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आयुक्त पर भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण देने का आरोप

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर - भिलाई
नगर निगम में इन दिनों चिट्ठियों ने खलबली मचा रखी है। राज्य शासन को एक के बाद एक चिट्ठी लिखी जा रही है चिट्ठियों में निगम के आयुक्त अनिल टुटेजा, राजस्व अधिकारी एचके चंद्राकर और दोनों सुपरिटेंडेंट इंजीनियर्स सत्येंद्र सिंह व जीएस ताम्रकार पर अनियमितता के कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आयुक्त श्री टुटेजा पर आरोप लगाया गया है कि उनके कार्यकाल में निगम में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। विकास के कोई भी काम नहीं हो रहे हैं। गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को वे संरक्षण देते हैं। यह भी कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारी होकर यहां राजनीति कर रहे हैं।
राजस्व अधिकारी एचके चंद्राकर पर आरोप है कि वे फर्जी रसीद से टैक्स वसूल करवा रहे हैं। संपत्तिकर, समेकित कर, दुकान किराया की जमकर वसूली की जा रही है इससे आमजनता परेशान हैं। पूर्व में साडा कार्यकाल में कलेक्टर दर से कम कीमत पर भू आवंटन में भी श्री चंद्राकर पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
अधीक्षण यंत्री सत्येंद्र सिंह के खिलाफ लिखी शिकायत में कहा गया है कि वे 20 साल से गलत तरीके से बिल्डिंग परमिशन जारी करते रहे हैं। हाल ही में फिर कई परमिशन दी गई है जिसमें शत प्रतिशत एरिया पर निर्माण किया जा रहा है। जानकारी के बावजूद भवन अनुज्ञा शाखा कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इनमें प्रियदर्शिनी परिसर और शिवनाथ कांप्लेक्स में निर्माणाधीन मकान का जिक्र किया गया है।
पूर्व में बिल्डिंग परमिशन का काम देख रहे अधीक्षण यंत्री जीएस ताम्रकार पर बसंत टॉकीज के सामने फोरलेन किनारे एक शराब दुकान में अहाता निर्माण के लिए एक मंजिल का परमिशन देकर दो मंजिल बनवाने की शिकायत की गई थी। राज्य शासन के आदेश पर ताम्रकार के खिलाफ कार्रवाई भी हो गई। उनसे बिल्डिंग परमिशन विभाग छीन लिया गया।



गलत हैं तो कोई बचा नहीं सकता सही है तो कोई बिगाड़ नही सकता

ञ्चआपके सहित तीन सीनियर अफसर पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, इसमें कितनी सच्चाई है?

ञ्चञ्चइसमें कोई सच्चाई नहीं है। यह विघ्नसंतोषी लोगों की शरारत है। मेरा तो अनुरोध है एक्सपर्ट लोगों की तकनीकी समिति बनाकर सूक्ष्मता से जांच करा ली जाए।

ञ्चकौन हो सकता है? इसके पीछे किसका हाथ है?

ञ्चञ्चयह तो मुझे नहीं पता, लेकिन हां, जिनका भी निहित स्वार्थ पूरा नहीं हो पा रहा है यह उन्हीं की हरकत है।

ञ्चवह तो अपने आपको निगम का ईमानदार कर्मचारी बताता है?

ञ्चञ्चईमानदार कर्मचारी होता तो प्रामाणिकता के साथ शिकायत करता।

ञ्चलेकिन इससे अधिकारियों और निगम की छवि तो खराब हो ही रही है?

ञ्चञ्चबिलकुल नहीं है। शिकायतकर्ता ही झूठा है। सारे आरोप भी निराधार हैं।

ञ्चइससे अधिकारियों में तो निराशा है?

ञ्चञ्चकोई निराश नहीं है, मैंने कह रखा है अपना काम मन लगाकर कीजिए। कोई क्या आरोप लगाता है यह सोचने और विचलित होने की जरूरत नहीं है। अगर गलत करेंगे तो कोई बचा नहीं सकता और सही है तो कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता।

निगम - ३ बड़े अफसरों के खिलाफ चिट्ठी से खलबली

अनिल टुटेजा

आयुक्त नगर निगम