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कालेजों में रिसर्च व जाब ओरिएंटेड कोर्स होंगे ट्रेडमार्क

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
कालेज अब पारंपरिक कोर्स के लिए हीं नहीं बल्कि रिसर्च व जॉब ओरियंटेड कोर्स के लिए जाने जाएंगे। बीए-बीएससी को आउट ऑफ कोर्स होने के बाद बैचलर ऑफ वोकेशनल ((बीवॉक))कोर्स चलाया जाएगा। जिसे बाजार की मांग के अनुसार चलाया जाएगा। कालेजों को तीन स्तर पर डेवलप किया जाएगा। रिसर्च,जॉब ओरिएंटेड कोर्स के बाद बचे कालेज उच्च शिक्षा में जीआरपी बनाए रखने के लिए काम करेंगे। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के इन प्रावधानों के अमल में आने की शुरूआत भी कालेजों में हो चुकी है।
कालेजों में बीए,बीएससी और अन्य पारंपरिक कोर्स कुछ समय के ही मेहमान है। आने वाले समय में कालेजों में रिसर्च व जॉब ओरियंटेड कोर्स ही उनकी पहचान होंगे।यूजीसी की मानें तो ऐसे कोर्स को आउट ऑफ कोर्स करार दे दिया गया है और राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान गठित कर नए बदलाव की तैयारी है।कालेजों को आने वाले समय में तीन स्तरों पर डेवलप किया जा रहा है।तीन वर्गो में बांटकर पहले स्तर पर ऐसे कालेज को रखा जाएगा जिन्हें सिर्फ रिसर्च के लिए ही विकसित किया जाएगा।दूसरे स्तर पर कालेजों में सिर्फ जॉब ओरियंटेड कोर्स ही चलाए जाएंगे जिससे कि वे समय के साथ नौकरी के लिए मिले अवसरों को भुना सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। मानव संसाधन मंत्रालय ने इसके लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान का गठन कर अमल में लाने के लिए पूरे प्रावधान किए हैं। इसकी शुरूआत राज्य में भी हो चुकी है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत ही पहली बार कालेजों में पुराने पैटर्न में हो रही पढ़ाई के बाद अब सेमेस्टर एग्जाम में पढ़ाई हो रही है। इसके साथ ही च्वाइज्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से भी पढ़ाई हो रही है। कालेजों में एडमिशन के वक्त विषयों को लेना स्टूडेंट की रुचि पर निर्भर करेगा।




बाजार की मांग के अनुसार चलेंगे कोर्स

पिछले साल वोकेशनल कोर्स को एच्छिक करने के बाद नए सत्र से बिलासपुर यूनिवर्सिटी ने वोकेशनल कोर्स को अनिवार्य कर दिया है। अनिवार्य कर दिया है जो राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान((रुसा)) के मापदंडों को पूरा करते हैं। च्वाइज बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से भी स्टूडेंट को विषयों को चुनने की आजादी होगी। इससे वे जॉब ओरिएंटेड कोर्स को भी चुन सकेंगे।

रिसर्च के लिए होगी यह प्राथमिकता

कुछ कालेजों को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर अभी रिसर्च की स्थिति बदतर है। विषय विशेषज्ञ की बात तो दूर नियमित टीचर तक नहीं है। रिसर्च के लिए कालेजों में लैब नहीं है और जहां है वहां उपकरण पुराने है। कालेजों की स्थिति के कारण ही उन्हें यूजीसी से प्रोजेक्ट भी हासिल नहीं हो रहे है। सबसे पहले कालेजों में रिसर्च गाइड,लाइब्रेरी,लैब,हाइटेक संसाधन होने चाहिए। रिसर्च का लाभ उस क्षेत्र को भी होना चाहिए।

॥राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के मापदंडों को अमल में आने की शुरूआत हो गई है।इससे उच्च शिक्षा में निश्चित तौर पर बड़ा बदलाव आएगा और गुणवत्ता में सुधार होगा।ञ्जञ्ज

डा. गौरीदत्त शर्मा, कुलपति बिलासपुर यूनिवर्सिटी

अब पारंपरिक नहीं तीन श्रेणी में कालेजों का होगा विकास, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की अवधारणा , राज्य में हुई शुरुआत