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डा. चतुर्वेदी को रिटायरमेंट से पहले पद का तोहफा
भास्कर न्यूज - बिलासपुर
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी की एकेडमिक कौंसिल ने कुलपति डा. लक्ष्मण चतुर्वेदी को उनके रिटायरमेंट के ठीक पहले चेयर प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति देने का निर्णय लिया है। वे ठीक एक महीने बाद रिटायर होने वाले हैं। इधर, इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर डा. गोपा बागची ने इसे डा. चतुर्वेदी के दबाव में लिया गया निर्णय बताते हुए धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कुलपति डा. लक्ष्मण चतुर्वेदी का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त हो रहा है। नए कुलपति कौन होंगे, इस पर अभी संशय की स्थिति है। दिल्ली से एमएचआरडी की घोषणा के बाद ही नए कुलपति का नाम पता चल सकेगा। यूनिवर्सिटी में मंगलवार को हुई अकादमिक कौंसिल की बैठक में नाटकीय ढंग से उन्हें डा. होमी जहांगीर भाभा शोधपीठ का चेयर प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव लाया गया। इसके साथ ही उन्हें इस पद पर नियुक्त करने का निर्णय भी ले लिया गया। अब यह प्रस्ताव कार्यपरिषद में भेजा जाएगा, जहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी। डा. चतुर्वेदी की उम्र आड़े आने के कारण उन्हें कुलपति की दूसरी पारी मिलना संभव नहीं था। कार्यकाल को एक साल का विस्तार मिलने के कयास लगाए जा रहे थे। अन्य विकल्पों में कुलपति से नीचे किसी भी पद पर उनकी नियुक्ति संभव नहीं थी।
रिसर्च के पेट्रन भी बन सकते हैं: प्रस्ताव में कहा गया कि डा. चतुर्वेदी ने भौतिकी विभाग में सेंटर फॉर एक्सीलेरेटर बेस्ड रिसर्च को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके होमी जहांगीर भाभा चेयर प्रोफेसर बनने से न सिर्फ यूनिवर्सिटी बल्कि इस पूरे क्षेत्र का विकास होगा। बैठक में भौतिकी विभाग के लाए गए प्रस्ताव को स्वीकार करने के साथ एक अन्य प्रस्ताव को भी स्वीकार किया, जिसमें डा.चतुर्वेदी को नेशनल सेंटर फॉर एक्सीलेरेटर बेस्ड रिसर्च का पेट्रन बनाना शामिल है।
पांचवे दीक्षांत समारोह को फरवरी में कराए जाने पर सहमति हुई। अनुसूचित जाति व जनजाति छात्रों को शुल्क जमा करने के विषय पर कई बिंदुओं पर रियायत देने के सुझावों पर भी चर्चा हुई। इनमें अजा व अजजा के 12 वीं के ऐसे छात्र जो टॉप पर आएं हो उनसे प्रवेश के समय कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। वे स्कॉलरशिप मिलने के दौरान ही शुल्क जमा कर सकेंगे। ऐसे ही और भी निर्णय लिए गए।
अन्य प्रस्तावों
पर चर्चा
धरना देने की चेतावनी
डा. चतुर्वेदी को शोधपीठ का चेयर प्रोफेसर बनाने के फैसले के निर्णय के खिलाफ यूनिवर्सिटी की पूर्व एचओडी व प्रोफेसर डा. गोपा बागची ने मोर्चा खोल दिया है। डा. बागची ने कहा कि यह कुलपति के दबाव में लिया गया निर्णय है। अगर डा. होमी जहांगीर भाभा शोधपीठ के चेयर प्रोफेसर के रूप में उनकी नियुक्ति होती है तो वे यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने
धरना देंगी।
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