डीन ने एमएस को भेजा आदेश
0 तीन माह से डीन के दफ्तर में था आदेश
0 ईएमटीएस नंबर के बिना होना था भुगतान
0 सैकड़ों महिलाओं को प्रोत्साहन राशि का इंतजार
भास्कर न्यूज, बिलासपुर
सिम्स के डीन ऑफिस में तीन माह से दबाकर रखा गया सीएमओ का आदेश आख्रिर एमएस तक पहुंच गया। सीएमओ ने बिना ईएमटीएस नंबर के भुगतान करने के लिए कहा था, लेकिन यह आदेश एमएस तक पहुंचा ही नहीं। सिम्स में संस्थागत प्रसव कराने के बाद सैकड़ों महिलाएं प्रोत्साहन राशि के लिए महीनों से परेशान हो रही हैं। दैनिक भास्कर में खबर छपने के बाद डीन ने शनिवार को आदेश एमएस को भेज दिया।
संस्थागत और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन द्वारा योजना चलाई जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च कर प्रसूताओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें दवा-इलाज व भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। घर तक लाने-ले जाने की मुफ्त सुविधा दी जा रही है। साथ ही हर प्रसूता व मितानिन को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पिछले साल शासन ने नियमों में आंशिक संशोधन करते हुए प्रोत्साहन राशि का भुगतान एकाउंट पेयी चेक से करने व ईएमटीएस ((ई-महतारी पंजीयन रजिस्टर नंबर)) अनिवार्य कर दिया था। हालांकि जिले में अभी तक इसका साफ्टवेयर उपलब्ध नहीं हो सका है। इससे सिम्स में डिलिवरी कराने वाली महिलाएं ईएमटीएस नंबर के चलते भुगतान से वंचित हैं। इस मुद्दे से अवगत कराते हुए सिम्स अस्पताल प्रबंधन ने सीएमओ को पत्र लिखा था। भुगतान के विषय में उनसे मार्गदर्शन मांगा गया था। इसके जवाब में सीएमओ ने 27 नवंबर 2013 को एमएस के नाम पत्र लिखा। सीएमओ ने जननी सुरक्षा योजना के तहत हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान की प्रक्रिया को सरल करते हुए यह दिशा निर्देश दिया कि भुगतान के लिए ईएमटीएस पंजीयन नंबर अनिवार्य न किया जाए। उन्होंने बिना ईएमटीएस नंबर के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने को कहा था। सीएमओ ने इससे पहले 31 अक्टूबर को भी इसी आशय का पत्र लिखा था। यह पत्र सिम्स के डीन के ई-मेल पर भेजा गया था, लेकिन सीएमओ का यह निर्देश डीन के दफ्तर में ही दबकर रह गया। 3 से 4 महीने में यह पत्र सिम्स के एमएस तक नहीं पहुंच सका। यही कारण है कि सिम्स में डिलिवरी के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए महिलाएं कई महीनों से भटक रही हैं। शुक्रवार को दैनिक भास्कर ने इस संबंध में प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया। इसके बाद शनिवार को डीन ने आदेश एमएस को भेज दिया है। अब सिम्स में प्रसव कराने वाली महिलाओं को बगैर ईएमटीएस नंबर के प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो सकेगा।
10 महीनों से रुका है भुगतान
शासन ने अपै्रल 2013 में भुगतान प्रक्रिया के नियमों में संशोधन किया था। अप्रैल से दिसंबर 2013 तक सिम्स में 2280 महिलाओं की डिलिवरी हुई। इनमें 1100 शहरी व 1180 ग्रामीण महिलाएं हैं। 10 माह के भीतर अब तक केवल 280 ग्रामीण हितग्राहियों को ही भुगतान हो सका है। तकरीबन 2000 प्रसूताएं आज भी प्रोत्साहन राशि के इंतजार में हैं। इनमें कई महिलाएं व उनके परिजन रोजाना सिम्स के चक्कर काट रहे हैं।