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हाइड्रो कार्बन गैस खोजने बनाया क्वांटम कास्केड लेजर्स

7 वर्ष पहले
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कैलाश सिंह यादव - कोरबा

गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी बिलासपुर से इलेक्ट्रानिक्स में एमएससी करने वाले देवेन्द्र धिरहे ने पीएचडी के दौरान हाइड्रो कार्बन गैस की सेंसिंग के लिए क्वांटम कास्केड लेजर्स नामक उपकरण तैयार किया है। हाइड्रो कार्बन गैस की उपयोगिता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक देशों ने अपनाया है। अपने देश में असीम संभावनाएं तो हैं, लेकिन महंगी प्रणाली के कारण विदेशों पर निर्भर है। धिरहे को स्काटलैंड में आर्गेनिक लाइट इमेटिंग डायोट बनाने का रिसर्च चल रहा था जहां काम करने का भी अवसर मिला।

यह उपकरण मूलत: धनबाद, झारखंड निवासी देवेन्द्र धिरहे की है। जिनकी प्रारंभिक शिक्षा जांजगीर-चांपा व कोरबा जिले में हुई है। पिता पुरुषोत्तम धिरहे बालको से सेवानिवृत्ति के बाद धनबाद शिफ्ट हो गए हैं। देवेन्द्र ने नेशनल ओवरसीज छात्रवृत्ति अवार्ड के लिए भारत सरकार, नई दिल्ली को आवेदन दिया। इस अवार्ड के लिए देश भर के 10 हजार छात्रों ने भी आवेदन किया था। जो विषय देवेन्द्र ने चुना था वह पूरे देश के किसी छात्र ने नहीं चुना। हर साल 30 छात्रों को अलग-अलग विषय के लिए अवार्ड दिया जाता है। 2007-8 में केन्द्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट से मिली नेशनल ओवरसीज स्कालरशिप से देवेन्द्र मोनोलिथिक टनेबल क्वांटम कास्केड लेजर्स विषय पर ग्लास्गो यूनिवर्सिटी यूनाइटेड किंगडम के प्रोफेसर चाल्र्स एन आयरनसाइड व प्रो.डगलस जे पॉल के मार्गदर्शन में इलेक्ट्रानिक्स एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपना शोध प्रस्तुत करते हुए पीएचडी की उपाधि अर्जित की।

पीएचडी के दौरान स्वयं के बनाए गए क्वांटम कास्केड लेजर्स नामक उपकरण की उपयोगिता विषय पर तैयार शोध को अंतर्राष्ट्रीय जनरल्स में प्रकाशित कराया। शेष पेज 14



क्या है क्वांटम कास्केड लेजर्स

हाइड्रो कार्बन गैस सेंसिंग की खोज करने वाला उपकरण है। जिसका इस्तेमाल क्रोमेटिव ग्राफी मशीन में होता है। यह मशीन उपकरण के माध्यम से हाइड्रो कार्बन गैस खोजने का काम करती है जो अपना काम एक सप्ताह में पूरा कर लेती है। इस तकनीक को अपनाने के लिए देश में एक विशाल लैब की जरूरत पड़ेगी। जिसके माध्यम से गैस को उपयोग में लाया जा सकेगा। कोयला एवं पेट्रोलियम उत्पादित देशों में इस गैस की उपलब्धता सर्वाधिक होती है।

अब मुझे अपना काम करना है

पीएचडी उपाधि हासिल करने वाले डॉ.देवेन्द्र ने चर्चा के दौरान कहा कि देश ने उसे मंजिल दिलाई है अब अपने देश के लिए कुछ करने की बारी मेरी है। देश में संभावनाएं तलाश रहे हैं, जब मौका मिलेगा, रिसर्च के क्षेत्र में जुड़कर उसका लाभ देशवासियों को दिलाना चाहेंगे। उनका कहना है कि शोध पूरा करने के बाद उन्हें जर्मनी, अमेरिका, यूके से आफर मिल रहे हैं। जिसके लिए वे अभी तैयार नहीं हैं। इस उपलब्धि का श्रेय वे अपने परिजनों के साथ रविशंकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजय तिवारी, गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी बिलासपुर के प्रोफेसर एचएस तिवारी सहित पीजी कालेज के प्रोफेसर आरके सक्सेना को देते हैं।

इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ आप्टिक्स व फोटोनिक्स मेंबर के साथ देवेन्द्र।



विश्व के पांच देशों ने सराहा डॉ.धिरहे का शोध, इलेक्ट्रानिक एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लास्गो, स्काटलैंड यूके से की पीएचडी