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धान की पैदावार कम, फिर भी पिछले साल से ज्यादा खरीदी
भास्कर न्यूज - बिलासपुर
शुरुआती सवा माह में महज सवा लाख क्विंटल खरीदी करने वाली जिले की 130 सोसायटियों में 33 लाख क्विंटल की खरीदी जा चुकी है। यानि 38 लाख क्विंटल के टारगेट को पूरा करने अब महज पांच लाख क्विंटल की खरीदी करनी होगी। टारगेट के पूरा होने के साथ ही खरीदी के इसे पार करने की भी उम्मीद है, लेकिन धान खरीदी में आई अचानक तेजी से फर्जीवाड़ा होने की आशंकाएं भी जताई जा रही है। मार्कफेड के डीएमओ ने इसी सिलसिले में कलेक्टर को पत्र लिखा है।
नया साल शुरू होते ही धान खरीदी में अचानक तेजी आ गई है। रोज औसत 30 से 40 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो रही है। पिछले सीजन में करीब 38 लाख क्विंटल धान की खरीदी 128 केंद्रों में हुई थी। इस बार दो अतिरिक्त केंद्र खोलकर खरीदी की जा रही है। टारगेट पूरा करने को लेकर किसी को संदेह नहीं है लेकिन जनवरी शुरू होते ही आई तेजी से कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। धान खरीदी केंद्र वैसे भी शुरू से ही शार्टेज के नाम पर बदनाम है। ऐसे में मोटा के नाम पर 220 क्विंटल सरना धान की डिलीवरी मेमो देने, जिले का 60 क्विंटल धान जांजगीर-चांपा के जर्वे में मिलने जैसी घटनाओं ने सोसायटियों की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। खरीदी केंद्रों में बारदानों से धान की जगह पत्थर और मिट्टियां भी बरामद हो चुकी है।
वहीं कम्प्यूटर पर किसानों की खेती का रकबा बढ़ाकर फर्जी खरीदी का प्रचलन भी जिले की कई सोसायटियों में है। सल्का और लाखासार सोसायटी में तो यह बात जांच में सामने भी आ चुकी है। सल्का में दो करोड़ तो लाखासार में 25 लाख रुपए का घोटाले का मामला उजागर हुआ था। इतना ही नहीं इन आशंकाओं के बीच मार्कफेड के डीएमओ एपी त्रिपाठी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर धान खरीदी पर संदेह जताया है। पत्र से हड़कंप मच गया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि कृषि विभाग के मुताबिक इस बार धान की पैदावार कम हुई है। इसके बावजूद खरीदी केंद्रों में पिछले साल की कुल खरीदी से ज्यादा खरीदी की जा चुकी है। इससे धान खरीदी में संदेह उत्पन्न होता है। 21 जनवरी तक 14 केंद्रों में हुई खरीदी की सूची पत्र के साथ अटैच कर उन्होंने इस संबंध में आदेश देने का आग्रह किया है। सहकारिता से जुड़े अधिकारी द्वारा धान खरीदी में आशंका जताने वाला यह पहला पत्र है। इससे पहले किसी भी अधिकारी ने ऐसा पत्र कलेक्टर को नहीं लिखा है। यानि जिले में धान खरीदी में जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। मिलर और खाद्य अधिकारियों से सोसायटी प्रबंधकों की मिलीभगत को लेकर कई शिकायतें पहले ही मिल चुकी है।