उद्योगपतियों को देना ही होगा निर्यात कर
सिटी रिपोर्टर. भिलाई
शहर के उद्योगपतियों को निर्यात कर देना ही होगा। हाईकोर्ट निर्यात कर नहीं लेने की उनकी याचिका को पहले ही खारिज कर चुका है।अब नगर निगम ने ऐसे सभी उद्योगपतियों को जो निर्यात कर जमा नहीं कर रहे थे उन्हें डिमांड नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।
नगर निगम गठन के बाद 1999-2000 में तत्कालीन प्रशासक आलोक शुक्ला ने उद्योगों के लिए पहली बार निर्यात कर लागू किया। तब उद्योगपतियों ने इस पर एतराज जताया। कुछ बड़े उद्योगपति भिलाई इंजीनियरिंग कार्पोरेशन, बीके इंजीनयिरिंग कार्पोरेशन लिमिटेड, बीके इंजीनियरिंग एंड कास्टिंग लिमिटेड, सिंप्लेक्स इंजीनियरिंग एंड फाउंड्री वक्र्स, सिंप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड, विश्व विशाल इंजीनयिरिंग लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। तब कोर्ट ने निगम द्वारा लगाए गए निर्यात कर का 50 प्रतिशत जमा करने का आदेश देते हुए सुनवाई जारी रखी। अब कोर्ट ने निगम द्वारा निर्यातकर वसूलने को छत्तीसगढ नगर पालिका निगम एक्ट के प्रावधान के तहत बताते हुए उद्योगपतियों की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट में मामला लंबित था इसलिए बहुत से उद्योगपति निर्यात कर जमा नहीं कर रहे थे। कुछ लोग पचास फीसदी ही चुका रहे थे।
अब निगम ऐसे सभी उद्योगपतियों को डिमांड नोटिस भेज रहा है। इससे उद्योगपतियों को तगड़ा झटका लगा है। वे निर्यात कर समाप्त करने लगातार दबाव बनाए हुए थे। पिछले साल बजट पूर्व महापौर निर्मला यादव शहर के लोगों से सुझाव ले रही थीं, उसमें भी उद्योगपतियों की यही प्रमुख मांग थी। कई बार उनका प्रतिनिधिमंडल निगम आयुक्त से भी आग्रह करते रहे हैं।
5 करोड़ की आय होगी निगम को हर साल निर्यात कर से।
300 से भी अधिक उद्योग व अन्य कारोबारी संस्थानों को देना होगा कर।
30 लाख रुपए हर साल निर्यात कर चुकाता है बीएसपी।
1.33 करोड़ रुपए बकाया निर्यात कर जमा किया जेपी सीमेंट प्रबंधन ने।
खास बातें
इस दर से देना होगा
उद्योग दर ((मूल्य के आधार पर))
लोहा तथा मशीनरी 0.10 प्रतिशत
बिजली व इलेक्ट्रानिक्स सामान 0.50 प्रतिशत
साबुन, सोडा प्रसाधन सामग्री 0.25 प्रतिशत
भवन में लगने वाली इमारती लकड़ी 0.50 प्रतिशत
सीमेंट, ईंट, फर्शी, टाइल्स 0.20 प्रतिशत
फर्नीचर 0.25 प्रतिशत
जूते, चप्पल 0.10 प्रतिशत
अन्य स्थानीय उत्पाद 0.10 प्रतिशत
गलत जानकारी दी तो
निगम किसी भी संस्थान में बगैर कोई पूर्व सूचना या नोटिस के पहुंचकर दस्तावेजों की जांच कर सकता है। स्व विवरणी में गलत जानकारी देने पर देय कर का दस गुना पेनल्टी वसूलने का प्रावधान है।
ऐसे पकड़ में आ सकते हैं
गलत जानकारी देने वाले आसानी से पकड़ में आ सकते हैं। निगम प्रशासन संस्थानों द्वारा सेल्स टैक्स विभाग में जमा कराए गए दस्तावेजों से क्रास चेक करेगा।
क्या है निर्यात कर
नगर निगम सीमा से सड़क मार्ग से बाहर जाने वाले उत्पाद पर लगने वाला कर है। रेल व समुद्री मार्ग से जाने वाले उत्पाद इसके दायरे में नहीं आते।
कैसे चुकाएं
संपत्तिकर की तरह सभी
उद्योगों को अपनी बिक्री का स्व विवरणी भरना होगा। निगम उसी आधार पर निर्यात कर वसूली करेगा।
उद्योगपतियों को अब देना ही होगा निर्यात कर
हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद निगम भेज रहा डिमांड नोटिस
नगर निगम