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१०० विलुप्त बोलियों का विवि में होगा विकास

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी को सात राज्यों का सेंटर बनाया जाएगा। इस सेंटर में सौ विलुप्त बोलियों के विकास पर काम होगा।
यूजीसी ने गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी को इसके लिए अधिकृत किया है।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में विलुप्त बोलियों के विकास पर भी काम होगा। विश्व की लगभग 6700 भाषाओं, बोलियों में से आधी से अधिक भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। विलुप्त होती जा रही भाषाओं में बड़ी संख्या में भारत के विभिन्न प्रांतों में बोली जाने वाली भाषा, बोली हैं। इनमें 288 से ज्यादा जन जातीय बोलियां शामिल हैं। भाषाओं के विलुप्त होने के साथ ही संबंधित जन जातियों की लोक परंपराएं संस्कृति और जीवन पद्धति के भी विलुप्त होने का खतरा है। लोक संस्कृति एवं लोक भाषाओं को संरक्षित कर उन्हें पुर्नजीवित करने के लिए यूजीसी ने विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालय से सेंटर फॉर एनडेंजर लेंग्वेज बनाने के लिए प्रस्ताव मंगाया था। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ व इससे लगे हुए राज्यों में जन जातीय बाहुल्य,संस्कृति व सेंट्रल ट्राइबल बेल्ट और संविधान की 5वीं अनुसूची में घोषित सेंट्रल ट्राइबल बेल्ट होने के कारण केंद्र की स्थापना के लिए यह प्रस्ताव यूजीसी को भेजा था। इसमें छत्तीसगढ़, झारखंड,उड़ीसा में लगभग 100 से अधिक बोलियों को संरक्षित व पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र बनाने की पहल की गई थी। यूजीसी द्वारा उक्त प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति देकर अमरकंटक ट्राइबल विश्वविद्यालय,केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को क्लस्टर मोड में यह केंद्र बनाने के लिए यूजीसी मुख्यालय में बुलाया गया था। जिसे विश्वविद्यालय की ओर से 22 जनवरी को प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतिकरण के बाद यूजीसी ने इस केंद्र को बना कर तीनों विश्वविद्यालय का साझा सर्वेक्षण कर उनकी लोक भाषाओं व जनजातीय बोलियों के संरक्षण के लिए अधिकृत किया है।