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आंखों के ऑपरेशन बढ़े, जांच होगी

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. गर्भाशय कांड की तरह अब स्मार्ट कार्ड से आंखों के ऑपरेशन की बाढ़ सी आ गई है। निजी अस्पतालों में सालभर के भीतर ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना ((आरएसबीवाई)) और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना ((एमएसबीवाई)) के जरिए निजी अस्पतालों में इतने अधिक ऑपरेशन हुए कि राज्य शासन सतर्क हो गया है। शासन ने ऑपरेशनों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सभी जिलों में आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

अंधत्व निवारण के लिए स्वास्थ्य विभाग योजना चलाता है। गांवों के मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन के साथ ही दवा व इलाज मुफ्त होता है। बालोद कांड के बाद शिविर और ऑपरेशन पर एहतियात बरते जा रहे हैं। इन सबके बीच शासन इसलिए सतर्क हो गया है कि इस क्षेत्र में प्राइवेट डॉक्टर और संस्थान कूद पड़े हैं। सालभर के भीतर बिलासपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों में आंखों के हजारों ऑपरेशन हुए। शेष पेज - १९

ये ऑपरेशन एनजीओ, बिचौलियों और निजी डॉक्टरों के जरिए हो रहे हैं। इनके लिए मरीजों का स्मार्ट कार्ड इस्तेमाल किया जा रहा है। आरएसबीवाई और एमएसबीवाई में आंख के एक ऑपरेशन के लिए 11 हजार रुपए का पैकेज है। यही वजह है कि एनजीओ व निजी संस्थान स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर गांव-गांव में शिविर लगाकर मरीज तलाश रहे हैं। उन्हें ऑपरेशन कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रदेश के एक-एक जिले में हजारों ग्रामीणों की आंखों के ऑपरेशन हो रहे हैं। नि:शुल्क शिविरों के बाद भी बढ़ते आंकड़ों से शासन हैरत में है। गर्भाशय कांड की तरह नेत्र कांड न हो, इसके लिए शासन ने सभी जिलों के सीएमएचओ को इन ऑपरेशनों की जांच के निर्देश दिए हैं।






एनजीओ व डॉक्टर होंगे जवाबदार

ऑपरेशन या इलाज के दौरान कोई गड़बड़ी सामने आने पर शासन ने एनजीओ और निजी डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय कर दी है। ऑपरेशन के बाद मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसे फॉलो करने के लिए कहा गया है।



यहां हुए अधिकांश ऑपरेशन

आंखों के अधिकतर ऑपरेशन रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, बेमेतरा व बलौदा बाजार में हुए हैं। इसकी जानकारी मिलने पर आला अफसरों ने आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए हैं। अन्य इलाकों में भी ऐसे मामले धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।



कैंप के लिए लेनी होगी अनुमति

ऑपरेशन में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन ने कड़े नियम भी तय कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के मुताबिक अब एनजीओ या निजी अस्पतालों को आईकैंप लगाने के लिए संबंधित इलाके के बीएमओ व सीएमएचओ से अनुमति लेनी होगी। ऑपरेशन के बाद मरीजों की सूची और इलाज की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। बीएमओ-सीएमएचओ को निगरानी रखने और किसी तरह की गड़बड़ी होने पर तत्काल रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।

आरएसबीवाई से हुए ऑपरेशनों की पुष्टि होगी

स्वास्थ्य संचालनालय ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, बेमेतरा, बलौदा बाजार के सीएमएचओ को सारे ऑपरेशनों की छानबीन और पुष्टि करने के निर्देश दिए हैं। जिन मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं, उनका नेत्र चिकित्सक से परीक्षण कराया जाएगा। यह जांच भी होगी कि सूची में दर्शाए गए पैकेज के अनुसार संबंधित मरीज का इलाज संबंधित अस्पताल में हुआ है या नहीं।

शासन ने बनाए नियम

ञ्च छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद में पंजीकृत डॉक्टरों को बेस हास्पिटल एप्रोच से ऑपरेशन करने के लिए संबंधित जिले के सीएमएचओ से अनुमति लेनी होगी।

ञ्च सीएमओ संबंधित डॉक्टर का पंजीयन देखकर अनुमति देंगे। इसकी कॉपी बीएमओ को दी जाएगी।

ञ्च एनजीओ या निजी डॉक्टर नेत्र परीक्षण की तारीख की जानकारी बीएमओ व सीएमओ को देंगे।

ञ्च वे हर माह के अंत में अपने अस्पताल में लाकर ऑपरेट किए गए मरीजों की सूची बीएमओ को देंगे। बीएमओ इसे विकासखंड की सर्वेक्षण सूची में दर्ज करेंगे।

ञ्च बेस हॉस्पिटल एप्रोच से निशुल्क ऑपरेशन के लिए एनआरएचएम मद से अनुदान लेने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

ञ्च आएसबीवाई मद से राशि लेने के लिए आरएसबीवाई के नियमों का पालन करना होगा।

ञ्च ऑपरेशन के बाद फालोअप करने की जवाबदारी एनजीओ व संबंधित निजी डॉक्टर की होगी।

ञ्च कोई शिकायत मिलने पर सीएमओ-बीएमओ जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य कार्यालय को भेजेंगे।

ञ्च किसी केजुअल्टी या जटिलता के लिए एनजीओ-निजी डॉक्टर विधिक रूप से स्वयं जवाबदार होंगे।

शिविर लगाकर मरीजों को निजी अस्पतालों तक लाया जा रहा, डॉक्टर गांवों में तलाश रहे मरीज

स्मार्ट कार्ड से हुए ऑपरेशनों की जांच के निर्देश, गर्भाशय कांड के बाद सतर्क हुई सरकार