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हरेक मेमू में होगी टॉयलेट की सुविधा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर
मेमू ((ट्रेन)) में प्रसाधन की सुविधा नहीं होने से परेशान यात्रियों की समस्या पूरी तरह से तो नहीं लेकिन आंशिक तौर पर जरूर दूर होने वाली है। रेल प्रशासन ने जोन की हरेक मेमू में टायलेट युक्त बोगी लगाने का फैसला लिया है। प्रारंभिक तौर पर एक ट्रेन में कम से कम एक टॉयलेटयुक्त बोगी की सुविधा तो रहेगी ही। इसे ट्रेन के बीचो-बीच लगाया जाएगा, ताकि यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था साबित हो सके।
जोन के भीतर दौड़ रही 12 मेमू ट्रेनों में महज 3 ट्रेनों की रैक में टायलेट है। शेष 9 रैक की बोगियां बिना टॉयलेट की हैं। रैक का इस्तेमाल हरेक रूट पर अल्टरनेट होता है, लिहाजा हर रूट के यात्रियों को सफर के दौरान प्रसाधन की समस्या से जूझना पड़ता है। रेल प्रशासन चाहकर भी इस समस्या को दूर नहीं कर पा रहा है। कारण भी है कि रेलवे बोर्ड जोन को टॉयलेट वाली रैक नहीं दे पा रहा है। यात्रियों की बढ़ती शिकायत को देखते हुए अब वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। तय किया गया है कि तीन रैक की टॉयलेट युक्त 18 बोगियों को अन्य 12 रैक ((बिना टॉयलेट के)) में बांटा जाएगा। हरेक ट्रेन में कम से कम एक टॉयलेट युक्त बोगी जोड़ी जाएगी। इस बोगी को ट्रेन के बीचो-बीच लगाई जाएगी। इस तरह ट्रेन में कम से कम दो टायलेट की व्यवस्था रहेगी ही। इस योजना पर फरवरी के पहले पखवाड़े में ही
अमल किया जाएगा, यानी यात्रियों को आने वाले महीने में राहत मिलेगी।




॥मेमू में टॉयलेट की डिमांड लगातार हो रही है। टॉयलेट वाली बोगियों की कमी के कारण डिमांड पूरी करने में समय लग रहा है। यात्रियों की समस्या को ध्यान में रखकर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। हरेक ट्रेन में कम से कम एक ऐसी बोगी लगाई जाएगी, जिसमें दो टॉयलेट हो। यह व्यवस्था फरवरी में लागू की जाएगी।ञ्जञ्ज

आरके अग्रवाल, सीपीआरओ, एसईसीआर

बिलासपुर से कटनी के बीच चलने वाली मेमू का सफर 8:30 घंटे का होता है। बिलासपुर से कटनी तक सफर करने वालों को लगातार 8 घंटे बिना प्रसाधन के रहना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या महिला और बच्चों की रहती है। रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन के मुताबिक 3 घंटे से ज्यादा की दूरी तय करने वाली ट्रेनों में टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य है। दो साल पुराने फैसले पर जोन में अब तक अमल नहीं हुआ है। कारण यही है कि रेलवे बोर्ड बिना टॉयलेट वाली बोगियों को वापस लेकर टॉयलेट वाली बोगियां देने में सक्षम नहीं है।



साढ़े 8 घंटे का सफर, फिर भी ट्रेन में टायलेट नहीं

लंबी दूरी की ट्रेनों में होगी वैकल्पिक व्यवस्था