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लिपिक भी नहीं मान रहे कलेक्टर का आदेश

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. कलेक्टर के आदेश के पखवाड़ेभर बाद भी लिपिकों ने अपनी नई जगह पर काम करना शुरू नहीं किया है। हद तो यह है कि अधिकांश ने ज्वाइनिंग तक नहीं दी है। हालांकि आदेश की अनदेखी का यह पहला मामला नहीं है लेकिन 21 में से किसी भी कर्मचारी के आदेश का पालन नहीं करने को गंभीरता से लिया जा रहा है।

कलेक्टोरेट में लिपिकों के टेबल बदले गए हैं। 10 जनवरी को प्रशासनिक कसावट के लिए एडिशनल कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने कलेक्टर के निर्देश पर आदेश जारी कर 21 लिपिकों के प्रभार बदले। आदेश में उन्होंने लिपिकों से कहा है कि वे अपनी जगह पर आने वाले कर्मचारी का इंतजार किए बगैर नया प्रभार लें। कलेक्टर के आदेश के बावजूद 21 में से अधिकांश ने ज्वाइनिंग देना भी जरूरी नहीं समझा है जबकि किसी ने भी काम करना शुरू नहीं किया है। लिपिकों को कलेक्टर के फरमान की चिंता नहीं है। उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं है कि उनके नई जगह पर ज्वाइन नहीं करने से काम प्रभावित हो रहा है। इधर लिपिकों द्वारा चार्ट तैयार करने का बहाना बनाया जा रहा है।

वहीं यह भी चर्चा है कि कुछ लिपिकों ने ज्वाइन करने की बात कही है लेकिन वे आते नहीं है। प्रशासनिक कसावट के उद्देश्य से प्रभार बदलने के आदेश पर लिपिक पानी फेर रहे हैं। इस बार 21 में से 13 महिला कर्मचारी है जबकि 8 पुरुष। विधानसभा चुनाव के पहले 27 सितंबर को कलेक्टोरेट के 13 लिपिकों का प्रभार और टेबल बदला गया था। तब कई लिपिकों ने तो 15 से 20 दिनों बाद ज्वाइनिंग दी थी। इससे पहले 12 अक्टूबर 2012 में 17 लिपिकों के टेबल बदले गए तो नियमों के पालन में चूक होने,कम अनुभवी कर्मचारी को महत्वपूर्ण पदों का जिम्मा देने के साथ ही एप्रोच और लेन देन के आधार पर टेबल बदलने की चर्चा सरगर्म रही। कुल मिलाकर कर्मचारियों के प्रभार में बदलाव यहां पिछले डेढ़-दो सालों से विवादित रहा है।