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तुषार की आंखों में कैद है मौत का मंजर

7 वर्ष पहले
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ञ्च मासूम ने सुनाई आपबीती, रातभर मौत से जूझते खेत में पड़ा रहा
भास्कर न्यूज. बिलासपुर
‘भैया लो, इसे देखो... ये तुम्हारे लिए लाया हूं।’ चार साल का तन्मय अपने हाथ में रखे खिलौने को बड़े भाई तुषार को सौंप रहा था, लेकिन उसकी नजरें तुषार के चेहरे के गहरे जख्मों पर थीं। इधर अपने भाई को करीब पाकर तुषार उस असहनीय दर्द को भूलने की कोशिश कर रहा था जो उसे अपनों से मिला था। अस्पताल के दूसरे मरीजों को तुषार को देखकर
अपनी तकलीफ कम लगने लगी हैं।
जबड़ापारा में जिस मासूम की हत्या करवाने के लिए उसकी सौतेली मां ने सुपारी दी थी, उसका इलाज सिम्स में चल रहा है। उसके चेहरे के जख्म सूखे नहीं हैं, आंखें सूजी हुई हैं। गाल, कनपटी से बहा खून अभी भी उसके साथ हुई दरिंदगी की कहानी कह रहा है। दैनिक भास्कर ने तुषार के साथ कुछ पल बिताए। इस समय तुषार का ४ साल का भाई तन्मय उसके पास बेड पर ही बैठा था। उसे मासूम के साथ हुई घटना के बारे में पूरी जानकारी तो नहीं थी। वह ये जरूर जान रहा था कि उसके भाई को चोट लगी है। अपने हाथ में रखा खिलौना वह बेड पर बैठे तुषार को दे रहा था। तुषार की आपबीती सुनें तो लगता है कि वह अपनी हिम्मत और किस्मत की बदौलत ही आज जीवित है।
साइकिलवाले ने घर ले जाकर चाय पिलाई: तुषार ने बताया कि सुबह उसे होश आया। सिर व आंख में दर्द हो रहा था। शेष पेज - १७
वह खेत से उठा और पास की सड़क तक आया।
यहां उसने एक साइकिलवाले को रोका। उसी ने उसकी जान बचाई। वह उसे अपने घर ले गया और खाने के लिए बिस्किट और चाय दी। रोटी भी खिलाई। उसने ही गाड़ी बुलाकर अस्पताल तक भेजा। वह रातभर खेत में पड़ा रहा, पर उसे पता नहीं चला।