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एकतरफा कार्रवाई का चौतरफा विरोध

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
सहेली शाला की राशि निकाले जाने के मामले में हुई एकतरफा कार्रवाई का विरोध होने लगा है। जिला पंचायत सीईओ ने मामले में दोषी पाए गए जिला स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है, जबकि निचले स्तर के 61 कर्मचारियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया है। इसके विरोध में मस्तूरी ब्लाक के शैक्षिक समन्वयकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्यालयीन काम नहीं करने की जानकारी दी है। इधर, छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ ने पूरे मामले में जिला स्तर के अफसरों को दोषी ठहराते हुए उन पर भी कार्रवाई के साथ मैदानी अमले की बहाली की मांग की है।
सहेली शाला बंद होने के बाद भी खाते से एक करोड़ रुपए निकाल लिए जाने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने 32 शैक्षिक समन्वयक और 29 सहेली शाला प्रभारियों को सस्पेंड कर दिया है। इस प्रकरण में तत्कालीन डीपीसी एसपी पांडेय, एपीसी वित्त अखिलेश तिवारी, शाखा प्रभारी और लेखापाल को भी दोषी ठहराया गया है। सीईओ ने लेखापाल और शाखा प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं की, वहीं एपीसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन मिशन संचालक को भेजा गया है। दिलचस्प है कि तत्कालीन एपीसी वित्त अखिलेश तिवारी शिक्षाकर्मी हैं, जिस पर कार्रवाई जिला स्तर से ही संभव है। सस्पेंड होने वालों ने सीईओ के दोहरी नीति पर सवाल खड़ा किया और कलेक्टर को विरोध में ज्ञापन सौंपा। हाईस्कूल मस्तूरी में आयोजित शिक्षक समस्या निवारण शिविर में ब्लाक के शैक्षिक समन्वयकों ने कलेक्टर को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके साथ यह भी कहा कि भेद-भाव पूर्ण कार्रवाई के कारण शैक्षिक समन्वयक अब अपने काम नहीं करेंगे। ब्लाक समन्वयक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मोहम्मद शहजादा ने मौके पर मौजूद डीईओ को जानकारी दी कि सहेली शाला बंद होने की जानकारी मैदानी कर्मचारियों को नहीं दी गई। वर्ष 2012-13 की राशि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद मई 2013 में जारी की गई। इसके लिए उच्च कार्यालय दोषी है, लेकिन जिला कार्यालय के दोषियों को बचाते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों पर
कार्रवाई की गई। बताया गया कि सहेली शाला की राशि डीडी द्वारा शासन को वापस कर दी गई है, फिर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। समन्वयकों ने मामले के निराकरण तक काम नहीं करने का फैसला लिया है।




एपीसी वित्त पर हो कार्रवाई

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष कुशल कौशिक ने एक बयान में कहा है कि मैदानी अमले को राशि निकालने के लिए तत्कालीन एपीसी वित्त अखिलेश तिवारी द्वारा मौखिक निर्देश दिए गए थे। जांच कमेटी ने भी एपीसी वित्त को दोषी ठहराया है। इसके बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं किया जाना पूरी कार्रवाई को कटघरे में खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि पूरी गड़बड़ी जिला स्तर के अफसरों ने की। सहेली शाला 31 मार्च को बंद हुई, लेकिन इसकी जानकारी जुलाई में दी गई। जिले के अफसरों ने ही सहेली शाला के खाते में राशि जून 2013 में ट्रांसफर किया। शिक्षक संघ ने मांग की है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जाए और जिला स्तर के अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने जिला स्तर के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी है।

मस्तूरी के शैक्षिक समन्वयकों ने कार्यालयीन कार्य से किया तौबा, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, कर सीईओ के प्रति जताया रोष