्यूज - बिलासपुर
पीडब्ल्यूडी के पूर्व इंजीनियर इन चीफ ((ईएनसी)) सहित अन्य अफसरों पर मालदीव टूर में बगैर अनुमति अधिक राशि का भुगतान करने, चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने सहित अन्य आरोप लगाते हुए लगाई गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को ईओडब्ल्यू की जांच और स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। शासन ने अपने जवाब में बताया था कि मामले को जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपा गया है और फिलहाल जांच जारी है। इधर, पूर्व ईएनसी ने ईओडब्ल्यू द्वारा क्लीन चिट देने की जानकारी तो दी, लेकिन अपना जवाब नहीं प्रस्तुत कर सके।
पीडब्ल्यूडी के पूर्व इंजीनियर इन चीफ पीके जनवदे के खिलाफ बालाघाट मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते और अजय कुमार बिसेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। इसमें जनवदे पर अपने कुछ चहेते ठेकेदारों को विभागीय टेंडर जारी कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही जानकारी दी गई है कि जनवदे विभाग के कुछ वरिष्ठ अफसरों के साथ दो साल पहले मालदीव टूर पर गए थे। निजी यात्रा के दौरान सभी हॉटल ताज में रुके थे। उन्होंने मोटर बोट पर विभिन्न जगहों की यात्राएं की। इस दौरान उन्होंने लगभग 30 लाख रुपए का भुगतान डालर में करते हुए फेमा का उल्लंघन किया गया है। याचिका में भुगतान किए गए बिल की कॉपी भी प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि अधिकारियों को 20 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करने के लिए विदेशी मामलों के मंत्रालय से बाकायदा अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन इस नियम का पालन भी नहीं किया गया। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ईएनसी पीके जनवदे, सीबीआई, केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। राज्य शासन ने अपने जवाब में बताया कि मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपा गया है। वर्तमान में मामले में जांच जारी है। इधर, पूर्व ईएनसी जनवदे ने ईओडब्ल्यू से क्लीन चिट मिलने की जानकारी दी। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को एक सप्ताह के भीतर ईओडब्ल्यू की जांच और स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इधर, जनवदे ने मामले में जवाब पेश नहीं किया है, उन्हें भी एक सप्ताह में अनिवार्य रूप से जवाब देने को कहा गया है।
सीबीआई जांच का था निर्देश
समरीते ने इस मामले की शिकायत केंद्र शासन से की थी। केंद्र शासन ने सीबीआई जांच कराने को लेकर राज्य शासन को पत्र लिखा था, लेकिन इस पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी।