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छत्तीसगढ़ भासा म सबरी दाई के भगति कस गुन
ध्रुव देवांगन
बिलासपुर
हमर छत्तीसगढ़ राज ल कौसल राज कहे गे हे
मर छत्तीसगढ़ी भासा म भगती के जम्मो गुन हर समाय हे। भासा के बोली हर अड़बड़ गुरतुर अउॅ अपनपन के महमई हर हिरदे के भितर ले निकलत हे कहाउॅक लागथे। जउॅन मन छत्तीसगढ़ी भासा म गोठियाथे तउॅन मन हमर हित-पिरित, सगा-सजन, नता-गोता बरोब्बर परेम के रसा चुचुआवत हे। तइसन अपन हिरदे के गोठ बिना बिचारे कहिच्च डारत हे कस लागथे। हमर भासा के बोली निच्छल अउॅ निस्कपट जम्मो अंग के इनदिरी के कपाट ल खोल के गोठियावत हे तइसन सुग्घर गोठ के भासा छत्तीसगढ़ी भासा नीक हे। अइसन बोली भासा के मिठास हमनन भागवत भगवान के गियान जग म भगवान बर जउॅन पिरित मानुस देह धारी मन ल करय कहिके बखाने जाथे ओकर गुन हर हमर छत्तीसगढ़ी भासा म गोठियाय ले मिलथे। हमर छत्तीसगढ़ राज ल कौसल राज कहे गे हे। कवसल्या हर भगवान राम के जननी होथे तेकर सेती ओकर सुभाव, ओकर परेम, ओकर बोली के गुरतुर मिठास, ओकर भीतरी म समाय दया, करुना, अपनपन के सेती भगवान राम ल मरजाद के सकती मिलिस। ओहि राम हर भगती के डोकरी दाई सबरी करा चउॅदा बच्छर के बनवास के भीतर मिल- भेंट होइस त सबरी दाई कइथे... परभू जी तुंहर रद्दा जोहत-जोहत मोर उमर पहागे। कन्निहा हर निहर गे। आंखी कॉन हर पथरा गे त का हो गे... फेर तुंहर दरसन के करजा कईसे छूटिहव भगवन... रामजी कहिस सबरी दाई तोर सबर के फर अड़बड़ गुरतुर हे। तोर भगती के सकती ल मोला माने बर परिस। तोर आदम परेम, गोठ- बानी सीखे बर मिलिस। जेकर भाखा हर नीक हे भासा म परेम हे... तेकर तय धन्य हस दाई। भगवान राम जी अउॅ सबरी दाई के सम्वाद के बोली भासा अउॅ गोठ बानी के परेम के मोहिनी उप्पर के भगती के महमई हर चारो खुॅट बगरगे। डोकरी सबरी दाई हर भगवान ल जूठा बोईर खवाईस। बोईर ल जूठा काबर करिस तेकरो किस्सा अईसन हे.. बोईर हर कस्सहूं झीन रहय कहिके सबरीदाई हर अड़बड़ भगवान के भगती के रस म डूब के गुरतुर-गुरतुर बोईर ल जेवाहूं कहिके जूठा करत गीस अउॅ भगवान ल खवावत गीस त भगवान हर ओकर परेम म बसीभूत होईके जूठारे बोईर ल खवाईच्च करिस। सबरी दाई ऐहि छत्तीसगढ़ राज के रहवईया रहिस। सबरी आसरम आज के सिवरीनारायेन हर आय जिहां महानन्दिया के तीर म बसे हे महानन्दिया ल चित्रोत्पल्ल गंगा के नॉव म बेद पुरान म बताये गे हे। राम जी चित्रोत्पल गंगा महानदिया के तीर सबरी के आसरम पहूंचिस त महानन्दिया हर ओकर पांव पखारिस तउॅन हर आजो ले ओकर पांव पखारत हे... देखे जा सकत हे। धन हे अईसन हमर महतारी कवसल्या दाई के कोसल राज छत्तीसगढ़ जेकर बोली हर छत्तीसगढ़ भासा के अलगेच्च अलग रूप हेवय, भासा म छन्द हे, दोहा हे, जउॅन हर हमर छत्तीसगढ़ के संसकारित तिहार, बजार, मेला म देख अउॅ सुने बर मिलथे। भासा म परेम अउॅ भगति के महमई हेवय, जउॅन हर हमर पुरवज डोकरी दाई सबरी के दे हे आय जेकर सोंधी-सोंधी महमई हर जग जाहिर हे। सबरी के कुल हर नीच कुल के रहिच्च त का हो गे फेर हमर छत्तीसगढ़ राज के राजभासा छत्तीसगढ़ हर हो गे तेकर गुन हर भारी बगरत हे। भगवान के भगती करे बर अड़बड़ तियाग तपसया करे बर परथे त भगति के रद्दा म रेंगें ल मिलथे फेर हमर छत्तीसगढ़ राज के छत्तीसगढ़ी भासा म दूई झीन महतारी के परेम के रस हर समाय हे तेकर गुरतुर छत्तीसगढ़ी भासा के बोली ल गोठियाथे ओमें गुरतुर बोली के मिठास हर परेम आय ऐहि परेम हर भगति कहाथे।