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ठेके की रकम पूरी, पर काम अधूरा

7 वर्ष पहले
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लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा - बिलासपुर

९३०००-८५३४५

आदर्श औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कोनी में पानी की किल्लत अभी भी दूर नहीं हुई है। यहां बोर करने और पाइप लाइन बिछाने के लिए 6 माह पहले 19 लाख रुपए में टेंडर किया था। वर्कआर्डर जारी होने के बाद काम शुरू भी हुआ, लेकिन ठेकेदार ने बीच में ही काम बंद कर दिया। इससे यहां पानी की किल्लत तो दूर नहीं हुई, बल्कि खुदी हुई सड़कों से अव्यवस्था और बढ़ गई। इधर आईटीआई प्रबंधन पीएचई के अधिकारियों से बात कर काम शुरू कराने का प्रयास कर रहा है।

कोनी आईटीआई की स्थापना अंग्रेज शासन काल में हुई है। सबसे पुराने इस आईटीआई की स्थिति काफी खराब है। स्टूडेंट्स और शिक्षकों को पीने का पानी भी नहीं मिल रहा है। फरवरी 2013 में आईटीआई प्रबंधन ने पाइप लाइन बिछाने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी ((पीएचई)) विभाग से स्टीमेट लिया। पीएचई ने तय काम के लिए करीब 19 लाख रुपए का स्टीमेट बनाया। आईटीआई प्रबंधन ने शासन से इसके लिए बजट की स्वीकृति ली। आईटीआई प्रबंधन ने पीएचई विभाग को 19 लाख रुपए दे दिए। इसके बाद पीएचई से टेंडर निकाला गया। अप्रैल-मई 2013 में वर्कआर्डर जारी हुआ। एक ठेकेदार को काम दिया गया। शुरुआत में आईटीआई कालोनी और परिसर में मेन पाइप डालने का काम हुआ। इसके लिए सड़क किनारे की खुदाई कर उसमें मेन पाइप डाला गया। यहां अंग्रेजों का अस्तबल था, जिसे पानी टंकी बना दिया गया है। मेन पाइप लाइन पानी टंकी तक लाकर छोड़ दिया गया। वर्कआर्डर के हिसाब से यहां कई जगह बोर करना था। इसके बाद मेन पाइप लाइन से स्टाफ क्वार्टर और विभिन्न कार्यालयों में पानी की सप्लाई देनी थी। साथ ही पानी टंकी की मरम्मत भी करानी थी, लेकिन सिर्फ मेन पाइप लाइन डालकर काम बंद कर दिया गया।

अभी स्टाफ क्वार्टर और हास्टल में सुबह और शाम दो समय पानी की सप्लाई पानी टंकी से की जाती है। ओवरहैड टैंक नहीं होने होने के कारण सीमित मात्रा में पानी मिल पाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी हास्टल में रहने वाले छात्रों को होती है।



विभाग को

दिलचस्पी नहीं

आईटीआई प्रबंधन ने ठेके की राशि पीएचई को दे दी। इसके बाद टेंडर जारी कर काम कराने की जिम्मेदारी पीएचई विभाग की थी। काम बीच में ही बंद होने पर पीएचई के अधिकारी कोई जवाब दे रहे हैं और न ही आईटीआई के अधिकारी कुछ कह पा रहे हैं। जाहिर है, काम के लिए बजट शासन ने दे दिया, लेकिन काम पूरा कराने में आईटीआई और पीएचई के अधिकारी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।



और भी हैं मामले

ऐसे और भी कई संस्थानों और नगर पंचायतों में पाइप लाइन बिछाने के लिए पीएचई ने टेंडर निकाला था। इसमें शुरुआत में ठेकेदारों ने काम किया, बाद में इसे अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद पीएचई के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया और वर्षों से काम अधूरा ही पड़ा है।



1. कोनी आईटीआई परिसर स्थित पानी टंकी जहां रिपेयरिंग नहीं किया गया 2. खराब पड़ी मेन पाइप लाइन का वाल्व 3. खुदाई के बाद नहीं भरे गए गड्ढ़े।

नहीं की गई फिलिंग

आईटीआई परिसर के चारों तरफ पाइप डालने के लिए खुदाई की गई थी। पाइप डालने के बाद गड्ढों की फिलिंग नहीं की गई। यही वजह है कि सड़क के किनारे गड्ढों से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

॥आईटीआई परिसर में पाइप लाइन बिछाने का काम तो पीएचई ने ही कराया है। मैं फाइल देखकर कुछ कह सकता हूंञ्जञ्ज

संजय सिंह, ईई पीएचई

परिसर में ओवरहेड टैंक नहीं है। परिसर में पानी की सप्लाई बोर से होती है। बोर को कुछ समय तक ही चलाया जा सकता है। दूसरी तरफ बोर के पानी के क्लोरीनेशन में दिक्कत होती है। पानी सप्लाई के लिए यहां पूर्व में कई जगह बोर किया गया है। इसी तरह नए ठेके में भी कुछ और बोर ठेकेदार को करना था। टैंक होने पर एक ही बार में टंकी में पानी भर दिया जाता। इसके बाद घरों में पानी की सप्लाई की जाती है। इससे कम समय में प्र्याप्त पानी मिल सकता था।

ओवरहैड टैंक की जरूरत

पानी सप्लाई का फायदा

सालों पहले भी यहां पाइप लाइन बिछाने के लिए काम शुरू हुआ था। इस दौरान स्टाफ क्वार्टर, हास्टल और परिसर में पानी सप्लाई के लिए पाइप लाइन बिछाया गया। इससे ही यहां वर्तमान में पानी आपूर्ति हो रही है। यही वजह है कि कागजों में पानी सप्लाई दिखाकर फायदा ठेकेदार द्वारा उठाने की बात कही जा रही है।

भुगतान को लेकर झगड़ा

पाइप लाइन बिछाने के लिए पीएचई के अधिकारी और ठेकेदार के बीच भुगतान को लेकर विवाद की बात भी सामने आ रही है। यहां काम तो शुरू हुआ, लेकिन पूरा किए बिना बंद कर दिया गया। काम के हिसाब से ठेकेदार को भुगतान नहीं दिया जा रहा था। इसलिए ठेकेदार के बीच में ही काम छोडऩे की आशंका जताई जा रही है।

स्टाफ को ज्यादा परेशानी

यहां 50 से ज्यादा स्टाफ क्वार्टर है। इसमें आईटीआई के कर्मचारी परिवार सहित रहते हैं। सुबह और शाम सिर्फ दो समय ही काफी कम मात्रा में पानी की सप्लाई होने से इन परिवारों की पानी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही है।

॥पाइप लाइन बिछाने के लिए पीएचई को 19 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। इसके बाद भी पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई है। घरों में पानी का कनेक्शन देना, पानी टंकी की रिपेयरिंग और बोर का काम अभी बाकी है। इसके लिए पीएचई से संपर्क किया गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो रहा है।ञ्जञ्ज

सीपी सिंह कंवर, प्राचार्य आईटीआई

पानी की किल्लत से जूझ रहे छात्र और शिक्षक, बोर करने, ओवरहैड टैंक रिपेयरिंग



गड़बड़ी - कोनी आईटीआई क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुआ था 19 लाख रुपए में टेंडर