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छठवें वेतनमान की मांग को लेकर थमे स्कूल बसों के पहिए
सिटी रिपोर्टर - भिलाई
माइल स्टोन स्कूल में पिछले दस साल के कार्यरत ड्राइवर-कंडक्टर डीए, बेसिक, पीएफ, ईएसआई सहित छठवें वेतनमान की मांग को लेकर शुक्रवार को हड़ताल पर चले गए। स्कूल प्रबंधन ने हड़ताली कर्मचारियों की अधिकांश मांगे मान ली, लेकिन छठवें वेतनमान पर बने गतिरोध की वजह से हड़ताल जारी है। कर्मचारी दूसरे स्कूलों तक आंदोलन का विस्तार करने की बात कह रहे हैं।
माइल स्टोन स्कूल में कार्यरत करीबन 54 ड्राइवर-कंडक्टर में से करीब 40 सुबह से ही अपनी 11 सूत्री मांग को लेकर स्कूल परिसर के बाहर पंडाल पर हड़ताल पर बैठ गए। इन कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें शिक्षण अधिनियम के तहत डीए, बेसिक, एचआर, एलटीसी, पीएफ, ईएल-सीएल, ईएसआई जैसे सुविधाएं मुहैय्या कराई जाए। पुराने गिनती के ड्राइवर व कंडक्टर कार्य पर उपस्थित रहने की वजह से स्कूल की आधी बसों का ही बच्चों को लाने-ले जाने में उपयोग हो पाया। बस संचालन के लिए स्कूल प्रबंधन ने दूसरे ड्राइवर-कंडक्टर को बुलाया, लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के आक्रोश की वजह से वे भी बस नहीं चला पाए। आखिरकार गिनती के बस ड्राइवर-कंडक्टरों ने अतिरिक्त फेरे लगाकर बच्चों को घर छोड़ा। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की ओर से राजू पाल ने बताया कि वे सालों से स्कूल के लिए कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें डीए, बेसिक, एचआर, छठवें वेतनमान जैसी शिक्षण अधिनियम में लिखी सुविधाएं स्कूल प्रशासन मुहैय्या नहीं करा रहा है। जिस पर उन्होंने हड़ताल करने का निर्णय लिया है।
इधर स्कूल की प्राचार्य डा ममता शुक्ला का कहना है कि स्कूल के बस ट्रांसपोर्ट का काम घाटे में चल रहा है, बावजूद इसके हड़ताली कर्मचारियों की अधिकांश मांगे मान ली गई हैं। मसला छठवें वेतनमान पर रुका हुआ है, जिसे देना स्कूल प्रशासन के लिए संभव नहीं है।
छात्रों व पालकों को परेशानी हुई : स्कूल के बच्चों को शुक्रवार को हुई परेशानी के पीछे न केवल हड़ताली कर्मचारी बल्कि स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार रहा। हड़ताली कर्मचारियों ने एक दिन पहले ही धरने की सूचना स्कूल प्रशासन को दी थी, जिस पर समय रहते स्कूल प्रबंधन बच्चों की सहुलियत के लिए विकल्प बना सकता था।
माइलस्टोन स्कूल के ड्राइवर और कंडक्टर प्रदर्शन करते हुए।