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- रेलवे के आला अधिकारी कर रहे टूटे स्लीपरों की अनदेखी
रेलवे के आला अधिकारी कर रहे टूटे स्लीपरों की अनदेखी
सिटी रिपोर्टर - दुर्ग
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 व 3 की रेल पटरी के नीचे लगे स्लीपरों को कई साल से बदला नहीं गया है। ज्यादातर स्लीपर टूट-फूट गए हैं। फिश प्लेट और नट-बोल्ट उखड़ गए हैं। स्लीपरों के नीचे गड्ढे हो गए है, जिसमें पानी भर गया है। रेल विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्लेटफार्म में प्रवेश करते समय ट्रेन में जर्क लगता है।
जानकारों को आशंका है कि ट्रैक की मरम्मत नहीं कराई गई तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है। हाल ही में सरोना-उरकुरा रेलवे स्टेशन के बीच हुई मालगाड़ी दुर्घटना के पीछे भी यही कारण था। सरोना-उरकुरा स्टेशन के बीच ट्रैक में पानी भरा था। यही स्थिति दुर्ग स्टेशन में है। स्थानीय प्रबंधन ने आला अधिकारियों को स्लीपर की स्थिति से अवगत करा दिया है। इसके बाद भी स्लीपर नहीं बदले जा रहे हैं। न ट्रैक की मरम्मत हो रही है। डिवीजन स्तर के अधिकारी कमोबेश हर महीने स्टेशन के दौरे पर आ रहे हैं। लेकिन टूटे-फूटे स्लीपर उन्हें दिखाई नहीं दे रहे हैं। 17 जनवरी को साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे बिलासपुर जोन के जीएम नवीन टंडन स्टेशन का दौरा करने आए थे। जीएम के साथ रायपुर मंडल के आला अधिकारी भी मौजूद थे।
प्लेटफार्म पर सर्वाधिक लोड : दुर्ग से होकर दिनभर में हर रोज लगभग 100 ट्रेनें गुजरती है। ((साप्ताहिक ट्रेनों को छोड़कर)) इनमें 53 ट्रेन नागपुर व 54 ट्रेन रायपुर की ओर जाती हैं। दोनों दिशा की ट्रेनों में से मात्र 17 ट्रेनों को प्लेटफार्म नंबर एक पर लिया जाता है। शेष ट्रेनें प्लेटफार्म नंबर 2 व 3 पर ली जाती हैं। इस हिसाब से सर्वाधिक लोड प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर ही रहता है। प्लेटफार्म नंबर-1 डमी होकर रह गया है। जबकि प्लेटफार्म नंबर 2 व 3 पर ट्रेनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
ब्लॉक लेने समय नहीं : मेगा ब्लॉक के बिना ट्रैक की मरम्मत मुमकिन नहीं है। लेकिन व्यस्त ट्रेफिक के कारण ब्लॉक लेना मुश्किल हो रहा है।